Home » पंजाब » 560 दिन टावर पर जंग, नीचे उतरते ही चूमी धरती बोले- ‘हम जीत गए’, पढ़िए खालसा के अद्भुत संघर्ष की कहानी…

560 दिन टावर पर जंग, नीचे उतरते ही चूमी धरती बोले- ‘हम जीत गए’, पढ़िए खालसा के अद्भुत संघर्ष की कहानी…

560 दिन का विरोध प्रदर्शन समाप्त

Punjab News: पंजाब के पटियाला में चला देश का सबसे अनोखा विरोध आखिरकार अंजाम तक पहुंच गया। पूर्व सैनिक और किसान गुरजीत सिंह खालसा, जो 400 फीट ऊंचे बीएसएनएल टावर पर 560 दिनों से ज्यादा समय से डटे थे, शुक्रवार (24 अप्रैल) को सुरक्षित नीचे उतार लिए गए। 12 अक्टूबर 2024 को शुरू हुआ यह आंदोलन गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की मांग को लेकर था—और अब कानून बनने के बाद खालसा ने अपना मोर्चा खत्म कर दिया।

हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन

दमकल विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीम ने मिलकर बेहद सावधानी से ऑपरेशन चलाया। हाइड्रोलिक टर्नटेबल लैडर, क्रेन, हार्नेस और रस्सियों की मदद से खालसा को नीचे लाया गया। करीब 30-40 मिनट के इस ऑपरेशन से पहले दो घंटे तक मॉक ड्रिल की गई। हवा की रफ्तार और 110 किलो वजनी खालसा को ध्यान में रखते हुए हर कदम पर सुरक्षा के इंतजाम किए गए। जैसे ही वे नीचे आए, “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

Punjab News: 18 महीने 12 दिन बाद… ये जीत है

जमीन पर कदम रखते ही खालसा ने कहा कि या तो शहीद होना था या मोर्चा जीतना था… और आज ये जीत है। इसके बाद उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जहां समर्थकों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। दरअसल, पंजाब सरकार ने हाल ही में जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 लागू किया है। इस कानून में बेअदबी के मामलों में उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसी के बाद खालसा ने टावर से उतरने का फैसला लिया।

560 दिनों के इस संघर्ष में खालसा 8-10 फीट के अस्थायी तंबू में रहते थे। खाना, पानी और जरूरी सामान रस्सियों के जरिए ऊपर पहुंचाया जाता था। कड़ाके की सर्दी और भीषण गर्मी हर मौसम में उनका हौसला कायम रहा। वहीं खालसा की मां परमजीत कौर ने भावुक होकर कहा ने मेरा बेटा योद्धा है। उसने कहा था कि या तो कानून बनेगा या वह वापस नहीं आएगा।अब कानून बनने के बाद यह अनोखा आंदोलन खत्म हो गया है, लेकिन गुरजीत खालसा का यह संघर्ष पंजाब की राजनीति और समाज में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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