Vrindavan Boat Accident: वृन्दावन में यमुना नदी पर बड़ा हादसा सामने आया है। केशी घाट के पास पर्यटकों से भरी एक निजी नाव पलट गई, जिसमें अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 7 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, हादसे का शिकार हुए सभी लोग पंजाब के अलग-अलग शहरों से वृंदावन दर्शन के लिए आए थे।
हादसे की पूरी कहानी
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह के अनुसार, यह हादसा दोपहर करीब 3 बजे हुआ। पर्यटक दो नावों में सवार थे, जिनमें से एक नाव अचानक असंतुलित होकर पलट गई। इस नाव में करीब 25 से 27 लोग सवार थे, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता लगभग 15 यात्रियों की बताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उस समय यमुना में तेज हवा चल रही थी। नदी के बीच पहुंचते ही नाव तेज लहरों और हवा के कारण डगमगाने लगी। इसी दौरान नाव की गति भी बढ़ गई और वह पास बने पांटून पुल से टकरा गई, जिसके बाद संतुलन बिगड़ने से नाव पलट गई।
Vrindavan Boat Accident: रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
डीआईजी शैलेश पांडेय ने बताया कि अब तक 12 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। हालांकि 3 से 5 लोगों के अभी भी लापता होने की आशंका है।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस, गोताखोर और चिकित्सा टीमें मौके पर पहुंच गईं। नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फाॅर्स की टीम गाजियाबाद से मौके पर पहुंची है, जबकि सेना को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया है। यमुना में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और लापता लोगों की तलाश जारी है।
Vrindavan Boat Accident: लापरवाही के संकेत
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि नाव में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया गया था। सुरक्षा के बुनियादी नियमों की भी अनदेखी की गई न तो यात्रियों ने और न ही नाविक ने लाइफ जैकेट का इस्तेमाल किया था।
हादसे के बाद नाविक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इसे प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताया है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया
हादसे में बचे एक पर्यटक ने बताया कि तेज हवा के चलते नाव अचानक असंतुलित हो गई थी। नाव की गति बढ़ने से स्थिति और बिगड़ गई और देखते ही देखते नाव पलट गई। पर्यटकों के मुताबिक, हादसा इतना अचानक हुआ कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। स्थानीय प्रशासन ने भी घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यमुना घाटों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ओवरलोडिंग, लाइफ जैकेट की कमी और नावों की नियमित जांच न होना अक्सर बड़े हादसों की वजह बनता है। इस घटना ने एक बार फिर नदी परिवहन और धार्मिक पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की जरूरत को उजागर कर दिया है।
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