UP MLC Election: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाना बनाकर लगाए गए पोस्टरों ने प्रदेश की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। लखनऊ समेत 15 जिलों में सामने आए इन पोस्टरों में सपा की पिछली सरकार के कार्यकाल, परिवारवाद, भर्ती प्रक्रिया और तुष्टीकरण जैसे मुद्दों को उठाया गया है। पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और सपा नेता आजम खान की तस्वीरों का इस्तेमाल करते हुए पार्टी पर कई आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन पोस्टरों को किस संगठन या व्यक्ति ने लगवाया है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
MLC चुनाव के बीच सियासी माहौल गरम
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर मतदान के दौरान इन पोस्टरों के सामने आने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। पोस्टरों के जरिए समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के राजनीतिक कार्यकाल को सवालों के घेरे में लाने की कोशिश की गई है। लखनऊ, बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, वाराणसी, बस्ती, हरदोई और सीतापुर समेत 15 जिलों में पोस्टर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें तुकबंदी वाले नारों के जरिए सपा की राजनीति, सरकार के पुराने फैसलों और संगठनात्मक ढांचे पर निशाना साधा गया है।
UP MLC Election: माफिया की तस्वीरों के जरिए सपा पर हमला
पोस्टरों में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ आजम खान की तस्वीर भी लगाई गई है। एक पोस्टर पर लिखा है, ‘सपाइयों का क्या भरोसा, चाय, समोसा, रस मलाई, सारे माफिया अपने भाई।‘ इस नारे के जरिए पोस्टर लगाने वालों ने समाजवादी पार्टी पर माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। हालांकि, पोस्टर पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
UP सियासत में पोस्टर वार शुरू
दंगा इफ्तार और बिरयानी
सपा सरकार की असली कहानीडाल चावल और आधार
सपा सरकार एक परिवार15 जिलों में लगे सपा विरोधी पोस्टर, अखिलेश यादव पर माफिया प्रेम का आरोप
पोस्टर पर अतीक, मुख्तार, आजम की तस्वीरें, लिखा – ‘सपाइयों का क्या भरोसा, चाय-समोसा, रस मलाई, सारे माफिया अपने भाई’
— Arjun Chaudharyy (@Arjun5chaudhary) October 23, 2026
पोस्टरों में सपा सरकार के दौरान हुई 2013 की UPPCS भर्ती प्रक्रिया का भी जिक्र किया गया है। इनमें दावा किया गया है कि 86 में से 56 भर्तियां एक जाति विशेष के अभ्यर्थियों की हुई थीं। इस दावे को लेकर पोस्टर पर लिखा गया है, ‘रसगुल्ला और रसमलाई, एक जाति की सत्ता आई।‘ इस नारे के जरिए भर्ती प्रक्रिया और जातिगत प्रतिनिधित्व को लेकर सपा पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, पोस्टर में किए गए दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
परिवारवाद के आरोपों को भी बनाया मुद्दा
अखिलेश यादव के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों में परिवारवाद का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। एक पोस्टर पर लिखा है, ‘दाल चावल और अचार, पार्टी मतलब एक परिवार।‘ इस नारे के जरिए सपा के नेतृत्व और संगठन में यादव परिवार की भूमिका पर निशाना साधा गया है। चुनावी राजनीति में परिवारवाद का मुद्दा विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से बहस का विषय रहा है।
UP MLC Election: इफ्तार पार्टी और मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र
पोस्टरों में अखिलेश यादव की इफ्तार पार्टी और सपा सरकार के कार्यकाल में हुए मुजफ्फरनगर दंगों का भी उल्लेख किया गया है। एक पोस्टर पर लिखा है, ‘दंगा, इफ्तार और बिरयानी, सपा राज की असल कहानी।‘ इस नारे के जरिए पोस्टर लगाने वालों ने सपा की पिछली सरकार की राजनीतिक प्राथमिकताओं और कानून–व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की है। इतना ही नहीं पोस्टरों में सपा सरकार के दौरान कब्रिस्तानों की बाउंड्री के लिए बजट आवंटित किए जाने के मुद्दे को भी उठाया गया है। इस संबंध में एक पोस्टर पर लिखा है, ‘खैनी और बनारसी पान, बजट चला गया कब्रिस्तान।‘ इस नारे के जरिए पिछली सरकार की बजट प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, एक अन्य पोस्टर पर ‘एक कचौड़ी, दो समोसा, गिरगिटेश का क्या भरोसा‘ लिखा गया है, जिसमें ‘गिरगिटेश‘ शब्द के जरिए अखिलेश यादव पर राजनीतिक निशाना साधा गया है।
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