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ओडिशा हुआ नक्सल-मुक्त? सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा दावा

ओडिशा में वर्षों से जारी माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रहा अभियान अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंचता दिख रहा है। एडीजी पांडा ने साफ चेतावनी दी है कि अब सरेंडर का समय खत्म हो चुका है और जो भी माओवादी अभी भी सक्रिय हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

Odisha: ओडिशा में वर्षों से जारी माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रहा अभियान अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंचता दिख रहा है। एंटी-नक्सल ऑपरेशन के एडीजी संजीव पांडा ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि राज्य के ज्यादातर माओवाद प्रभावित जिले अब पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो चुके हैं। उनके अनुसार माओवादियों की नई भर्ती लगभग पूरी तरह बंद हो चुकी है और अब केवल कुछ ही उग्रवादी दूरदराज के जंगलों में छिपे हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ओडिशा अब धीरे-धीरे स्थायी शांति की ओर बढ़ रहा है।

लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता

एडीजी संजीव पांडा ने बताया कि माओवाद के खिलाफ यह लड़ाई बिल्कुल आसान नहीं थी। यह एक लंबा और चुनौतीपूर्ण अभियान रहा, जिसमें सुरक्षाबलों को कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। वर्षों तक लगातार ऑपरेशन चलाने, बेहतर रणनीति अपनाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय के कारण ही यह सफलता हासिल हो पाई है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक दिन या एक साल की नहीं, बल्कि लंबे समय की मेहनत और बलिदान का परिणाम है।

Odisha: आंकड़ों में कमजोर पड़ा माओवादी नेटवर्क

सुरक्षा एजेंसियों के आंकड़े भी इस दावे को मजबूत करते हैं। कुल 156 माओवादियों को या तो मुठभेड़ों में ढेर किया गया या उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया गया। इनमें 27 माओवादी मारे गए, 9 को गिरफ्तार किया गया, जबकि 78 ने ओडिशा में सरेंडर किया और 42 ने पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में हथियार डाल दिए। इन आंकड़ों से साफ संकेत मिलता है कि माओवादी संगठन की पकड़ अब काफी कमजोर हो चुकी है और उनका नेटवर्क तेजी से टूट रहा है।

Odisha: जिलों में बदली तस्वीर, लेकिन कीमत भारी

पहले ओडिशा के 9 जिले माओवाद से प्रभावित माने जाते थे, लेकिन अब उनमें से 8 जिले पूरी तरह माओमुक्त बताए जा रहे हैं। हालांकि इस सफलता के पीछे बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी है। अभियान के दौरान 239 जवान शहीद हुए, जिनकी कुर्बानी को एडीजी पांडा ने इस उपलब्धि का सबसे बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि इन जवानों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और यही वजह है कि आज राज्य में शांति का माहौल बन पाया है।

अब आखिरी चरण में कार्रवाई, सतर्कता जारी

Odisha: एडीजी पांडा ने साफ चेतावनी दी है कि अब सरेंडर का समय खत्म हो चुका है और जो भी माओवादी अभी भी सक्रिय हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल ओडिशा पर किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है, लेकिन अगले दो साल तक सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहेंगी। उनका लक्ष्य सिर्फ माओवाद का खात्मा नहीं, बल्कि राज्य में स्थायी शांति और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

 

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