Home » उत्तर प्रदेश » Sambhal Case: संभल की शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद की सुनवाई फिर टली, अब 8 जनवरी को होगी अगली पेशी

Sambhal Case: संभल की शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद की सुनवाई फिर टली, अब 8 जनवरी को होगी अगली पेशी

अदालत सुनवाई और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर

Sambhal Case: 3 दिसंबर 2025, बुधवार के दिन संभल की शाही जामा मस्जिद बनाम श्री हरिहर मंदिर विवाद पर जिला अदालत में कोई कार्यवाही नहीं हुई, क्योंकि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट को देखते हुए चंदौसी स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाते हुए 8 जनवरी 2026 तय कर दी है। अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे और बड़ी संख्या में पुलिस और अधिकारी वहां मौजूद थे, लेकिन कानूनी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण जिला अदालत को सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।

अदालत सुनवाई और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर
अदालत सुनवाई और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर

Sambhal Case: 19 नवंबर 2024 के दावे के बाद शुरू हुआ था सर्वे

Sambhal Case: बता दें कि हिंदू पक्ष की तरफ़ से 19 नवंबर 2024 को यह दावा किया गया था कि संभल में मौजूद शाही जामा मस्जिद असल में प्राचीन श्री हरिहर मंदिर के अवशेषों पर बनाई गई है। इस दावे के आधार पर चंदौसी सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में वाद दायर किया गया। हिंदू पक्ष की पैरवी प्रसिद्ध वकील विष्णु शंकर जैन कर रहे हैं, जिन्होंने पहले ज्ञानवापी मामले में वकालत की थी।

Sambhal Case: अदालत सुनवाई और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर
अदालत सुनवाई और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर

सर्वे के दौरान तनाव बढ़ा, कई गिरफ्तारियां भी हुईं

Sambhal Case: जैसे ही यह वाद दायर किया गया, उसी के बाद पहले चरण का सर्वे 19 नवंबर की शाम को शुरू हुआ और दूसरा चरण 24 नवंबर को पूरा किया गया। सर्वे के दौरान इलाके के हालात बिगड़ गए और यह मामला हिंसा में बदल गया। भीड़ द्वारा पुलिस पर पथराव और फायरिंग भी की गई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, वहां मौजूद वाहनों में आग लगा दी गई। इसके बाद 130 आरोपियों को जेल भेजा गया, जिनमें से अब तक 38 लोगों की जमानत हो चुकी है। इस मामले में मस्जिद प्रबंधन के अध्यक्ष जफर अली एडवोकेट भी शामिल थे।

हिंदू पक्ष द्वारा किए गए इस दावे को मुस्लिम पक्ष ने सिरे से नकारा है। उनका कहना है कि यह दावा निराधार है और इसे नया सियासी मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है। मुस्लिम पक्ष के अनुसार यह मामला तथ्यों पर आधारित नहीं है।

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