उत्तरांचल पीजी कॉलेज में तिलक और कलावा को लेकर विवाद, छात्रों ने लगाया धार्मिक भेदभाव का आरोप

Uttaranchal PG Controversy:

Uttaranchal PG Controversy: उत्तरांचल पीजी कॉलेज ऑफ बायोमेडिकल साइंस एंड हॉस्पिटल (UCBMSH) में तिलक और कलावा पहनकर आने को लेकर विवाद सामने आया है। छात्रों का आरोप है कि उन्हें तिलक लगाने और कलावा पहनने पर कॉलेज में रोका जा रहा है। इतना ही नहीं, ऐसा करने पर उनकी अनुपस्थिति (Absent) भी दर्ज की जा रही है।

Uttaranchal PG Controversy: छात्रों ने उठाए सवाल-

छात्रों का कहना है कि वे कॉलेज के निर्धारित ड्रेस कोड में ही आते हैं और सभी नियमों का पालन करते हैं। इसके बावजूद उन्हें केवल तिलक और कलावा धारण करने की वजह से रोका जा रहा है। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब वे अनुशासन और ड्रेस कोड का पालन कर रहे हैं तो धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों पर आपत्ति क्यों की जा रही है।

Uttaranchal PG Controversy: प्रिंसिपल पर लगाए गंभीर आरोप-

छात्रों का आरोप है कि कॉलेज के प्रिंसिपल अल्फोंसे मैथ्यू तिलक लगाने वाले छात्रों को कॉलेज आने से मना करते हैं। छात्रों का यह भी कहना है कि उनकी तस्वीरें खींचकर व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की जाती हैं और उन्हें यह कहते हुए टोका जाता है कि “यह बिंदी लगाकर कॉलेज मत आना।”

शिक्षकों का पक्ष-

विरोध के दौरान एक शिक्षिका ने कहा कि कॉलेज ने केवल “बड़ी बिंदी जैसे तिलक” पर आपत्ति जताई है क्योंकि यह ड्रेस कोड का हिस्सा नहीं है। हालांकि, छात्रों का दावा है कि उन्होंने केवल छोटा और सामान्य तिलक लगाया था, फिर भी उन्हें रोका गया।

बजरंग दल ने किया विरोध-

मामले की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे और प्रिंसिपल व शिक्षकों से इस विषय पर जवाब मांगा। कार्यकर्ताओं ने छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी छात्र को उसकी धार्मिक आस्था के प्रतीकों के कारण नहीं रोका जाना चाहिए।

छात्रों के समर्थन में लगाया तिलक-

विरोध के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने छात्रों को अपने हाथों से तिलक लगाकर उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार तिलक लगाकर कॉलेज आ सकते हैं और उन्हें ऐसा करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

कॉलेज की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार-

फिलहाल इस पूरे मामले में कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक लिखित बयान सामने नहीं आया है। आरोप और छात्रों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी

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