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‘200 सीट हक है हमारा’ पोस्टर से गरमाई यूपी की राजनीति, कांग्रेस की मांग और अखिलेश के आरोपों से बढ़ा विवाद

यूपी चुनाव: कांग्रेस की 170 सीटों की मांग पर विवाद
यूपी चुनाव: कांग्रेस की 170 सीटों की मांग पर विवाद

SP Congress Alliance: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस कार्यालय के बाहर लगे ‘200 सीट हक है हमारा’ पोस्टर पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे भारतीय जनता पार्टी की साजिश बताते हुए लखनऊ नगर निगम के अधिकारियों पर भी सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पीडीए की सरकार बनने पर सभी का हिसाब लिया जाएगा।

SP Congress Alliance: कांग्रेस कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर से बढ़ा विवाद

लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अखिलेश यादव का आरोप है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन से भाजपा घबराई हुई है और इसी वजह से ऐसे नकली पोस्टर लगवाए जा रहे हैं।अखिलेश यादव पहले भी कई बार कह चुके हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में पीडीए की जीत होगी। उनका कहना है कि सरकार बनने के बाद सभी से उनके कामकाज का हिसाब लिया जाएगा।

अखिलेश यादव ने अधिकारियों पर लगाए आरोप

अखिलेश यादव ने पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि पोस्टर बिना निर्धारित शुल्क जमा किए सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जा रहे हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने इसके पीछे भ्रष्टाचार या शासन का दबाव होने की आशंका जताई।उनका कहना है कि बिना अनुमति या शुल्क के पोस्टर लगाए जाने से स्थानीय निकाय को राजस्व का नुकसान होता है। अगर पोस्टर लगाने के लिए आधिकारिक रूप से शुल्क जमा किया जाता, तो उसकी रसीद कटती और पोस्टर लगवाने वाले व्यक्ति या संगठन की पहचान सामने आ सकती थी।सपा अध्यक्ष ने कहा कि राजस्व के नुकसान की भरपाई संबंधित अधिकारियों से कराई जानी चाहिए। साथ ही, मामले की जांच कराकर दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं का तारीख के अनुसार रिकॉर्ड रखा जा रहा है। इसके साथ ही यह जानकारी भी जुटाई जा रही है कि घटना के समय कौन-सा अधिकारी जिम्मेदार था।अखिलेश यादव ने दावा किया कि पीडीए की सरकार बनने पर इन मामलों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) जैसी एजेंसियों को सक्रिय करके भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

SP Congress Alliance: कांग्रेस की 170 सीटों की मांग से बढ़ी सियासी हलचल
कांग्रेस की 170 सीटों की मांग से बढ़ी सियासी हलचल
SP Congress Alliance: कांग्रेस के पोस्टर और 170 सीटों की मांग का क्या है मामला?

कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को करीब 170 विधानसभा सीटों की सूची सौंपी है। पार्टी का कहना है कि यह मांग उसकी चुनावी तैयारियों और संगठन की स्थिति को ध्यान में रखकर की गई है।कांग्रेस ने इन संभावित सीटों को चार श्रेणियों में बांटा है, ताकि उन क्षेत्रों की पहचान की जा सके जहां पार्टी की जीतने की संभावना अधिक है।इससे पहले 19 अक्टूबर को प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने उन सीटों पर अधिक ध्यान देने की बात कही थी, जहां पार्टी की जीत की संभावना बेहतर है।वहीं, समाजवादी पार्टी का रुख है कि सीटों का बंटवारा जीतने की क्षमता के आधार पर होना चाहिए। यानी जिस पार्टी के उम्मीदवार किसी सीट पर जीतने की बेहतर स्थिति में हों, उसे उस सीट पर चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए।ऐसे में अगर कांग्रेस 170 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, तो उसे सपा के सामने इन सीटों पर जीत की संभावना का मजबूत आधार भी रखना होगा।

गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

राजनीतिक विश्लेषक विनोद शुक्ला के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर भाजपा को चुनौती देने के लिए सपा और कांग्रेस के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। हालांकि, फिलहाल दोनों दलों के बीच ऐसा तालमेल पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है।दोनों पार्टियों की चुनावी प्राथमिकताएं भी अलग-अलग हैं। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करके वापसी करना चाहती है। वहीं, समाजवादी पार्टी अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों और मौजूदा विधायकों की सीटों को बचाने के साथ अपनी सीटों की संख्या बढ़ाना चाहती है।विश्लेषक के अनुसार, कांग्रेस के लिए ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का फायदा तभी होगा, जब संबंधित क्षेत्रों में उसका संगठन मजबूत हो और उसके पास जीतने वाले उम्मीदवार हों।इसी तरह, सपा के लिए अपने सहयोगी दल को कम सीटें देना भी जीत की गारंटी नहीं है। दोनों पार्टियों को ऐसी सीटों की पहचान करनी होगी, जहां वे मिलकर भाजपा को कड़ी चुनौती दे सकें।विनोद शुक्ला का मानना है कि पिछले चुनाव की तुलना में आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति मजबूत है। ऐसे में मुकाबला काफी कड़ा हो सकता है।

SP Congress Alliance: कांग्रेस को लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन पर भरोसा

कांग्रेस अधिक सीटों की मांग के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को आधार बना रही है। पार्टी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान उसका राजनीतिक विस्तार हुआ है।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 6 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि समाजवादी पार्टी को 37 सीटें मिली थीं। दोनों दलों ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था और कुल 80 में से 43 सीटों पर जीत दर्ज की थी।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस इसी प्रदर्शन के आधार पर विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटें मांग रही है।

SP Congress Alliance: यूपी में सीट बंटवारे पर सपा-कांग्रेस में खींचतान
यूपी में सीट बंटवारे पर सपा-कांग्रेस में खींचतान
सपा विधानसभा चुनाव के पुराने आंकड़ों पर दे रही जोर

समाजवादी पार्टी सीटों के बंटवारे के लिए अलग आधार पर विचार कर रही है। पार्टी का मानना है कि लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में सीटें तय करने का एकमात्र पैमाना नहीं बनाया जा सकता।2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 399 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे केवल 2 सीटों पर जीत मिली थी। उस चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 2.33 प्रतिशत रहा था।दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने 347 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 111 सीटों पर जीत हासिल की थी।इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सपा विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा तय करना चाहती है। दोनों दलों के बीच यही अंतर सीटों को लेकर बातचीत में परेशानी पैदा कर रहा है।

SP Congress Alliance: आगे क्या होगा सीटों के बंटवारे का?

कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को जो सूची सौंपी है, उसमें 170 सीटों की मांग की गई है। पार्टी ने इन सीटों को ए, बी, सी और डी की चार श्रेणियों में बांटा है।उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद इमरान मसूद ने हाल ही में समाजवादी पार्टी की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस, अखिलेश यादव को सरकार बनाने में मदद करने के लिए अपनी राजनीतिक संभावनाओं से समझौता करके खुद को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।वहीं, अखिलेश यादव का कहना है कि भविष्य के चुनावों में भी सहयोगी दलों के साथ गठबंधन जारी रहेगा। उन्होंने सीटों की संख्या के बजाय जीत को प्राथमिकता देने की बात कही है।फिलहाल, सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई है। अब देखना होगा कि दोनों दल अपनी-अपनी मांगों और चुनावी रणनीति के बीच किस तरह तालमेल बैठाते हैं।