PoK History: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इन दिनों हालात एक बार फिर चर्चा का विषय बने हुए हैं। रावलकोट समेत कई इलाकों में स्थानीय लोग पाकिस्तान सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस बीच एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कश्मीर का यह हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में कैसे पहुंचा और इसके पीछे का इतिहास क्या है।
आजादी के बाद कश्मीर की स्थिति क्या थी?
1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत थी, जिसके शासक महाराजा हरि सिंह थे। उस समय उन्होंने न तो भारत और न ही पाकिस्तान के साथ तत्काल विलय करने का फैसला लिया था। उनकी इच्छा थी कि जम्मू-कश्मीर एक स्वतंत्र रियासत के रूप में बना रहे। हालांकि, यह स्थिति ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी।
PoK History: पाकिस्तान समर्थित कबायली हमला बना बड़ा मोड़
22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान समर्थित कबायली लड़ाकों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया। इतिहासकारों के अनुसार, इस हमले को पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त था और इसका उद्देश्य कश्मीर पर जबरन कब्जा करना था। हमलावर तेजी से श्रीनगर की ओर बढ़ने लगे, जिससे पूरे इलाके में अस्थिरता फैल गई और महाराजा हरि सिंह के सामने गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा हो गया।बिगड़ते हालात को देखते हुए महाराजा हरि सिंह ने भारत से सैन्य सहायता मांगी। भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि सैन्य मदद तभी संभव होगी, जब जम्मू-कश्मीर विधिवत भारत में विलय करेगा। इसके बाद महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर हस्ताक्षर किए और जम्मू-कश्मीर आधिकारिक रूप से भारत का हिस्सा बन गया। इसके अगले दिन भारतीय सेना श्रीनगर पहुंची और हमलावरों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया।
PoK History: संयुक्त राष्ट्र तक कैसे पहुंचा मामला?
युद्ध के बीच यह विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया। भारत ने 1 जनवरी 1948 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का रुख किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने कई प्रस्ताव पारित किए, जिनमें संघर्ष विराम, शांति बहाली और परिस्थितियां सामान्य होने के बाद जनमत संग्रह कराने की बात कही गई।संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में साफ कहा गया था कि जनमत संग्रह कराने से पहले पाकिस्तान को उन सभी क्षेत्रों से अपनी सेना और कबायली लड़ाकों को पूरी तरह हटाना होगा, जिन पर उसने कब्जा किया था। लेकिन पाकिस्तान ने इस शर्त का पालन नहीं किया। ऐसे में जनमत संग्रह की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और यह मुद्दा अधूरा रह गया।
PoK History: सीजफायर के बाद बना पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर
1948 के अंत में संयुक्त राष्ट्र की पहल पर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम लागू हुआ। उस समय तक जम्मू-कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के नियंत्रण में आ चुका था। युद्धविराम के बाद दोनों देशों की सेनाएं जहां थीं, वहीं रुक गईं। इसके परिणामस्वरूप जो क्षेत्र पाकिस्तान के नियंत्रण में रहा, वही आगे चलकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के नाम से जाना जाने लगा। भारत आज भी इस पूरे क्षेत्र को अपना अभिन्न अंग मानता है, जबकि पाकिस्तान इसका प्रशासन अपने नियंत्रण में चलाता है।
एक बार फिर चर्चा में है पीओके
वर्तमान में रावलकोट समेत पीओके के कई इलाकों में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। प्रदर्शनकारी राजनीतिक अधिकारों, बेहतर सुविधाओं और प्रशासनिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। इन घटनाओं के बीच पीओके का इतिहास और उसका भारत-पाकिस्तान विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह मुद्दा आज भी दक्षिण एशिया की सबसे संवेदनशील और जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों में शामिल है।
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