Women Reservation Bill: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है और इसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उनका यह बयान संसद के विस्तारित बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले आया है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
जनगणना और परिसीमन पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण बिल के लिए 2011 की जनगणना का आधार बना रही है, जबकि देश में जाति आधारित जनगणना की मांग लंबे समय से उठ रही है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन का महिला आरक्षण से सीधा संबंध नहीं है, बल्कि यह परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों में बदलाव के जरिए सत्ता को प्रभावित करने का प्रयास है। उनके अनुसार यह प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायसंगत नहीं है।
Women Reservation Bill: महिला आरक्षण के समर्थन का दावा
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है और वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देना जरूरी है, लेकिन इसे सही तरीके और निष्पक्ष आधार पर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़े वर्गों, दलितों और आदिवासी समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर आरोप
अपने बयान में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार नहीं चाहती कि महिला आरक्षण का फैसला नई जनगणना या जाति आधारित आंकड़ों पर आधारित हो। उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 की जनगणना का उपयोग कर पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनकी भागीदारी प्रभावित होगी। राहुल गांधी ने इसे जनता के साथ धोखा बताते हुए कहा कि सरकार को पारदर्शी तरीके से निर्णय लेना चाहिए। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में संसद में तीखी बहस होने की संभावना है, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं।
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