Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के बरेली से ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने अफगानिस्तान में तालिबान के उस कथित आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें पति को पत्नी और बच्चों पर हाथ उठाने की सीमित अनुमति देने की बात कही जा रही है। मौलाना ने साफ कहा कि किसी भी तरह की मारपीट इंसानियत, रिश्तेदारी और इस्लामी मूल्यों के खिलाफ है।
हिंसा नहीं, समझाने से सुलझते हैं रिश्ते
मौलाना रजवी ने कहा कि इस्लाम परिवार में प्रेम, सम्मान और आपसी समझदारी की शिक्षा देता है। उनका कहना है कि पति-पत्नी या परिवार के अन्य सदस्यों के बीच विवाद को मारपीट से नहीं, बल्कि बातचीत और समझाने से सुलझाया जाना चाहिए।उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे फरमान रिश्तों में दरार डाल सकते हैं और समाज में गलत संदेश देते हैं, इसलिए इन्हें जारी करने से बचना चाहिए।
Uttar Pradesh: तालिबान के रुख पर जताई चिंता
मौलाना ने अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि तालिबान की सरकार बनने के बाद वहां विकास और स्थिरता की बात भी की जा रही है, लेकिन समय-समय पर कुछ सख्त फैसले सामने आते रहते हैं, जो चिंता बढ़ाते हैं।उनका कहना है कि यदि कोई सरकार समाज को बेहतर दिशा में ले जाना चाहती है, तो उसे ऐसे कदम उठाने चाहिए जो परिवार और समाज में सौहार्द को मजबूत करें, न कि तनाव बढ़ाएं।
Uttar Pradesh: इस्लाम मोहब्बत की बात करता है
मौलाना रजवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस्लाम का मूल संदेश प्रेम, करुणा और अच्छे रिश्तों को बनाए रखने का है। परिवार के भीतर हिंसा किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराई जा सकती। उन्होंने अपील की कि दुनिया के किसी भी हिस्से में ऐसे आदेश जारी न हों, जो इंसानियत और पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ हों।
विवाद के बीच बहस तेज
तालिबान के नए प्रावधानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा और आलोचना हो रही है। भारत में धार्मिक और सामाजिक संगठनों के कई प्रतिनिधियों ने परिवार में हिंसा को गलत बताते हुए संवाद और आपसी सम्मान पर जोर दिया है। मौलाना रजवी का बयान भी इसी कड़ी में सामने आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा को उचित नहीं ठहराया जा सकता।परिवार समाज की सबसे अहम इकाई माना जाता है और इसे मजबूत बनाने के लिए प्रेम, सम्मान और समझ जरूरी है। मौलाना रजवी के बयान ने इस मुद्दे पर नई बहस को जन्म दिया है, जिसमें यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी भी परिस्थिति में घरेलू हिंसा को जायज़ ठहराया जा सकता है। उनका संदेश साफ है रिश्तों में मोहब्बत और संवाद ही सबसे बड़ा समाधान है।
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