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19 वर्षीय निसारगा अधिकारी को कानपुर आईआईटी ने नौकरी पर लिया!

कानपुर आईआईटी ने नौकरी पर लिया

हाल ही में सीबीएसई के ऑन स्क्रीन मार्किंग पोर्टल में सुरक्षा खामियों का पर्दाफाश करने में दुनिया में साफ्ट इजींनियरिग के एक स्वशिक्षित छात्र निसारगा अधिकारी ने अनोखा काम कर दिया। इसी की वजह से आईआईटी कानपुर ने इस बालक को नौकरी पर रखा है। यह अपनेआप में उल्लेखनीय कार्य है। जिस बालक को किसी टैक्निकल स्कूल से शिक्षा न मिली हो, उसकी बुद्धि ऐसा कमाल कर दिखाये, तो वह तारीफ के काबिल है। निसारगा अधिकारी को आईआईटी संस्थान ने साइबर सुरक्षा और साइबर विशेषज्ञ कंपनी और थे्रट इंटेलिजेंस इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया है।

आईआईटी कानपुर में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक के पैकेज को पाने के लिए हर वर्ष मानदंड बदलते रहते हैं। आज निसारगा अधिकारी अपने बुद्धि चातुर्य से इस स्थान पर पहुंच गया है। ऐसे व्यक्ति जन्म से बौद्धिक संपन्नता प्राप्त करने वाले विरले ही व्यक्ति होते हैं। उन विरलों में निसारगा अधिकारी को पहचानने में आईआईटी कानपुर ने कोई गलती नहीं की है। आईआईटी कानपुर ने न निसारगा की उम्र देखी और न ही शिक्षा; सीधे ही उसके वर्तमान कार्य की उपलब्धि पर सम्मान दिया है। हो सकता है आने वाले समय में कानपुर आईआईटी के लिए वह एक ऐसेट होगा, लेकिन समाज भी उसके कार्यों से साइबर में नई तकनीकी से रूब-रूब होगा।

सीवी अब नौकरी पाने के लिए खास नहीं होगी!

पहले नौकरी पाने के लिए सीवी बहुत आवश्यक थी, लेकिन कुछ समय से दुनिया में ऐसे उदाहरण मिल रहे हैं, जहां सीवी या रिज्यूम नहीं उसका काम ही पद प्राप्त करने के लिए मुख्य होगा। ऐसे उदाहरण बहुत सारे हैं, जिन्होंने स्कूली से लेकर विश्वविद्यालयों की शिक्षा न पाकर भी दुनिया में ऐसे काम कर दिखाये हैं, जो किसी शिक्षा के मोहताज नहीं रहे। आज लंदन आधारित कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, पर वे रिज्यूम को खास महत्व देने की प्रक्रिया को अपनाने के लिए राजी नहीं हैं। पहले सीवी को साक्षात्कार में सम्मिलित करने के लिए आवश्यक माना जाता था। अब यह कंपनियों ने बदल दिया है। रिज्यूम आज उनके लिए सेलिंग प्वाइंट नहीं रहा। अब व्यक्ति के गहन अध्ययन और अनुभव और मूल्य को विशेष तरजीह दी जा रही है। यह विचार सीईओ, माकल पेज के निकोलस क्रिक के हैं। इसका वह एक उदाहरण देते हैं कि हमने तीन सौ लोगों का साक्षात्कार सिर्फ तीन पदों के लिए किया, पर निर्णय लेने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

आविष्कारों का जन्म ऐसी घटनाओं से ही हुआ!

गुरुत्वाकर्षण की खोज न्यूटन ने सेब के पेड़ के नीचे बैठकर की, उसका कहना था कि सेब नीचे ही क्यों गिरा, इसी तर्क ने पृथ्वी के अपनी ओर खींचने के आकर्षण को गुरुत्वाकर्षण नाम दिया। आज यदि अंतरिक्ष में पृथ्वी से बाहर निकलना होता है, तो उसके लिए ऐसे फोर्स का उपयोग किया जाता है, जो पृथ्वी के आकर्षण से बाहर निकल सके। तभी उपग्रह पृथ्वी के कक्षा में भेजे जाते हैं। महान वैज्ञानिक आइंस्टीन का आईक्यू बहुत ज्यादा था, उसी के बल पर वह सापेक्षवाद के सिद्धांत को दे सके। प्रकाश की गति को नापने में वह सक्षम हुए। जिन लोगो ने भी खोजें की वह उनके अनोखे कार्य थे। मार्कोनी ने टेलीफोन का आविष्कार किया। राइटब्रदर्स आज के वैमानिक सेवाओं के लिए जाने जाते हैं। विलक्षण बुद्धि ही ऐसे कार्य करती है, जो पूरे समाज के लिए उपयोगी होती है।

लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल

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