प्रदोष व्रत 1 मार्च का पंचांग: भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शुभ दिन, जानें पूजा का सही समय
रवि प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों से मुक्ति और जीवन में सुख समृद्धि मिलने की मान्यता है।
रवि प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों से मुक्ति और जीवन में सुख समृद्धि मिलने की मान्यता है।
23 फरवरी का पंचांग सोमवार के विशेष महत्व को दर्शाता है। इस दिन फाल्गुन शुक्ल षष्ठी तिथि, भरणी नक्षत्र, ब्रह्म योग, अमृत काल और रवि योग का संयोग है। जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और शिव पूजा का सही समय, ताकि दिनभर के कार्य सफल और मंगलमय हों।
महाशिवरात्रि वह पावन तिथि है जब भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य मिलन हुआ तथा शिवलिंग स्वरूप का प्राकट्य माना गया। इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा और अभिषेक से सुख-समृद्धि की प्राप्ति और ग्रह दोष शांति की मान्यता है।
जनवरी 2026 का अंतिम प्रदोष व्रत 30 जनवरी को है। इस दिन सुबह स्नान करके शिवलिंग पर गंगाजल, फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करें। पूजा के बाद प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें, भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। इससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
प्रदोष व्रत सनातन धर्म में महत्वपूर्ण व्रत है, जो जीवन की परेशानियों को दूर करता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि लाता है। माघ मास में यह व्रत 16 जनवरी 2026 को होगा, विशेष रूप से शुक्रवार के दिन इसे शुक्र प्रदोष कहते हैं।
30 दिसंबर को पड़ने वाली पौष पुत्रदा एकादशी पर शिवलिंग की विशेष पूजा का अत्यंत महत्व माना जाता है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान नारायण और बाबा महाकाल दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए शिवलिंग पर पांच विशेष वस्तुओं का अर्पण शुभ माना गया है, जिससे मनोकामनाओं की सिद्धि और जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है।