Raghav Chadha News: राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने के बाद अब मामला कानूनी और संवैधानिक बहस में बदल गया है। जहां एक तरफ चड्ढा अपने कदम को संविधान के तहत सही ठहरा रहे हैं, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए अयोग्यता की मांग करने की तैयारी में है।
दो-तिहाई नियम का दिया हवाला
राघव चड्ढा ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो यह दल-बदल कानून के दायरे में नहीं आता। उन्होंने दावा किया कि सभी संबंधित सांसदों ने इस फैसले पर सहमति जताते हुए पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया गया है।
Raghav Chadha News: AAP ने बताया ‘ऑपरेशन लोटस’
AAP ने इस घटनाक्रम को भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ करार दिया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों के दबाव के जरिए उनके सांसदों को तोड़ा गया है। संजय सिंह ने कहा कि यह लोकतंत्र और जनादेश के साथ धोखा है।
तीन सांसदों पर अयोग्यता की तलवार
AAP के राज्यसभा व्हिप एनडी गुप्ता ने साफ किया है कि पार्टी राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराएगी। पार्टी का कहना है कि इन नेताओं ने आधिकारिक रूप से भाजपा जॉइन कर ली है, जो स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने के बराबर है।
Raghav Chadha News: क्या कहता है दल-बदल कानून?
भारत में 1985 में लागू दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अगर कोई सांसद या विधायक अपनी पार्टी छोड़ता है या व्हिप के खिलाफ वोट करता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण अपवाद यह है कि यदि किसी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से छूट मिल सकती है।
सवाल जो अभी बाकी हैं
अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या वास्तव में दो-तिहाई सांसदों का आंकड़ा पूरा हुआ है? क्या सभी सांसद आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल हुए हैं? और क्या सभापति इस मामले में अयोग्यता की कार्रवाई करेंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
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