Ram Mandir Controversy: इन दिनों सोशल मीडिया पर मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और दान राशि को लेकर कई तरह के दावे और आरोप वायरल हो रहे हैं। कुछ पोस्ट्स में मंदिर प्रबंधन पर चढ़ावे में कथित हेरफेर और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक और तथ्यहीन बताया है।
सीएम को लिखा था पत्र
मामला तब चर्चा में आया जब संत दिनेश शर्मा, जिन्हें फलाहारी महाराज के नाम से भी जाना जाता है, ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की। पत्र में आरोप लगाया गया कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कई बार सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते हैं और सोने-चांदी के आभूषणों तथा नकद दान का पारदर्शी लेखा-जोखा नहीं रखा जाता। इन आरोपों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाए, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने इन दावों को अपुष्ट बताते हुए जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने की सलाह दी।
Ram Mandir Controversy: ट्रस्ट ने आरोपों पर क्या कहा?
श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि बिना प्रमाण लगाए जा रहे आरोप मंदिर की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हैं। ट्रस्ट का दावा है कि मंदिर में दान और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत संचालित होती है और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बरती जाती है।
जिलाधिकारी क्या बोले?
जबकि इस मामले में मथुरा के जिलाधिकारी सीपी सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही कई जानकारियां भ्रामक हैं। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की गई है और अब तक किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या धोखाधड़ी के प्रमाण नहीं मिले हैं। उनके अनुसार, श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में भागवत भवन, योगमाया मंदिर, यशवंतदेव मंदिर समेत कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और दान-पुण्य के लिए पहुंचते हैं। मंदिर प्रबंधन नियमित रूप से दान पेटियों और चढ़ावे की गणना करता है।
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि जहां चढ़ावे की गिनती होती है, वहां सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और उनकी रिकॉर्डिंग लगभग 30 दिनों तक सुरक्षित रखी जाती है। प्रारंभिक जांच में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आई है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मंदिर और धार्मिक संस्थाओं से जुड़ी किसी भी जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।
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