UP POLITICS: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर गैर-यादव पिछड़े वर्ग के नेताओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के प्रखर नेता और अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर श्रद्धांजलि तक न देना इस बात का प्रमाण है कि समाजवादी पार्टी अब “यादववादी पार्टी” बन चुकी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में राजभर ने लिखा कि अखिलेश यादव ने 2 जुलाई को डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर श्रद्धांजलि का एक शब्द भी नहीं लिखा। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि सपा में गैर-यादव ओबीसी और दलित नेताओं के प्रति सम्मान नहीं, बल्कि उपेक्षा का भाव है।
‘नायक होने की पहली शर्त यादव होना’
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा में किसी नेता को सम्मान मिलने की पहली शर्त यादव होना है। उन्होंने कहा कि कुर्मी समाज के शीर्ष नेता रहे डॉ. सोनेलाल पटेल जैसे व्यक्तित्व की अनदेखी राजनीतिक मर्यादा के विपरीत है। उन्होंने लिखा कि डॉ. सोनेलाल पटेल की बेटी ने एक दिन पहले अखिलेश यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उनके पिता को श्रद्धांजलि देना भी जरूरी नहीं समझा।
UP POLITICS: ‘पिता की परंपरा भी नहीं निभा सके’
सुभासपा प्रमुख ने कहा कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव डॉ. सोनेलाल पटेल का सम्मान करते थे, लेकिन अखिलेश यादव अपने पिता की उस परंपरा को भी आगे नहीं बढ़ा सके। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि डॉ. सोनेलाल पटेल की पत्नी और उनकी एक बेटी समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ी हैं, फिर भी उनके प्रति सम्मान नहीं दिखाया गया।
बेनी प्रसाद वर्मा का भी किया जिक्र
राजभर ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि “यादववाद” की राजनीति के कारण उन्हें भी समाजवादी पार्टी छोड़नी पड़ी थी। उन्होंने दावा किया कि सपा में गैर-यादव ओबीसी नेताओं के साथ हमेशा भेदभाव हुआ है।
UP POLITICS: कुर्मी समाज से की अपील
ओमप्रकाश राजभर ने कुर्मी समाज से अपील करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की वास्तविकता को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई वह पहले भी लड़ते रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे। अपने संदेश के अंत में उन्होंने लिखा, “हमारा स्वाभिमान बचा रहे, यही सबसे बड़ी उपलब्धि है। बहुजनों की लड़ाई ओमप्रकाश राजभर हमेशा लड़ता आया है और आगे भी लड़ता रहेगा।”
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