Night Eating Syndrome: भूख लगना और भोजन करना हमारे शरीर के लिए जरूरी है, क्योंकि खाने से ही शरीर को काम करने के लिए ऊर्जा मिलती है। कई बार ऐसा होता है कि रात में अचानक भूख महसूस होने लगती है। उस समय अधिकतर लोग जल्दी मिलने वाले पैक्ड फूड का सहारा लेते हैं। कोई बिस्किट खा लेता है, तो कोई नूडल्स बनाकर छोटी भूख को शांत कर लेता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर रात में भूख लगने की वजह क्या होती है।

नाइट ईटिंग सिंड्रोम का बड़ा कारण
बहुत कम लोगों को पता है कि इस स्थिति को विज्ञान की भाषा में नाइट ईटिंग सिंड्रोम कहा जाता है। यह ऐसी अवस्था होती है, जिसमें व्यक्ति दिन में ज्यादा खाने की इच्छा पर किसी तरह नियंत्रण कर लेता है, लेकिन रात के समय भूख बहुत तेज महसूस होती है। कई बार यह भूख इतनी बढ़ जाती है कि बिना कुछ खाए रहना मुश्किल हो जाता है। इसी कारण कुछ लोग रात के खाने पर नियंत्रण नहीं रख पाते। कई लोगों के साथ ऐसा भी होता है कि वे नींद से उठकर खाना खाने लगते हैं। इस तरह के लक्षण अक्सर असंतुलित जीवनशैली की ओर इशारा करते हैं।

Night Eating Syndrome: गलत दिनचर्या बिगाड़ती पाचन संतुलन
आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या अक्सर गलत दिनचर्या और पाचन अग्नि के असंतुलन से जुड़ी होती है। देर रात तक जागना भी इसका एक बड़ा कारण माना जाता है। जब शरीर का तय भोजन समय बिगड़ जाता है, तो इसका असर पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। आमतौर पर रात का समय शरीर के आराम और मरम्मत के लिए माना जाता है। ऐसे समय में बार-बार भोजन करने से पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। धीरे-धीरे इससे वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है और सुबह उठने पर शरीर में भारीपन महसूस हो सकता है। इसके अलावा नींद की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है, जिससे पूरे दिन थकान और सुस्ती बनी रहती है।

आयुर्वेद के आसान उपाय अपनाएं
इन समस्याओं से बचने के लिए आयुर्वेद में कुछ आसान उपाय बताए गए हैं, जिनकी मदद से धीरे-धीरे जीवनशैली को बेहतर बनाया जा सकता है। सबसे पहले कोशिश करें कि रात का खाना सूर्यास्त के आसपास या उससे पहले कर लिया जाए और भोजन हल्का हो। खाने में ज्यादा तली-भुनी चीजें नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे भोजन को पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
इसके अलावा एक और सरल उपाय यह है कि सोने से पहले गुनगुना दूध पिया जाए। गुनगुना दूध अच्छी और गहरी नींद लाने में मदद करता है। इससे मन और दिमाग शांत होते हैं, जिससे आरामदायक नींद मिलती है। साथ ही रात के समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करना भी जरूरी है, क्योंकि स्क्रीन की रोशनी नींद पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
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