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छतों पर सोलर ने बदली यू पी बिजली की तस्वीर, 8.76 लाख के पार, देश मे हासिल किया पहला स्थान

यूपी में रूफटॉप सोलर विस्तार, घरों की छतों पर सोलर पैनल और सौर ऊर्जा से बिजली बचत की AI तस्वीर
यूपी में रूफटॉप सोलर विस्तार, घरों की छतों पर सोलर पैनल और सौर ऊर्जा से बिजली बचत की AI तस्वीर
UP News: उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा का विस्तार अब बड़े सोलर पार्कों और सरकारी परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में 8.76 लाख से ज्यादा रूफटॉप सोलर प्लांट लग चुके हैं और यूपी ने संचयी स्थापना के मामले में गुजरात को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह आंकड़ा 5 अक्टूबर 2026 को जारी उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक जानकारी में सामने आया है। इस उपलब्धि के साथ राज्य की कुल रूफटॉप सोलर क्षमता 2,942 मेगावाट से ज्यादा पहुंच गई है। सरकार के मुताबिक इतनी क्षमता से प्रतिदिन 1.32 करोड़ यूनिट से ज्यादा स्वच्छ बिजली पैदा करने की क्षमता बन चुकी है। यानी सौर ऊर्जा अब यूपी की बिजली व्यवस्था में एक अलग और तेजी से बढ़ता हुआ हिस्सा बन रही है।
8.76 लाख रूफटॉप सोलर तक कैसे पहुंचा यूपी?
5 अक्टूबर की सरकारी जानकारी के अनुसार प्रदेश में 8,76,500 से ज्यादा रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं। इसके साथ ही यूपी ने संचयी इंस्टॉलेशन में गुजरात को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूफटॉप सोलर में बिजली उत्पादन के लिए अलग से बड़े भूखंड की जरूरत नहीं पड़ती। घरों और दूसरी इमारतों की छतों पर ही सोलर सिस्टम लगाया जाता है। इस मॉडल में बिजली उत्पादन को उपभोक्ता के नजदीक लाने की संभावना रहती है। यही वजह है कि रूफटॉप सोलर को केवल पर्यावरण से जुड़ी योजना के बजाय घरेलू बिजली खर्च और ऊर्जा व्यवस्था दोनों से जुड़ा बदलाव माना जा रहा है।
UP News: सितंबर में ही यूपी ने लगाए 74,796 नए सोलर प्लांट
यूपी की रफ्तार का अंदाजा सिर्फ संचयी आंकड़े से नहीं, बल्कि हाल की मासिक स्थापना से भी लगाया जा सकता है। सितंबर 2026 में प्रदेश में 74,796 रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए गए। इस मामले में यूपी महीने के दौरान देश में पहले स्थान पर रहा। आंध्र प्रदेश में 69,813 और महाराष्ट्र में 60,907 इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए, जबकि गुजरात में 45,616 रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए गए। 30 सितंबर तक यूपी का संचयी आंकड़ा 8,67,755 था और कुल स्थापित क्षमता 2,911.39 मेगावाट दर्ज की गई थी। इसके बाद 5 अक्टूबर की राज्य सरकार की जानकारी में संचयी इंस्टॉलेशन 8.76 लाख से अधिक बताया गया। यानी गुजरात को पीछे छोड़ने की यह स्थिति अचानक एक दिन में नहीं बनी। सितंबर में लगातार तेज इंस्टॉलेशन ने यूपी को संचयी दौड़ में आगे पहुंचाया।
पीएम सूर्य घर योजना के तहत 8.76 लाख रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के साथ यूपी ने गुजरात को पछाड़ा, देश में हासिल किया शीर्ष स्थान
पीएम सूर्य घर योजना के तहत 8.76 लाख रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के साथ यूपी ने गुजरात को पछाड़ा, देश में हासिल किया शीर्ष स्थान
लखनऊ सबसे आगे, वाराणसी भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत
रूफटॉप सोलर की इस दौड़ में यूपी के जिलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। 1 अक्टूबर तक उपलब्ध राष्ट्रीय पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार लखनऊ में 1,49,596 इंस्टॉलेशन दर्ज थे। वाराणसी में 58,235 और कानपुर नगर में 52,825 इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए थे। राज्य सरकार के 5 अक्टूबर के आंकड़ों के मुताबिक यूपी के 15 जिले देश के शीर्ष 100 जिलों में शामिल हैं। इनमें लखनऊ को देश में पहला और वाराणसी को 10वां स्थान मिलने की जानकारी दी गई है। इससे यह भी पता चलता है कि राज्य की सौर ऊर्जा नीति का असर केवल राजधानी या कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित नहीं है। अलग-अलग जिलों में घरेलू रूफटॉप सोलर को अपनाने की गति बढ़ी है।
UP News: 2,942 मेगावाट क्षमता का मतलब क्या है?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यूपी में अब 2,942 मेगावाट से अधिक रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित हो चुकी है। इस क्षमता से रोजाना 1.32 करोड़ यूनिट से ज्यादा स्वच्छ बिजली पैदा करने की क्षमता बताई गई है। अगर इस बिजली का बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल होता है तो इसका मतलब यह है कि हजारों-लाखों घर केवल बिजली के उपभोक्ता नहीं रहते, बल्कि वे बिजली उत्पादन की व्यापक व्यवस्था का हिस्सा भी बनते हैं। यही रूफटॉप मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता है। बड़े सोलर प्लांट में बिजली एक जगह बड़े पैमाने पर पैदा होती है, जबकि रूफटॉप मॉडल में छोटे-छोटे संयंत्रों को जोड़कर बड़ी क्षमता तैयार होती है।
बिजली के साथ घरों की अर्थव्यवस्था पर भी असर
रूफटॉप सोलर की चर्चा सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध घरेलू बिजली खर्च से भी है। उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार रूफटॉप सोलर से लाखों परिवारों के बिजली खर्च में कमी आ रही है। योजना के तहत केंद्र और राज्य की सब्सिडी से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर सिस्टम लगाना आसान हुआ है। सरकारी रिलीज में अब तक ₹7,700 करोड़ से अधिक की केंद्रीय और राज्य सब्सिडी सहायता के प्रभाव का उल्लेख किया गया है। इसका मतलब यह है कि सोलर अपनाने का शुरुआती खर्च कम करने के लिए सरकारी सहायता को भी इस विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
UP News: सिर्फ बिजली नहीं, रोजगार का भी नया बाजार
रूफटॉप सोलर के तेजी से विस्तार के साथ इसके आसपास एक नया रोजगार तंत्र भी विकसित हो रहा है। यूपी सरकार के अनुसार UPNEDA ने 8,000 से ज्यादा विक्रेताओं को सूचीबद्ध किया है, जिनके माध्यम से सौर ऊर्जा क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इनमें सोलर सिस्टम की बिक्री, डिजाइन, इंजीनियरिंग, स्थापना, विद्युत कार्य, कमीशनिंग और बिक्री के बाद की सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सामग्री आपूर्ति, सर्वेक्षण, मरम्मत और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बन रहे हैं। यानी सोलर की कहानी अब केवल “बिजली बचाने” की कहानी नहीं है। इसके साथ एक पूरा नया बाजार और रोजगार तंत्र भी तैयार हो रहा है।
11,700 एकड़ जमीन की बचत का दावा
रूफटॉप सोलर का एक बड़ा लाभ यह भी है कि बिजली उत्पादन के लिए बड़े भूखंड की जरूरत कम होती है। उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक मौजूदा रूफटॉप सोलर क्षमता के आधार पर करीब 11,700 एकड़ जमीन के बराबर भूमि आवश्यकता से बचत का अनुमान है। सरकारी आंकड़ों में यह गणना 4 एकड़ प्रति मेगावाट के मानक पर आधारित है। यानी अगर इतनी ही क्षमता बड़े भू-क्षेत्र में स्थापित की जाती, तो जमीन की जरूरत काफी ज्यादा होती। घरों और इमारतों की छतों का इस्तेमाल इस दबाव को कम करता है।
UP News: पर्यावरण के मोर्चे पर भी बड़ा असर
सरकार के अनुमान के अनुसार मौजूदा रूफटॉप सोलर क्षमता से सालाना 34 लाख टन से ज्यादा CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान है। सरकार ने इसे 15 करोड़ से अधिक पेड़ों द्वारा एक वर्ष में अवशोषित किए जाने वाले कार्बन के बराबर बताया है। यह पेड़-समतुल्य तुलना एक अनुमानित पर्यावरणीय तुलना है। इसका अर्थ यह है कि सौर ऊर्जा के विस्तार का प्रभाव केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
यूपी में सोलर को मिशन मोड में क्यों आगे बढ़ाया गया?
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार योजना की गति बढ़ाने के पीछे जिला स्तर पर नियमित समीक्षा, बैंकिंग फॉलोअप, मीटरिंग की निगरानी और लंबित मामलों के तेजी से निस्तारण पर जोर दिया गया। UPNEDA, बिजली विभाग, डिस्कॉम, बैंकिंग संस्थानों और अधिकृत विक्रेताओं के बीच समन्वय को भी इस अभियान का हिस्सा बताया गया है। यानी केवल योजना घोषित करने के बजाय उसके क्रियान्वयन में आने वाली अलग-अलग कड़ियों जैसे आवेदन, बैंकिंग, मीटरिंग, विक्रेता और स्थापना इन सब को साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि सितंबर में अकेले 74,796 इंस्टॉलेशन तक पहुंचना इस अभियान की गति को दिखाता है।
UP News: 2017 के बाद ऊर्जा की कहानी में एक नया अध्याय
उत्तर प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था में पिछले वर्षों में केवल बिजली उत्पादन और वितरण की क्षमता बढ़ाने पर ही जोर नहीं रहा। सौर ऊर्जा को भी ऊर्जा मिश्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम बढ़ा है। रूफटॉप सोलर की मौजूदा उपलब्धि में केंद्र की प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की भूमिका है, जबकि राज्य स्तर पर UPNEDA, बिजली विभाग, डिस्कॉम और अन्य संस्थाओं के जरिए इसके क्रियान्वयन को गति दी जा रही है। इसलिए 8.76 लाख का आंकड़ा केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों के प्रयासों से जुड़ी योजना के क्रियान्वयन की तस्वीर है।
छत से शुरू हुआ बदलाव अब ऊर्जा अर्थव्यवस्था तक पहुंच रहा है
उत्तर प्रदेश का 8.76 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन तक पहुंचना केवल एक राष्ट्रीय रैंकिंग की उपलब्धि नहीं है। इसके साथ 2,942 मेगावाट से अधिक स्थापित क्षमता, रोजाना 1.32 करोड़ यूनिट से ज्यादा स्वच्छ बिजली की संभावित क्षमता, हजारों विक्रेताओं का नेटवर्क और एक लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर जुड़े हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सौर ऊर्जा अब किसी दूर के बड़े बिजली संयंत्र की कहानी नहीं रह गई है। घर की छत, स्थानीय रोजगार, बिजली खर्च और राज्य की ऊर्जा व्यवस्था, इन चारों को जोड़कर यूपी में सौर ऊर्जा का एक नया मॉडल आकार ले रहा है। सितंबर की तेज स्थापना और अक्टूबर की शुरुआत में देश में नंबर-1 की स्थिति बताती है कि रूफटॉप सोलर अब प्रदेश की ऊर्जा नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

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