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BA की पढ़ाई, सीमित संसाधन और बड़ा सपना! उत्तराखंड के रवि टम्टा ने बना डाला इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार का प्रोटोटाइप



BA पास रवि टम्टा
BA पास रवि टम्टा

Success Story: कहते हैं, सपने देखने के लिए बड़ी डिग्री नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने का जुनून चाहिए। उत्तराखंड के छोटे से गांव कफलिखान के रहने वाले रवि टम्टा ने इस बात को सच कर दिखाया है। BA की पढ़ाई करने वाले रवि ने न तो किसी बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज से डिग्री हासिल की और न ही उन्हें बचपन से आधुनिक तकनीक से जुड़ी सुविधाएं मिलीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने दम पर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार का प्रोटोटाइप तैयार कर सबका ध्यान खींचा है। रवि की यह कहानी सिर्फ एक आविष्कार की नहीं, बल्कि उस जुनून, मेहनत और आत्मविश्वास की है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद इंसान को कुछ अलग करने की प्रेरणा देता है।


गांव से शुरू हुआ सफर


रवि टम्टा उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में जागेश्वर धाम के पास स्थित कफलिखान गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के जूनियर हाईस्कूल से की और आगे चलकर नैनीताल कैंपस से बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) की डिग्री हासिल की। उनके पिता हरीश राम मैकेनिक हैं। परिवार में तकनीक और मशीनों से जुड़ाव जरूर था, लेकिन आधुनिक एयरोस्पेस तकनीक सीखने के लिए कोई बड़ा संस्थागत या तकनीकी माहौल उपलब्ध नहीं था। ऐसे में रवि ने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय सीखने का जरिया बनाया। उन्होंने इंटरनेट की मदद से तकनीकी जानकारियां जुटाईं, अलग-अलग प्रयोग किए और लगातार अपने विचारों को बेहतर बनाने में जुटे रहे।


Success Story: पहाड़ों की मुश्किलों ने दिया फ्लाइंग कार बनाने का विचार


उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सफर करना आज भी कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। घुमावदार सड़कें, लंबी दूरी और दुर्गम रास्ते लोगों की मुश्किलें बढ़ा देते हैं। खासकर किसी आपातकालीन स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना बेहद कठिन हो सकता है। इन्हीं समस्याओं ने रवि को एक ऐसे विकल्प के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया, जो लोगों के सफर को आसान बना सके। उनके मन में पर्सनल एयर मोबिलिटी यानी छोटे उड़ने वाले वाहनों का विचार आया। यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा सफर, जिसमें उन्होंने अपने सपने को हकीकत में बदलने के लिए लगातार मेहनत की।


2015 में शुरू किया था प्रोजेक्ट


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रवि ने साल 2015 में फ्लाइंग कार प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। कई वर्षों तक जानकारी जुटाने, प्रयोग करने और मॉडल विकसित करने के बाद उन्होंने अपनी कंपनी हापिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से HAPIDA SKYNeX का प्रोटोटाइप तैयार किया। यह बैटरी से चलने वाला सिंगल-सीटर वाहन है, जिसमें कई इलेक्ट्रिक मोटर और प्रोपेलर लगाए गए हैं। इसे वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग (VTOL) की अवधारणा पर आधारित बनाया गया है। यानी इसका डिजाइन बिना पारंपरिक रनवे के सीधे ऊपर उठने और नीचे उतरने की क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हालांकि, इसका प्रोटोटाइप तैयार होना और इसका व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सक्षम होना अलग-अलग बातें हैं। इसे सुरक्षित, व्यावहारिक और उपयोग के योग्य बनाने के लिए आगे तकनीकी विकास और जरूरी परीक्षण अहम होंगे।


Success Story: पहले भी कर चुके हैं कई आविष्कार


रवि की खासियत यह है कि उनकी रुचि सिर्फ एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह इससे पहले भी कई उपयोगी मशीनें और उपकरण बना चुके हैं। उनके आविष्कारों में मोबाइल चार्ज करने वाले जूते, दृष्टिबाधित लोगों के लिए स्मार्ट छड़ी, बांस चीरने की मशीन और आग बुझाने वाली मशीन जैसे प्रयोग शामिल हैं। इन आविष्कारों से पता चलता है कि रवि तकनीक को सिर्फ एक शौक के रूप में नहीं देखते, बल्कि उसे रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान खोजने के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं।


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