PARLIAMENT SESSION: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के समाप्त होने के बाद संसद के मानसून सत्र में राजनीतिक फोकस बदलने के संकेत मिल रहे हैं। सोमवार को केंद्र सरकार लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष अब अयोध्या से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकता है।
पेपर लीक के बाद नया मुद्दा तलाशने की तैयारी
20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन विपक्ष का प्रमुख मुद्दा रहा। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद में लगातार हंगामा किया और चर्चा से पहले जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। अब इस्तीफे के बाद सरकार पेपर लीक पर सख्त कानून लाने जा रही है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव का स्वरूप बदल सकता है।
PARLIAMENT SESSION: अयोध्या पर विपक्ष का फोकस
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि विपक्ष अब अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी के मामले को संसद में प्रमुखता से उठा सकता है। खासकर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से अहम मान रही हैं।
गृह मंत्री पर भी सवाल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं कि छात्रों पर बल प्रयोग के लिए केवल शिक्षा मंत्री ही नहीं, बल्कि गृह मंत्री की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। ऐसे में विपक्ष संसद में कानून-व्यवस्था और अयोध्या से जुड़े मामलों को जोड़ते हुए सरकार को घेरने की रणनीति बना सकता है।
PARLIAMENT SESSION: सरकार का पलटवार भी संभव
सरकार की ओर से सोमवार को प्रस्तावित एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान परीक्षा प्रणाली में सुधार, फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा के प्रावधानों को प्रमुखता दी जाएगी। साथ ही भाजपा विपक्ष पर पलटवार करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं और परीक्षा घोटालों का मुद्दा भी उठा सकती है।
अब संसद के आगामी सप्ताह में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक बहस पेपर लीक कानून तक सीमित रहती है या अयोध्या और अन्य मुद्दों पर नया टकराव देखने को मिलता है।
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