Supreme Court News: आधार कार्ड के इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, भारत निर्वाचन आयोग और यूआईडीएआई को नोटिस जारी किया है। अदालत ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है, जिसमें आधार के कथित दुरुपयोग पर सवाल उठाए गए हैं।
आधार केवल पहचान का प्रमाण, नागरिकता का नहीं
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दाखिल याचिका में कहा गया है कि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 स्पष्ट रूप से बताती है कि आधार न तो नागरिकता का प्रमाण है और न ही निवास का। यह केवल पहचान स्थापित करने का दस्तावेज है। याचिका में दावा किया गया है कि इसके बावजूद कई सरकारी प्रक्रियाओं में आधार को जन्मतिथि, पते और नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, जो कानून और यूआईडीएआई के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।
Supreme Court News: वोटर पंजीकरण प्रक्रिया पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से नए मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में आधार को जन्मतिथि और निवास प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जाने को चुनौती दी है। याचिका के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और आधार अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसा इस्तेमाल वैधानिक रूप से उचित नहीं माना जा सकता।
स्कूल दाखिले से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस तक का जिक्र
याचिका में कहा गया है कि आधार का उपयोग स्कूलों में प्रवेश, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, संपत्ति लेन-देन और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी प्रक्रियाओं में उम्र और पते के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह आधार की निर्धारित कानूनी सीमाओं से परे है और इससे दस्तावेज़ सत्यापन प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
Supreme Court News: घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों की आशंका
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कमजोर सत्यापन व्यवस्था के कारण कुछ अवैध प्रवासी या घुसपैठिए आधार कार्ड प्राप्त कर लेते हैं और बाद में उसी आधार पर अन्य सरकारी दस्तावेज हासिल कर लेते हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार इससे सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और कल्याणकारी लाभों का दुरुपयोग होने की आशंका बढ़ जाती है तथा वास्तविक पात्र लोगों को नुकसान पहुंचता है।
केंद्र और चुनाव आयोग से मांगे निर्देश
याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और चुनाव आयोग स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें ताकि आधार का उपयोग केवल पहचान के प्रमाण के रूप में ही हो। साथ ही अदालत से यह भी आग्रह किया गया है कि मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में आधार को जन्मतिथि और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की व्यवस्था को अवैध घोषित किया जाए।
Supreme Court News: 7 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। अदालत के अंतिम फैसले का असर मतदाता पंजीकरण, सरकारी योजनाओं और आधार के उपयोग से जुड़ी कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।
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