Journalism Award: कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान के लिए पत्रकार श्याम मीरा सिंह के चयन ने एक बार फिर पत्रकारिता पुरस्कारों की निष्पक्षता, वैचारिक झुकाव और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए है। गांधी शांति प्रतिष्ठान की ओर से वर्ष 2025 के लिए श्याम मीरा सिंह और वर्ष 2024 के लिए वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी को चुने जाने की घोषणा अक्टूबर 2026 में की गई। दोनों को सम्मानित करने के लिए 24 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई थी। इस सम्मान के तहत एक लाख रुपये, प्रशस्ति-पत्र और प्रतीक चिह्न दिया जाता है। इस सम्मान की घोषणा के बाद एक सवाल उठता है कि आखिर कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान पाने की वास्तविक योग्यता क्या है? क्या इसके लिए कोई स्पष्ट, सार्वजनिक और मापने योग्य मानदंड हैं, या चयन समिति पत्रकारिता की उस धारा को प्राथमिकता देती है जो सत्ता, सरकार और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था की आलोचना करती है?
रवीश कुमार से श्याम मीरा सिंह तक किन पत्रकारों को मिला सम्मान?
वर्ष 2017 में शुरू हुए इस सम्मान के अब तक घोषित प्राप्तकर्ताओं में कई ऐसे नाम शामिल हैं जिनकी पत्रकारिता में सत्ता की आलोचना, सामाजिक असमानता, नागरिक अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर रहा है।
वर्ष पत्रकार
2017 रवीश कुमार
2018 निखिल वागले
2021 अजीत अंजुम
2022 आरफा खानम शेरवानी
2023 उर्मिलेश
2024 हृदयेश जोशी
2025 श्याम मीरा सिंह
इस सूची को देखने के बाद मन में यह धारणा बन जाती है कि क्या सम्मान की चयन-प्रक्रिया में वामपंथी, उदारवादी या सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलता है?
Journalism Award: श्याम मीरा सिंह के चयन पर सवाल क्यों?
श्याम मीरा सिंह डिजिटल पत्रकारिता के चर्चित चेहरों में शामिल हैं। उन्होंने ईटीवी भारत, इकोनॉमिक टाइम्स, आज तक और न्यूज़क्लिक जैसे संस्थानों में काम किया है। बाद में उन्होंने अपने डिजिटल मंच के जरिए स्वतंत्र रूप से पत्रकारिता और राजनीतिक टिप्पणी जारी रखी। उनकी रिपोर्टिंग और टिप्पणियों में मौजूदा राजनीति, सरकार और सामाजिक मुद्दों पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण दिखाई देता है। उनके समर्थक इसे सत्ता से सवाल पूछने वाली पत्रकारिता मान सकते हैं, जबकि असहमत पाठक उनके काम की निष्पक्षता, भाषा, तथ्य-चयन और राजनीतिक संतुलन की जांच की मांग कर सकते हैं। जबकि लोकतंत्र में दोनों दृष्टिकोणों के लिए जगह होनी चाहिए। किसी पत्रकार का सरकार की आलोचना करना अपने आप में उसे देशविरोधी नहीं बनाता; उसी तरह सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकार को केवल इसी आधार पर निष्पक्ष या श्रेष्ठ पत्रकार भी नहीं माना जा सकता।
सरकार की आलोचना सम्मान की कसौटी?
कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान की शुरुआत स्वतंत्र और प्रगतिशील पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हुई थी। शुरुआती विवरणों में भारतीय भाषाओं में स्वतंत्र विचार, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाले पत्रकारों को सम्मानित करने की बात कही गई थी। लेकिन स्वतंत्र और प्रगतिशील पत्रकारिता की व्याख्या व्यापक है। इसमें सरकार की आलोचना करने वाली पत्रकारिता भी शामिल हो सकती है, मगर इसकी कसौटी सिर्फ आलोचना नहीं होनी चाहिए। तथ्यपरकता, स्रोतों की विश्वसनीयता, गलतियों में सुधार, अलग-अलग पक्षों को जगह देना और सार्वजनिक हित के सवालों पर निरंतर काम करना भी महत्वपूर्ण हैं। जिसके बात ये सवाल उठता है कि क्या पुरस्कार के लिए विस्तृत लिखित मानदंड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं? क्या पत्रकारों के काम का मूल्यांकन किसी निश्चित अवधि और समान कसौटियों पर किया जाता है? क्या अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोणों से आने वाले पत्रकारों पर भी विचार किया जाता है?
वर्ष 2025 के लिए मिले “कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान” से भारी महसूस कर रहा हूँ। इससे ज़िम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। पूरी कोशिश करूँगा कि बड़े-बुजुर्गों की उम्मीदों का मान रखूँ। आप सबके आशीर्वाद, स्नेह और प्यार को शायद ही कभी चुका पाऊँ। मेरा दिली आभार स्वीकार करें। 🌸🥹❤️ https://t.co/15BK8ye1kB
— Shyam Meera Singh (@ShyamMeeraSingh) October 25, 2026
इस सूची में रवीश कुमार, अजीत अंजुम, आरफा खानम शेरवानी, उर्मिलेश और अब श्याम मीरा सिंह जैसे नामों का शामिल होना एक वैचारिक पैटर्न होने की आशंका पैदा करता है। लेकिन वर्ष 2024 के लिए चुने गए हृदयेश जोशी की पत्रकारिता में पर्यावरण, विकास और सामाजिक-राजनीतिक सवालों पर लंबे समय का काम शामिल है। उनके चयन से यह संकेत मिलता है कि पुरस्कार के लिए केवल राजनीतिक टिप्पणियां ही नहीं, बल्कि दूसरे जनहित के विषयों पर पत्रकारिता भी प्रासंगिक हो सकती है।
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