Home » Breaking News » यूपी चुनाव से पहले आरक्षण पर सियासत तेज, छात्रों से मिले ब्रजेश पाठक; अखिलेश-मायावती ने BJP को घेरा

यूपी चुनाव से पहले आरक्षण पर सियासत तेज, छात्रों से मिले ब्रजेश पाठक; अखिलेश-मायावती ने BJP को घेरा

UP Reservation Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आता दिख रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद यूपी में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रदर्शन से जुड़े छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने और बातचीत कराने का भरोसा दिया है। वहीं समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने आरक्षण में बदलाव की मांग को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।

ब्रजेश पाठक ने छात्रों को दिया बातचीत का भरोसा

ब्रजेश पाठक ने लखनऊ के हजरतगंज में आरक्षण सुधार आंदोलन से जुड़े हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और शिवा शर्मा से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांगों को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिया कि प्रदर्शनकारी छात्रों की केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक कराने का प्रयास किया जाएगा। इस मुलाकात को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील होता जा रहा है।

UP Reservation Politics: अखिलेश यादव बोले- ‘आरक्षण था, आरक्षण है, आरक्षण रहेगा’

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरक्षण सुधार की मांग पर भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि ‘आरक्षण सुधार’ के नाम पर ‘आरक्षण समाप्ति’ का षड्यंत्र पीडीए समाज के खिलाफ एक और साजिश है। अखिलेश ने कहा कि आरक्षण पीडीए का अधिकार है, किसी की इच्छा का विषय नहीं। उन्होंने भाजपा और उसके सहयोगियों पर ‘समीक्षा’, ‘सुधार’ और ‘क्रीमीलेयर’ जैसे शब्दों के जरिए आरक्षण के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा- ‘आरक्षण था, आरक्षण है, आरक्षण रहेगा।’

मायावती ने भी सरकार को घेरा

बसपा प्रमुख मायावती ने भी आरक्षण के मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संविधान में एससी, एसटी और ओबीसी समाज को दिए गए आरक्षण के खिलाफ आर्थिक आधार पर नई व्यवस्था की मांग उचित नहीं है। मायावती ने सरकारों से अपील की कि वे आरक्षण विरोधी तत्वों को संरक्षण न दें। उन्होंने कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति नहीं होनी चाहिए।

आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग पर मायावती का सवाल

मायावती ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सरकार पहले से कई योजनाएं चला रही है। उनके मुताबिक, अगर इन योजनाओं का लाभ गरीबों तक नहीं पहुंच रहा है तो इसकी जिम्मेदारी सरकारी व्यवस्था की है। उन्होंने आर्थिक आधार पर लागू आरक्षण व्यवस्था का भी जिक्र किया और दावा किया कि इसका लाभ गरीब सवर्ण परिवारों तक अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच रहा है।

UP Reservation Politics: राहुल गांधी पर भी मायावती का हमला

मायावती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जिस दिन राहुल गांधी संसद थाने के बाहर एक मामले को लेकर धरने पर बैठे थे, उसी दौरान जंतर-मंतर पर आरक्षण से जुड़ा प्रदर्शन भी चल रहा था। मायावती ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी या कांग्रेस का कोई नेता प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने क्यों नहीं गया। उन्होंने इसे कांग्रेस की आरक्षण को लेकर कथित मानसिकता से जोड़कर निशाना साधा।

2027 से पहले क्यों अहम है आरक्षण का मुद्दा?

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में आरक्षण को लेकर शुरू हुई बहस का सीधा राजनीतिक असर पड़ सकता है। खासकर एससी, एसटी, ओबीसी और पीडीए राजनीति के लिहाज से यह मुद्दा सपा और बसपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

दूसरी ओर भाजपा के सामने चुनौती यह है कि आरक्षण में बदलाव की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों की बात भी सुनी जाए और उन सामाजिक वर्गों को भी स्पष्ट संदेश दिया जाए, जो आरक्षण को अपना संवैधानिक अधिकार मानते हैं। फिलहाल ब्रजेश पाठक की छात्रों से मुलाकात के बाद बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन अखिलेश यादव और मायावती के तीखे बयानों ने साफ कर दिया है कि यूपी चुनाव 2027 से पहले आरक्षण एक बड़ा सियासी मुद्दा बन सकता है।

ये भी पढ़े… लखनऊ हत्याकांड: मानस तक कैसे पहुंचा हथियार? 3 असलहों की गुत्थी में उलझी पुलिस, कॉल डिटेल से खुलेगा राज?