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फर्जी IAS तृप्ति सिंह पर चौथी FIR, होटल लीज के नाम पर 50 लाख की ठगी का आरोप

Tripti Singh:

Tripti Singh: खुद को IAS अधिकारी और मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) में एडिशनल डायरेक्टर बताने वाली तृप्ति सिंह राजपूत पर एक और FIR दर्ज हुई है। भोपाल के बागसेवनिया थाने में दर्ज इस मामले में उस पर पर्यटन विभाग का होटल लीज पर दिलाने के नाम पर 50 लाख रुपए ठगने का आरोप है। मामले में तृप्ति के भाई सुधांशु सिंह और साथी प्रखर को भी आरोपी बनाया गया है।

Tripti Singh: होटल लीज दिलाने का झांसा देकर 50 लाख लेने का आरोप-

सिवनी निवासी 31 वर्षीय गगन उपवंशी ने पुलिस को शिकायत दी थी कि तृप्ति, सुधांशु और प्रखर ने उसे MPSTDC का होटल लीज पर दिलाने का भरोसा दिया था। आरोप है कि विश्वास में लेकर तीनों ने उससे 50 लाख रुपए ले लिए। काफी समय बीतने के बाद भी जब होटल लीज पर नहीं मिला तो गगन को आरोपियों पर शक हुआ। उसने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई और पता चला कि तृप्ति IAS अधिकारी नहीं है। इसके बाद 28 अगस्त को उसने बागसेवनिया थाने में शिकायत दी। पुलिस ने करीब पांच दिन की जांच के बाद मंगलवार देर रात तृप्ति, सुधांशु और प्रखर के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में FIR दर्ज की।

Tripti Singh: अशोकनगर जेल में बंद है तृप्ति-

तृप्ति सिंह फिलहाल अशोकनगर जेल में बंद है। बागसेवनिया पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर भोपाल लाने के लिए रवाना हो गई है। रिमांड मिलने के बाद पुलिस उससे पूछताछ करेगी। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कथित ठगी के नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

पहले भी 39.17 लाख की ठगी का केस-

तृप्ति और उसके कथित गैंग के खिलाफ बागसेवनिया थाने में पहले से भी एक मामला दर्ज है। बालाघाट के खैरलांजी तहसील के चिचोली निवासी रोहित लिल्हारे ने आरोप लगाया था कि तृप्ति ने खुद को ट्रेनी IAS और MPSTDC की एडिशनल डायरेक्टर बताकर होटल-रिसॉर्ट लीज पर दिलाने और नौकरी लगवाने का झांसा दिया। आरोप के मुताबिक, होटल लीज के नाम पर 35.30 लाख और नौकरी दिलाने के लिए 3.87 लाख रुपए लिए गए। कुल रकम 39.17 लाख रुपए बताई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि न होटल मिला और न नौकरी। पैसे वापस मांगने पर तृप्ति ने सिर्फ एक लाख रुपए ऑनलाइन लौटाए।

चंदेरी के होटल से शुरू हुई ठगी की कहानी-

पुलिस के मुताबिक, 7 अप्रैल 2025 को तृप्ति सिंह राजपूत, उसका भाई सुधांशु सिंह और उनके साथी तनुज वैश्य व अंजली सिंह चंदेरी पहुंचे थे। चारों किला कोठी होटल में ठहरे थे। आरोप है कि यहीं तृप्ति ने खुद को MPSTDC की एडिशनल डायरेक्टर बताया। इसके बाद जयकुमार कोली, विजय कुमार दुबे, ऋतिक शर्मा और राघव सोनी को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया। इसके बदले प्रत्येक उम्मीदवार से तीन लाख रुपए मांगे गए। पुलिस के अनुसार, युवकों ने भरोसा करके कुल 9.80 लाख रुपए नकद दिए और जरूरी दस्तावेज भी सौंपे। दो लाख रुपए बाद में देने की बात हुई थी।

फर्जी दस्तावेज और महंगे सामान भी जांच के घेरे में-

पुलिस रिमांड के दौरान भोपाल में तृप्ति और सुधांशु के घर से मामले से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां बरामद होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, महंगे iPhone की खरीद की रसीदें, महंगे होटलों में ठहरने और हवाई यात्रा से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इन चीजों और दस्तावेजों का इस्तेमाल जानबूझकर सरकारी अधिकारी जैसी छवि बनाने के लिए किया जाता था।

‘भारत सरकार’ की नेम प्लेट वाली इनोवा भी बरामद-

जांच में एक इनोवा कार भी सामने आई है। पुलिस ने उस कार को बरामद किया है, जिस पर कथित तौर पर ‘भारत सरकार’ की नेम प्लेट लगी थी। आरोप है कि तृप्ति इस कार का इस्तेमाल अलग-अलग जगहों पर आने-जाने के लिए करती थी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नेम प्लेट किसने तैयार कराई और क्या इसका इस्तेमाल लोगों के सामने सरकारी अधिकारी होने का भ्रम पैदा करने के लिए किया गया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी को भी गिरफ्तार किया है।

भोपाल और अशोकनगर में कई मामले दर्ज-

तृप्ति सिंह के खिलाफ अब भोपाल और अशोकनगर में कुल चार मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस कथित ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया

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