RAJYASABHA ELECTION: 18 जून को 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला चुनाव केंद्र की सत्तारूढ़ एनडीए सरकार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। चुनाव परिणाम भी मतदान के दिन ही आने की संभावना है। इस चुनाव के जरिए एनडीए उच्च सदन में अपनी ताकत बढ़ाने और दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य के करीब पहुंचने की कोशिश करेगा।
राज्यसभा में क्या है मौजूदा गणित?
245 सदस्यीय राज्यसभा में वर्तमान में एनडीए के पास 148 सांसद हैं, जिनमें भाजपा के 113 सदस्य शामिल हैं। दो-तिहाई बहुमत के लिए गठबंधन को अभी लगभग 15 और सांसदों की जरूरत है। ऐसे में इस चुनाव को संसद में भविष्य के शक्ति संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
RAJYASABHA ELECTION: 10 राज्यों की 24 सीटों पर होगा चुनाव
इस बार आंध्र प्रदेश और गुजरात में 4-4 सीटों, मध्य प्रदेश और राजस्थान में 3-3 सीटों, कर्नाटक में 4 सीटों, झारखंड में 2 सीटों तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में एक-एक सीट पर मतदान होगा। इसके अलावा दो सीटों पर उपचुनाव भी कराए जाएंगे।
आंध्र और गुजरात में एनडीए को बड़ी उम्मीद
आंध्र प्रदेश में टीडीपी, भाजपा और जन सेना गठबंधन के पास भारी बहुमत है, जिसके चलते एनडीए सभी चार सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है। वहीं गुजरात में भाजपा के पास 161 विधायक होने के कारण चारों सीटें उसके खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है।
RAJYASABHA ELECTION: कर्नाटक और राजस्थान में दिलचस्प मुकाबला
कर्नाटक में चार सीटों के लिए मुकाबला रोचक माना जा रहा है। यहां कांग्रेस दो सीटों और एनडीए एक सीट पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है, जबकि चौथी सीट पर कड़ा संघर्ष संभव है। राजस्थान में भाजपा दो और कांग्रेस एक सीट जीत सकती है।
मध्य प्रदेश में भाजपा को बढ़त
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के नतीजे भी काफी हद तक स्पष्ट नजर आ रहे हैं. विधानसभा में भाजपा के मजबूत संख्या बल को देखते हुए पार्टी दो सीटें जीत सकती है. वहीं एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है.
RAJYASABHA ELECTION: झारखंड में रणनीति तय करेगी नतीजे
झारखंड में इंडिया गठबंधन की सरकार होने के कारण दोनों सीटों पर उसका दावा मजबूत माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि एनडीए रणनीतिक मतदान के जरिए मुकाबले को रोचक बना सकता है।
संसद के भविष्य के समीकरणों पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही इस चुनाव के बाद एनडीए तुरंत दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक न पहुंचे, लेकिन बेहतर प्रदर्शन उसे राज्यसभा में और मजबूत स्थिति प्रदान कर सकता है। इसलिए 18 जून का चुनाव केवल सीटों का मुकाबला नहीं, बल्कि आने वाले समय के राजनीतिक और संसदीय समीकरणों का भी संकेत माना जा रहा है।
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