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सिंहस्थ 2028 में रोज 13 हजार टन सब्जी कहां से आएगी? 15 जिलों के 20 हजार किसान तैयार करेंगे सप्लाई चेन

Simhastha 2028 Explainer: उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के दौरान 40 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। करीब 60 दिन तक चलने वाले इस आयोजन में भोजन से लेकर पूजा-पाठ तक की व्यवस्थाएं बड़ी चुनौती होंगी। इसी को देखते हुए मध्य प्रदेश का उद्यानिकी विभाग अभी से सब्जियों और फूलों का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। योजना के तहत 15 जिलों में 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में उत्पादन क्लस्टर विकसित करने और करीब 20 हजार किसानों को जोड़ने का प्रस्ताव है। लेकिन रोजाना हजारों टन सब्जियां कहां से आएंगी, किसानों को कैसे तैयार किया जाएगा और खेतों से मेला क्षेत्र तक इनकी सप्लाई कैसे होगी? आइए, सवाल-जवाब में समझते हैं पूरा प्लान।

 सिंहस्थ में रोज कितनी सब्जियों की जरूरत पड़ सकती है?

सिंहस्थ 2028 में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। आयोजन लगभग 60 दिन तक चलेगा। इस हिसाब से प्रतिदिन औसतन करीब 66.67 लाख श्रद्धालुओं की आवाजाही का अनुमान लगाया गया है। प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2 किलो सब्जी की जरूरत को आधार मानते हुए लगभग 13,333 टन सब्जी प्रतिदिन की संभावित मांग का आकलन किया गया है। इसी हिसाब से 60 दिनों में कुल मांग करीब 8 लाख टन तक पहुंच सकती है।

Simhastha 2028 Explainer: मांग पूरी करने के लिए क्या योजना बनाई गई है?

इतनी बड़ी संभावित जरूरत को देखते हुए उद्यानिकी विभाग ने दो साल का रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत लगभग 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने की योजना है।

प्रस्तावित योजना में शामिल हैं: 8 हजार हेक्टेयर में सब्जियों की खेती। 8 हजार हेक्टेयर में फूलों की खेती। करीब 20 हजार किसानों को योजना से जोड़ना। अलग-अलग जिलों में उत्पादन क्लस्टर विकसित करना। फसल के उत्पादन से लेकर संग्रहण, पैकिंग और परिवहन तक की व्यवस्था बनाना। इसका उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान अचानक बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए पहले से उत्पादन और आपूर्ति की तैयारी करना है। हालांकि, यह योजना कितनी सफल होगी, यह उत्पादन लक्ष्य हासिल होने और सप्लाई चेन समय पर तैयार होने पर निर्भर करेगा।

उत्पादन क्लस्टर क्या हैं और इनसे किसानों को कैसे जोड़ा जाएगा?

क्लस्टर का मतलब है कि एक क्षेत्र के कई किसान योजनाबद्ध तरीके से फसलों का उत्पादन करेंगे। इसमें यह तय करने की कोशिश होगी कि किस क्षेत्र में कौन-सी सब्जी कितने रकबे में उगाई जाए, ताकि आयोजन के समय मांग के अनुसार उपज उपलब्ध हो सके। सामान्य तौर पर किसान स्थानीय बाजार, मौसम और अपनी सुविधा के अनुसार फसल का चयन करते हैं। क्लस्टर आधारित मॉडल में संभावित मांग को ध्यान में रखकर फसल चयन और उत्पादन की योजना बनाई जाएगी। उद्यानिकी विभाग किसानों को खेती की तकनीक और फसल चयन का प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहा है। इससे उत्पादन का अनुमान पहले से लगाने और जरूरत के अनुसार आपूर्ति की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

Simhastha 2028 Explainer
     Simhastha 2028 Explainer
Simhastha 2028 Explainer: किन 15 जिलों से आएंगी सब्जियां और फूल?

सिंहस्थ की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरा भार उज्जैन जिले पर नहीं डाला जाएगा। योजना में प्रदेश के 15 जिलों को शामिल किया गया है। सब्जियों के उत्पादन के लिए प्रस्तावित सात जिले: उज्जैन,आगर-मालवा,शाजापुर, देवास, रतलाम, नीमच और मंदसौर से सब्जियां मंगाई जा सकती है। इन जिलों में 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड सब्जियों का अतिरिक्त उत्पादन करने का प्रस्ताव है। फूलों की खेती के लिए प्रस्तावित आठ जिले: उज्जैन, इंदौर, देवास, आगर-मालवा , खंडवा , छतरपुर, मैहर और दतिया है। इन जिलों में भी लगभग 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती विकसित करने की योजना है। इस तरह अलग-अलग जिलों में उत्पादन होने से उज्जैन पर निर्भरता कम करने और जरूरत पड़ने पर दूसरे क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

 उज्जैन में गेंदा और गुलाब की खेती पर क्यों रहेगा जोर?

सिंहस्थ में श्रद्धालुओं के भोजन के साथ मंदिरों, अखाड़ों, आश्रमों और धार्मिक शिविरों में फूलों की मांग भी बढ़ने की संभावना है। पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों के लिए फूलों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना भी तैयारी का हिस्सा है। योजना के मुताबिक, उज्जैन में गेंदा उत्पादन बढ़ाने के लिए करीब 4,200 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती विकसित करने, 25 क्लस्टर बनाने और 240 गांवों को जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके अलावा गुलाब की खेती का रकबा 250 हेक्टेयर से अधिक करने की तैयारी है। फूलों की खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए करीब 19 एकड़ में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फ्लोरीकल्चर विकसित करने की योजना भी बताई गई है।

यहां किसानों को बेहतर पौध सामग्री, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। स्थानीय उत्पादन बढ़ने से दूसरे शहरों या राज्यों से फूल मंगाने की जरूरत कम हो सकती है।

Simhastha 2028 Explainer: खेतों से मेला क्षेत्र तक सब्जियां कैसे पहुंचेंगी?

सिंहस्थ की तैयारी में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। सब्जियां जल्दी खराब होने वाली उपज हैं, इसलिए उन्हें खेत से बाजार या उपभोक्ता तक कम समय में पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा। इसमें शामिल हैं: संग्रहण केंद्र: जहां अलग-अलग किसानों की उपज एकत्र की जा सके। ग्रेडिंग और पैकिंग: ताकि सब्जियों को गुणवत्ता के अनुसार व्यवस्थित किया जा सके। कोल्ड स्टोरेज: जरूरत के अनुसार उपज को खराब होने से बचाने के लिए। तेज परिवहन: ताकि सब्जियां समय पर उज्जैन और मेला क्षेत्र तक पहुंचें। डिजिटल निगरानी: किस जिले में कितनी उपज तैयार है और कहां कितनी मांग है, इसका रिकॉर्ड रखने के लिए। अगर उत्पादन तो पर्याप्त हुआ, लेकिन परिवहन और संग्रहण की व्यवस्था कमजोर रही, तो सब्जियों की बर्बादी हो सकती है और मेला क्षेत्र में कमी भी आ सकती है। इसलिए खेत से थाली तक की पूरी व्यवस्था अहम होगी।

Simhastha 2028 Explainer
 Simhastha 2028 Explainer
अगर किसी जिले में फसल खराब हुई तो क्या होगा?

सिंहस्थ लगभग दो महीने तक चलेगा। इस दौरान मौसम में बदलाव, बारिश, गर्मी, कीट या फसल संबंधी बीमारियों के कारण उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए अलग-अलग जिलों में उत्पादन बढ़ाने की योजना उपयोगी हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी जिले में टमाटर की फसल खराब होती है, तो दूसरे उत्पादन क्षेत्र से उसकी आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है। इसी तरह आलू, प्याज और हरी सब्जियों के लिए अलग-अलग उत्पादन क्षेत्रों को जोड़ा जा सकता है। लेकिन इसके लिए फसलवार उत्पादन का अनुमान, वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता और समय पर परिवहन की व्यवस्था जरूरी होगी।

Simhastha 2028 Explainer: क्या 20 हजार किसान सिंहस्थ की जरूरत पूरी कर पाएंगे?

करीब 20 हजार किसानों को जोड़ने की योजना का उद्देश्य उत्पादन को व्यवस्थित करना और मांग के हिसाब से उपज उपलब्ध कराना है। लेकिन किसानों की संख्या अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं है कि सिंहस्थ के दौरान पर्याप्त सब्जियां मिलेंगी।

इसके लिए यह भी देखना होगा कि कितने किसान वास्तव में योजना से जुड़ते हैं, कितने क्षेत्र में खेती शुरू होती है, प्रति हेक्टेयर कितना उत्पादन होता है और कितनी उपज बाजार तक पहुंच पाती है। उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक केएस मंडलाई के मुताबिक, सिंहस्थ के दौरान सब्जियों और फूलों की मांग बढ़ने को ध्यान में रखते हुए दो साल की योजना तैयार की गई है। किसानों को चिह्नित करने, प्रशिक्षण देने और विशेष क्लस्टर विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

सिंहस्थ की तैयारी में खेती से लेकर परिवहन तक बड़ी चुनौती

सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित आवाजाही को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार के सामने भोजन, सब्जियों और फूलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की चुनौती होगी। उद्यानिकी विभाग की योजना में 15 जिलों, 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र और करीब 20 हजार किसानों को जोड़ने का प्रस्ताव है। लेकिन योजना की सफलता सिर्फ खेतों में उत्पादन बढ़ाने से तय नहीं होगी। समय पर फसल तैयार होना, संग्रहण और पैकिंग की व्यवस्था, तेज परिवहन और मांग के अनुसार आपूर्ति की निगरानी भी जरूरी होगी। आयोजन से पहले इन सभी व्यवस्थाओं को जमीन पर उतारना अहम रहेगा।

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