Smit Machar: फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर ओमानी को-पायलट के कथित हमले के मामले में जांच का दायरा अब और बड़ा हो गया है। सऊदी अरब में हिरासत में लिए गए ओमानी को-पायलट को UAE को सौंप दिया गया है और अमीराती जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या विमान में हुई घटना का कोई आतंकी मकसद, पहले से बनाई गई योजना या किसी संगठन से संबंध था। इसी बीच विमान के भीतर का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक युवक ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए दिखाई दे रहा है। सवाल उठ रहा है कि यह युवक कौन था, उसने ऐसा क्यों कहा और क्या इसका कॉकपिट में हुए हमले से कोई संबंध था? लेकिन इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिलेंगे। अभी उपलब्ध जानकारी में इस वीडियो को हमले से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।
FZ1073 में आखिर हुआ क्या था?
30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। उड़ान के दौरान कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार और ओमानी को-पायलट के बीच गंभीर घटना हुई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार को-पायलट ने मच्छार पर हमला किया और विमान को नियंत्रण से बाहर ले जाने की कोशिश की। घटना के दौरान विमान तेजी से नीचे आया। रिपोर्टों के मुताबिक विमान करीब 30,875 फीट की ऊंचाई से लगभग 16,750 फीट तक करीब 29 सेकंड में नीचे आया। आपातकालीन संकेत सक्रिय हुए और कुछ ही समय में यात्रियों को भी समझ आने लगा कि विमान में असामान्य स्थिति है।
घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में भूमिका निभाई। इसके बाद यात्रियों और अन्य पायलटों ने मिलकर आरोपी को काबू किया और विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।
Smit Machar: अब ओमानी को-पायलट UAE के हवाले, जांच में आतंक का एंगल भी
घटना के बाद आरोपी ओमानी को-पायलट को सऊदी अरब में हिरासत में लिया गया था। अब उसे UAE को सौंप दिया गया है। UAE ने जांच शुरू करते हुए यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की है कि घटना के पीछे कोई आतंकवादी उद्देश्य था या नहीं और क्या इसके लिए पहले से योजना बनाई गई थी या किसी ने निर्देश दिया था। यानी फिलहाल दो बातें अलग-अलग हैं- पहली, विमान में कॉकपिट के अंदर हमला हुआ और विमान गंभीर खतरे में आया; दूसरी, क्या यह आतंकी हमला था? दूसरी बात का अंतिम जवाब अभी जांच के पास नहीं है। वही दूसरे एंगल से ‘आतंकी कनेक्शन’ की इशारा हो रहा है और गहन जांच की जाएगी।
वायरल वीडियो में ‘अल्लाहु अकबर’… कौन था वह युवक?
घटना के बाद सामने आए एक वीडियो ने कहानी में एक नया सवाल जोड़ दिया है। वीडियो में विमान के भीतर एक युवक ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए दिखाई देता है। यहीं से सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे शुरू हुए। लेकिन पत्रकारिता में वीडियो दिखाई देना और उसकी पूरी पृष्ठभूमि साबित होना दो अलग बातें हैं। सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, युवक कौन है, वह विमान में यात्री था या किसी अन्य भूमिका में था और वीडियो में कही गई बात किस संदर्भ में थी।
Smit Machar: क्या उस युवक का कॉकपिट में हुए हमले से कोई संबंध था?
इसलिए केवल एक धार्मिक नारे के आधार पर वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति को हमले का आरोपी या किसी आतंकी साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है। ‘अल्लाहु अकबर’ और आतंकवाद को एक ही चीज क्यों नहीं माना जा सकता? ‘अल्लाहु अकबर’ अरबी वाक्यांश है, जिसका अर्थ मोटे तौर पर ‘ईश्वर सबसे महान है’ होता है। यह इस्लामी धार्मिक संदर्भों में इस्तेमाल होने वाला वाक्य है। आतंकवादी संगठनों ने समय-समय पर धार्मिक नारों और प्रतीकों का इस्तेमाल अपने प्रचार या हिंसक गतिविधियों के दौरान किया है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उस नारे का हर इस्तेमाल आतंकवाद से जुड़ा है। इस मामले में भी सही सवाल यह नहीं है कि “नारा क्यों लगाया गया, इसलिए आतंकवादी कौन है?” अभी यही जांच का विषय है। UAE की आधिकारिक जांच भी इसी बात की पड़ताल कर रही है।
क्या आरोपी को-पायलट का कट्टरपंथ से संबंध था?
इस सवाल पर भी अभी कई दावे सामने आए हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उन्हें आरोपी के बारे में ऐसी जानकारी मिली है, जिससे कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा से प्रभावित होने का संकेत मिलता है। एक कथित पूर्व सहकर्मी ने भी उसके धार्मिक व्यवहार को लेकर दावे किए हैं। द इंडियन एक्सप्रेस ने भी लिखा है कि सहकर्मी के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी और जांच एजेंसियां अभी यह पता लगा रही हैं कि हमला आतंकी कृत्य था, पहले से नियोजित था या उसके पीछे कोई दूसरा मकसद था। यानी यहां भी आरोप, शुरुआती आकलन और जांच से साबित तथ्य- तीनों को अलग-अलग रखना होगा।
Smit Machar: क्या इसे हाईजैक कहना सही है?
घटना को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में ‘हाईजैक की कोशिश’ जैसे शब्द इस्तेमाल हुए। वहीं फ्लाईदुबई ने शुरुआती तौर पर इसे फ्लाइट डेक में हुई ‘altercation’ यानी झड़प बताया था। विमान ने आपातकालीन स्थिति में लैंडिंग की और बाद की जांच में आरोपी पर विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश का आरोप सामने आया।
स्मित मच्छार ने कैसे बचाई सैकड़ों जानें?
घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका है। रिपोर्टों के अनुसार हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की। इससे यात्रियों और अन्य लोगों को अंदर पहुंचने का रास्ता मिला। इसके बाद यात्रियों ने आरोपी को काबू किया और विमान में मौजूद अतिरिक्त पायलटों ने विमान को संभाला। इसलिए FZ1073 की कहानी सिर्फ एक पायलट की बहादुरी की कहानी नहीं है। इसमें घायल कैप्टन, केबिन क्रू, यात्रियों और दूसरे पायलटों की सामूहिक प्रतिक्रिया शामिल है। इसी प्रतिक्रिया ने एक संभावित बड़ी त्रासदी को टालने में भूमिका निभाई।
Smit Machar: स्मित मच्छार से चार दशक पहले नीरजा भनोट ने क्या किया था?
जब भी किसी विमान में संकट के दौरान यात्रियों को बचाने की बात होती है, नीरजा भनोट का नाम सामने आता है। 5 सितंबर 1986 को Pan Am Flight 73 कराची एयरपोर्ट पर चार हथियारबंद आतंकियों ने हाईजैक कर ली थी। नीरजा भनोट उस विमान में सीनियर फ्लाइट पर्सर थीं। उन्होंने कॉकपिट क्रू को खतरे के बारे में अलर्ट किया। पायलटों के विमान से निकल जाने के बाद हाईजैकर्स विमान को उड़ाने में सफल नहीं हो सके। इसके बाद यात्रियों की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी केबिन क्रू पर आ गई।
नीरजा ने अमेरिकी यात्रियों के पासपोर्ट क्यों छिपाए?
हाईजैकर्स यात्रियों के पासपोर्ट देखकर उनकी राष्ट्रीयता पहचानना चाहते थे। नीरजा और अन्य क्रू सदस्यों ने कई पासपोर्ट छिपा दिए, जिससे हाईजैकर्स के लिए अमेरिकी यात्रियों को अलग-अलग पहचानना मुश्किल हुआ। करीब 17 घंटे चले संकट के अंत में जब गोलीबारी शुरू हुई तो नीरजा ने इमरजेंसी एग्जिट खोलकर यात्रियों को बाहर निकलने में मदद की। बच्चों को बचाने की कोशिश में वह खुद गोलियों का शिकार हो गईं। Pan Am Historical Foundation के अनुसार नीरजा ने कई यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई और उन्हें 1987 में मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
Smit Machar: फिर सामने आया IC-814 और कैप्टन देवी शरण का नाम
24 दिसंबर 1999 को इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 काठमांडू से दिल्ली आ रही थी। भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद पांच हथियारबंद लोगों ने विमान को हाईजैक कर लिया। विमान को अमृतसर, लाहौर और दुबई होते हुए कंधार ले जाया गया। विमान में 190 लोग थे। इस संकट के दौरान एक यात्री की हत्या कर दी गई। विमान के कमांडर कैप्टन देवी शरण थे। उन्हें हथियारबंद हाईजैकर्स के निर्देशों के बीच विमान उड़ाना पड़ा और यात्रियों तथा क्रू की सुरक्षा बनाए रखनी पड़ी। यह संकट करीब सात दिनों तक चला और अंततः भारत सरकार ने तीन आतंकवादियों की रिहाई के बदले बंधकों को छुड़ाया।
देवी शरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या थी?
IC-814 में चुनौती सिर्फ विमान उड़ाने की नहीं थी। कॉकपिट में हथियारबंद लोग मौजूद थे। विमान कहां जाना है, इसका फैसला हाईजैकर्स कर रहे थे। दूसरी तरफ पायलटों को विमान की तकनीकी स्थिति, ईंधन, रास्ते और यात्रियों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना था। ऐसी परिस्थिति में पायलट का हर फैसला दोहरी चुनौती के बीच होता है- हाईजैकर्स को ऐसा कुछ न करने देना जिससे वे हिंसक हो जाएं और साथ ही विमान को तकनीकी रूप से सुरक्षित रखना। कैप्टन देवी शरण ने बाद में अपने अनुभव पर किताब भी लिखी, जिस पर IC-814 की कहानी आधारित रही है।
Smit Machar: 1984 का Flight 421: जब ईंधन खत्म होने की कगार पर था विमान
स्मित मच्छार की कहानी से पहले विमान संकट की एक और बड़ी घटना 24 अगस्त 1984 की Indian Airlines Flight 421 थी। दिल्ली से श्रीनगर जा रही इस फ्लाइट को सात हथियारबंद लोगों ने हाईजैक कर लिया था। विमान को अमृतसर, लाहौर, कराची होते हुए दुबई ले जाया गया। दुबई पहुंचने तक विमान का ईंधन बेहद कम हो चुका था। कैप्टन वी.के. मेहता के सामने विमान को सुरक्षित उतारने की चुनौती थी। आखिरकार दुबई में लैंडिंग की अनुमति मिली और बातचीत के बाद यात्रियों तथा क्रू को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
भारत सरकार के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में इस हाईजैक को पूर्व नियोजित कार्रवाई बताया गया था और उस समय के खुफिया दस्तावेजों में इसके पीछे धार्मिक-राजनीतिक शिकायतों का उल्लेख मिलता है। लेकिन इस घटना से एक महत्वपूर्ण पत्रकारिता सबक भी मिलता है- किसी व्यक्ति के अपराध और पूरे धार्मिक समुदाय को एक मान लेना अलग-अलग बातें हैं।

क्या Flight 421 भी धर्म और आतंकवाद के सवाल को सामने लाता है?
हां, लेकिन इतिहास को उसी संदर्भ में पढ़ना होगा। 1984 के Flight 421 के सरकारी रिकॉर्ड में उस समय के खुफिया आकलन के आधार पर हाईजैकर्स की पहचान और उनकी घोषित प्रेरणा दर्ज है। इसका मतलब यह है कि उस विशेष घटना में धार्मिक-राजनीतिक विचारधारा का संदर्भ जांच रिकॉर्ड का हिस्सा था। व्यक्ति का कथित कट्टरपंथी व्यवहार, किसी आतंकी संगठन से उसका संबंध और पूरा धर्म- तीनों अलग-अलग चीजें हैं।
नीरजा, देवी शरण, वी.के. मेहता और स्मित मच्छार में क्या समानता है?
चारों घटनाओं की परिस्थितियां अलग थीं। नीरजा भनोट के सामने हथियारबंद आतंकवादी थे। कैप्टन देवी शरण के सामने हाईजैकर्स और सात दिन का बंधक संकट था। कैप्टन वी.के. मेहता को हाईजैक विमान को बेहद कठिन परिस्थितियों में सुरक्षित उतारना था। और कैप्टन स्मित मच्छार के सामने संकट कॉकपिट के भीतर से आया। लेकिन चारों घटनाओं में एक चीज समान दिखाई देती है- अत्यधिक दबाव के बीच विमान को नियंत्रण में रखना और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना।
Smit Machar: FZ1073 इन पुरानी घटनाओं से कैसे अलग है?
FZ1073 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि शुरुआती जानकारी के अनुसार खतरा विमान के बाहर से नहीं, बल्कि कॉकपिट के अंदर से पैदा हुआ। यानी यह पारंपरिक हाईजैक से अलग तरह का ‘insider threat’ भी हो सकता है। यही कारण है कि अब जांच केवल हमले के मकसद तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी हैं कि आरोपी की भर्ती और सुरक्षा जांच कैसे हुई, वह इस उड़ान में कैसे शामिल हुआ, कॉकपिट सुरक्षा व्यवस्था ने कैसे काम किया और अचानक अंदर से हमला होने की स्थिति में विमान को सुरक्षित रखने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी। AP की रिपोर्ट के मुताबिक घटना ने विमानन सुरक्षा और खास तौर पर क्रू की स्क्रीनिंग को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं।
क्या यह आतंकवादी हमला था?
अभी इसका अंतिम जवाब नहीं है। इजरायली अधिकारियों ने इसे संभावित आतंकी हमले के रूप में देखा है और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने आरोपी के कथित कट्टरपंथीकरण को लेकर बयान दिया है। दूसरी तरफ UAE ने औपचारिक जांच शुरू करते हुए यह पता लगाने की बात कही है कि क्या घटना का संबंध आतंकवादी गतिविधि, उद्देश्य, पहले से की गई योजना या किसी के निर्देश से था। यानी आतंकवाद का एंगल जांच का विषय है।
Smit Machar: वायरल वीडियो का क्या?
वायरल वीडियो में लेजिस तरह से युवक नारे लगा रहा है उसे लगता है कि कोई बड़ी साजिश पहले से रची जा चुकी थी । लेकिन इस बारें मे किसको कुछ नही पता था। अखिर चलती प्लेन कोई व्यक्ति नारे क्यों लगाए। इसमें बड़ी साजिश को भारतीय पाईलेट ने नाकाम कर दिया। और जिससे प्लेन मौजूद सभी की जान बचा सकी है।
आसमान में संकट, सवाल कई… जवाब जांच के पास
FZ1073 ने विमानन सुरक्षा के सामने एक असामान्य चुनौती रखी है। एक तरफ घायल भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी है, दूसरी तरफ यात्रियों और अतिरिक्त पायलटों की त्वरित प्रतिक्रिया है। इसके समानांतर एक दूसरा सवाल भी खड़ा हुआ है- क्या यह व्यक्तिगत हिंसा थी, विमान को जानबूझकर गिराने की कोशिश थी, कट्टरपंथ से जुड़ी कार्रवाई थी या इसके पीछे कोई संगठित आतंकी साजिश थी?
Smit Machar: इन सवालों के जवाब तलाश रही है।
और वायरल वीडियो में ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे ने इस कहानी को धार्मिक रंग जरूर दे दिया है, लेकिन धर्म और आतंकवाद को एक मान लेना जांच का विकल्प नहीं हो सकता। अगर आरोपी का आतंकी संगठन से संबंध, कट्टरपंथी विचारधारा या पूर्व नियोजित साजिश साबित होती है, तो वह जांच के दस्तावेजों और आधिकारिक निष्कर्षों के आधार पर सामने आएगा।









