Vrindavan News: अगर आपसे पूछा जाए कि एक कथा वाचक कैसा होना चाहिए, तो शायद आपके दिमाग में एक ‘शांत, सौम्य और राधे-राधे’ जपने वाला चेहरा आएगा। लेकिन इन दिनों वृंदावन के चर्चित भागवत कथावाचक मृदुल कांत शास्त्री को लेकर जो कहानी सामने आ रही है, वो इस छवि से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। जिस घटना को लेकर उन्होंने खुद को पीड़ित बताया था गाड़ी पर हमला, बदतमीजी और मारपीट अब उसी मामले में दिल्ली से आई महिला ने सामने आकर ऐसा दावा किया है, जिसने पूरी कहानी को ही पलट दिया है। जिसके बाद अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर सच कौन बोल रहा है? कथावाचक या फिर वो परिवार जिसे आरोपी बनाया गया? तो चलिए आपको बताते है इस मामले का हर एक पहलू…
हमें ही बना दिया आरोपी- परिवार का दावा
दरअसल, वृंदावन में कथावाचक मृदुल कांत शास्त्री और दिल्ली से आए एक परिवार के बीच हुआ विवाद अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जहां एक ओर शास्त्री ने खुद पर हमले और लूट का आरोप लगाया, वहीं दूसरी ओर आरोपित परिवार ने सामने आकर पूरे घटनाक्रम को अलग ही रूप दे दिया है। दिल्ली से आए परिवार की महिलाओं का आरोप है कि मामूली सड़क विवाद के बाद उनके साथ न केवल अभद्रता की गई, बल्कि उन्हें और उनके छोटे बच्चों को पूरी रात थाने में रखा गया। महिलाओं ने यह भी दावा किया कि थाने में उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और उन्हें धमकियां तक दी गईं।
परिवार का कहना है कि जिस मामले में वे खुद पीड़ित थे, उसी में उन्हें आरोपी बना दिया गया। वहीं इस मामले ने तब नया मोड़ लिया जब बाल कल्याण समिति (CWC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस को नोटिस जारी कर दिया। समिति अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने साफ कहा कि छोटे बच्चों को रातभर थाने में रखना गंभीर कानूनी उल्लंघन है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि महिलाओं को नियमानुसार वन स्टॉप सेंटर भेजने के बजाय हवालात में क्यों रखा गया।
Vrindavan News: पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल?
पुलिस ने शुरुआत में इस मामले में जानलेवा हमले जैसी गंभीर धाराएं लगाईं, लेकिन कोर्ट ने इन्हें खारिज करते हुए मामले को साधारण मारपीट और एक्सीडेंट मान लिया। इसके बाद सभी आरोपितों को जमानत मिल गई। इस घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या धाराएं जल्दबाजी में लगाई गईं? क्या एक पक्ष की शिकायत पर बिना पर्याप्त जांच के कार्रवाई की गई?
CCTV फुटेज से खुलेगा सच?
बाल कल्याण समिति ने उस रात की कोतवाली की सीसीटीवी फुटेज मांगी है। माना जा रहा है कि इससे यह साफ हो सकेगा कि थाने में महिलाओं और बच्चों के साथ कैसा व्यवहार किया गया। लेकिन अब इस पूरे मामले में दो अलग-अलग कहानियां सामने निकलकर आ रही है पहले ये कि जिसमें कथावाचक खुद को हमले और लूट का शिकार बता रहे हैं दूसरी ये, जिसमें परिवार खुद को पीड़ित और फंसाया गया बता रहा है। जबकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने भी मामले को और उलझा दिया है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं।
इस मामले पर खबर इंडिया की ये विशेष रिपोर्ट भी देखें…







