UP News: उत्तर प्रदेश की बड़ी खबर के रूप में सामने आए एक गंभीर घटनाक्रम में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद संत समाज और उनके अनुयायियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
गौ रक्षा अभियान के चलते बढ़ी सक्रियता
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों से शंकराचार्य गौ माता–राष्ट्रमाता अभियान के तहत देशभर में सक्रिय हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देश में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग उठाना और गौ संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है। इसी क्रम में 3 मई से उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा में उनकी प्रस्तावित गविष्ठी यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हैं। इस यात्रा के जरिए वे लोगों को गौ संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रामा गौ धाम स्थापित करने का संदेश देने वाले हैं। माना जा रहा है कि यह यात्रा बड़े स्तर पर धार्मिक और सामाजिक समर्थन जुटाने का प्रयास है।
पूज्य शंकराचार्य जी को मिली जान से मारने की धमकी।
आडियो सुन लीजिएक्या यह लोग शंकराचार्य जी की हत्या करके उत्तर प्रदेश गविष्ठि (गोरक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा रोकना चाहते है?
कौन है यह लोग जिनको गौ हत्या बंद होने से इतनी प्रॉब्लम है? #shankaracharya pic.twitter.com/7m0dRE53N4— 1008.Guru (@jyotirmathah) April 9, 2026
जानकारी के अनुसार, ज्योतिर्मठ के आधिकारिक मोबाइल नंबर पर 1 अप्रैल 2026 को सुबह 10:25 से 10:35 बजे के बीच लगातार कई आपत्तिजनक टेक्स्ट मैसेज भेजे गए। इन संदेशों में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और शंकराचार्य को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। जब इस नंबर को ब्लॉक कर दिया गया, तो 6 अप्रैल को दोपहर 1:55 और 1:57 बजे वॉइस मेल के जरिए धमकी भरे ऑडियो संदेश भेजे गए। इन ऑडियो में न केवल अपशब्द कहे गए, बल्कि शंकराचार्य को जान से मारने की खुली धमकी दी गई। खास तौर पर उनकी प्रस्तावित यात्रा के दौरान हमले की बात कहे जाने से मामला और गंभीर हो गया है।
UP News: संत समाज में आक्रोश
शंकराचार्य के अनुयायियों और संत समाज का आरोप है कि गौ रक्षा जैसे संवेदनशील धार्मिक मुद्दे पर सक्रियता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। कई संतों का मानना है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत धमकी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकती है, जिसका उद्देश्य इस अभियान को कमजोर करना है। संत समाज ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि धार्मिक नेताओं की सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
वहीं इस पूरे मामले को लेकर शंकराचार्य के अधिवक्ताओं द्वारा संबंधित धाराओं में जल्द ही औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी। साथ ही, पुलिस और प्रशासन से मांग की गई है कि मामले की गहन जांच कर दोषियों की जल्द पहचान की जाए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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