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Election 2026: असम, केरल और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान, लोकतंत्र की नई मिसाल

Election 2026:
Kamrup: Voters queue up to cast their votes during the Assam Assembly election at a polling station, in Kamrup on Thursday, April 09, 2026. (Photo: IANS/Biplab Banerjee)

Election 2026: वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों में असम, केरल और पुडुचेरी ने मतदान प्रतिशत के मामले में नया इतिहास रच दिया है। तीनों राज्यों में हुए रिकॉर्ड मतदान ने न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी लोकतंत्र की मजबूती का संदेश दिया है। चुनाव आयोग के अनुसार, यह रुझान दर्शाता है कि मतदाताओं का चुनाव प्रक्रिया पर विश्वास लगातार बढ़ रहा है और वे बड़ी संख्या में भागीदारी कर रहे हैं।

रिकॉर्ड मतदान से बढ़ा भरोसा

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, असम में 85.38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो वर्ष 2016 के 84.67 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है। पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2011 के 86.19 प्रतिशत के पुराने आंकड़े से कहीं ज्यादा है। केरल में भी 78.03 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य की मजबूत राजनीतिक भागीदारी को दर्शाता है। पिछले 50 वर्षों में यह सबसे अधिक मतदान प्रतिशत माना जा रहा है।

Election 2026: महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

इन चुनावों में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कई स्थानों पर महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया। असम में महिला मतदान 85.96 प्रतिशत, केरल में 80.86 प्रतिशत और पुडुचेरी में 91.33 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं, थर्ड जेंडर मतदाताओं की भागीदारी भी बढ़ी है, जो समावेशी लोकतंत्र की दिशा में सकारात्मक संकेत है।

पारदर्शिता और तकनीकी सुधार

चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इस बार सभी मतदान केंद्रों पर लाइव वेब प्रसारण की व्यवस्था की गई। कुल 63,084 मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हुआ। मतदान से पहले मॉक पोल की प्रक्रिया भी पूरी की गई थी। इसके अलावा दिव्यांग मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर, स्वयंसेवक और परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे उनकी भागीदारी सुनिश्चित हुई।

Election 2026: वैश्विक स्तर पर बढ़ी विश्वसनीयता

इन चुनावों में 22 देशों के 38 प्रतिनिधि अंतर्राष्ट्रीय निर्वाचन आगंतुक कार्यक्रम के तहत मौजूद रहे, जिससे भारतीय चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता और मजबूत हुई। कुल 296 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान में 5.31 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने भाग लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकॉर्ड मतदान न केवल लोकतांत्रिक उत्साह का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत का लोकतंत्र अब पहले से अधिक मजबूत, समावेशी और भरोसेमंद बन चुका है।