NEWS: भीषण गर्मी में जहां इंसान अपनी प्यास बुझाने के कई रास्ते तलाश लेता है, वहीं बेज़ुबान पक्षी और जानवर पानी की तलाश में भटकते नजर आते हैं। ऐसे समय में शहर की संस्था ‘बीइंग रेस्पॉन्सिबल’ इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए पिछले चार वर्षों से ‘दाना-पानी’ अभियान चला रही है।
बेज़ुबानों के लिए राहत का सहारा
संस्था हर साल गर्मियों में शहर के अलग-अलग इलाकों में मिट्टी के सकोरे और दाने वितरित करती है, ताकि पक्षियों और जानवरों को पानी और भोजन मिल सके। इस वर्ष भी संस्था ने 200 से अधिक सकोरे लोगों तक पहुंचाए हैं।
NEWS: ‘बेजुबान हैं तो क्या हुआ, प्यास उन्हें भी लगती है’
संस्था का मानना है कि जो जीव अपनी तकलीफ बयां नहीं कर सकते, उनकी जिम्मेदारी समाज को उठानी चाहिए। संस्था इसी भावना के साथ लोगों से अपील कर रही है कि वे अपने घरों, छतों और आसपास पानी से भरे सकोरे रखें और रोज उन्हें भरने की जिम्मेदारी निभाएं।
छोटा प्रयास, कई जिंदगियों का सहारा
संस्था के अनुसार मिट्टी का एक छोटा सकोरा किसी पक्षी या जानवर के लिए जीवन बचाने का माध्यम बन सकता है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पेड़ों-जलस्त्रोतों की कमी के कारण पक्षियों के प्राकृतिक संसाधन लगातार खत्म हो रहे हैं। ऐसे में यह पहल उनके लिए राहत का बड़ा सहारा बन रही है।
NEWS: समाज में बढ़ रही जागरूकता
बीइंग रेस्पॉन्सिबल की यह पहल बिना किसी दिखावे के लगातार आगे बढ़ रही है। अब शहर के कई लोग भी इस अभियान से प्रेरित होकर अपने घरों और मोहल्लों में पानी रखने लगे हैं। संस्था का कहना है कि इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर उस जीव के लिए होती है, जो जीवन जीने का अधिकार रखता है।
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