Modi’s Banaskantha visit: गुजरात के बनासकांठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा शुक्रवार को दो वजहों से चर्चा में रही। पहली, मोदी का आलू से सोना बनाने वाला बयान, जिसे राहुल गांधी के पुराने बयान से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी, जनसभा में कुर्सियों की जगह चारपाइयों का इंतजाम। पीएम मोदी ने खुद इस व्यवस्था पर चुटकी लेते हुए कहा कि अगर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड वालों को बुलाया जाता तो यह आयोजन रिकॉर्ड में दर्ज हो सकता था।
प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी की, हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया तथा पशुपालन और डेयरी क्षेत्र से जुड़ी सुविधाओं का जायजा लिया। ऐसे में सवाल है कि आलू से सोना वाले बयान के पीछे क्या राजनीतिक संदर्भ है और चारपाई वाली सभा की चर्चा क्यों हो रही है?
1. आलू से सोना वाले बयान पर मोदी ने क्या कहा?
बनासकांठा की जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने स्थानीय किसानों की तारीफ करते हुए कहा कि यहां का आलू दुनिया भर में मशहूर है। इसी दौरान उन्होंने कहा, ”बनासकांठा में आकर कोई नहीं कहता कि आलू से सोना बनाएंगे, क्योंकि यहां के लोग पहले ही आलू से सोना बना रहे हैं।” मोदी के इस बयान को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस पुराने बयान से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने आलू से सोना बनाने की बात कही थी। उस बयान को लेकर बीजेपी लंबे समय से राहुल गांधी पर निशाना साधती रही है। मोदी ने बनासकांठा के किसानों की मेहनत और आलू उत्पादन की चर्चा के बहाने इस राजनीतिक संदर्भ को फिर से सामने ला दिया।
Modi’s Banaskantha visit: 2. चारपाई वाली सभा की चर्चा क्यों हो रही है?
बनासकांठा की इस जनसभा में लोगों के बैठने के लिए कुर्सियों के बजाय चारपाइयों यानी खाट का इंतजाम किया गया था। गांवों में चारपाई पर बैठकर बातचीत और बैठक करने की परंपरा पुरानी रही है। इसी ग्रामीण अंदाज को जनसभा में भी अपनाया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से इस व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि आज यहां सभी लोग चारपाई पर बैठे हैं। अगर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वालों को बुलाया होता तो यह रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता। उन्होंने बनासकांठा के लोगों की तारीफ करते हुए कहा कि यहां के लोगों ने गांवों की पुरानी परंपरा को जिंदा रखा है। इस टिप्पणी के बाद चारपाई वाली सभा भी कार्यक्रम का खास आकर्षण बन गई।
25 साल बाद बनासकांठा पहुंचे मोदी, क्या बोले?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में गुजरात के साथ अपने पुराने जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह करीब 25 साल बाद बनासकांठा आए हैं। मोदी के मुताबिक, 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम भी इसी क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद गुजरात के लोगों ने उन्हें बहुत प्यार दिया। एक सामान्य परिवार से निकलकर उन्हें पहले गुजरात और फिर देश की सेवा करने का अवसर मिला।
मोदी ने कहा कि जनसेवा से राष्ट्रसेवा और गुजरात के विकास से देश के विकास का रास्ता उन्हें गुजरात के लोगों ने ही सिखाया है। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन के अंतिम क्षण तक जनता की सेवा में जुटे रहेंगे।
Modi’s Banaskantha visit: 4. पीएम-किसान की 24वीं किस्त से किसानों को क्या मिला?
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी की। इसके तहत 9.34 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को 18,690 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि मिलने की जानकारी दी गई।
मोदी ने कहा कि गुजरात के 50 लाख से ज्यादा किसानों को भी इस किस्त का लाभ मिला है। इनमें बनासकांठा के किसानों के खातों में भी करीब 50 करोड़ रुपये पहुंचने की बात कही गई। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में बताया कि पीएम-किसान योजना के तहत अब तक करीब 4.50 लाख करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश में छोटे किसानों की संख्या 85 प्रतिशत से ज्यादा है और सरकार ने उनकी आर्थिक मदद को प्राथमिकता दी है।
5. खेती और पशुपालन को लेकर सरकार की क्या योजनाएं हैं?
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में खेती के साथ पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर बीज और आधुनिक खेती के तरीकों की जरूरत है। मोदी के मुताबिक, किसानों को बीजों की करीब 3,000 नई किस्में उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं, 26 करोड़ से ज्यादा सॉइल हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं, जिनसे किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद और पोषक तत्वों की जानकारी मिलती है।

पशुपालन के बारे में उन्होंने कहा कि पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान चलाया गया है। उनके अनुसार, अब तक करीब 150 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पशुओं की नस्ल सुधारने में आईवीएफ तकनीक मददगार साबित हो सकती है। इससे अच्छी नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने और दूध उत्पादन में सुधार करने में सहायता मिलेगी।
Modi’s Banaskantha visit: 6. गोबर से कमाई और बायो-CNG पर क्या बोले मोदी?
प्रधानमंत्री ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए गोबर और कृषि अवशेषों के इस्तेमाल की बात भी कही। उन्होंने कहा कि गोबर और खेती के अवशेषों से बायोगैस, बायो-CNG और जैविक खाद बनाई जा सकती है। इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान दो बायो-CNG प्लांट का शिलान्यास भी किया गया। मोदी ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर किसानों की आय के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं। इससे किसानों को अतिरिक्त कमाई के अवसर मिलेंगे और कृषि अवशेषों का बेहतर इस्तेमाल भी हो सकेगा।
7. ₹14 हजार करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
बनासकांठा दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें कृषि, पशुपालन, बच्चों की सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान गुजरात में 4,030 नए आंगनवाड़ी केंद्रों की आधारशिला रखी गई। इसके अलावा तैयार हो चुके 361 बाल-अनुकूल आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्घाटन किया गया। इन परियोजनाओं पर करीब 800 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई।
प्रधानमंत्री कृषि अवसंरचना कोष के तहत पूरी हो चुकी 521 परियोजनाएं भी देश को समर्पित की गईं। इनकी कुल लागत करीब 4,950 करोड़ रुपये बताई गई। इनमें कोल्ड स्टोरेज, गोदाम, कोल्ड चेन, साइलो और प्रसंस्करण केंद्र जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने दो नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई। इनमें अहमदाबाद-वाराणसी और मेहसाणा-साबरमती के बीच चलने वाली ट्रेनें शामिल हैं।
Modi’s Banaskantha visit: 8. IVF लैब और पशु अनुसंधान केंद्र क्यों महत्वपूर्ण हैं?
प्रधानमंत्री ने बनासकांठा में एम्ब्रियो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी-इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (ET-IVF) लैब और भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) का भी दौरा किया। इन सुविधाओं का उद्देश्य पशुओं की बेहतर नस्ल तैयार करने और डेयरी क्षेत्र को वैज्ञानिक तकनीक से मजबूत करना है। आईवीएफ तकनीक के जरिए अच्छी नस्ल वाले पशुओं से भ्रूण तैयार कर दूसरी मादा पशुओं में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इससे बेहतर नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है। डेयरी और पशुपालन पर निर्भर किसानों के लिए यह तकनीक दूध उत्पादन और पशुओं की गुणवत्ता सुधारने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

9. पानी और बिजली बचाने की अपील क्यों की?
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में गुजरात के पुराने दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 25 साल पहले राज्य के कई क्षेत्रों में बिजली और पानी की समस्या थी। उस समय उन्होंने लोगों से पानी और बिजली बचाने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि उस समय उनकी बातों का विरोध भी होता था, लेकिन आज परिस्थितियों में बदलाव आया है। इसके बावजूद उन्होंने लोगों से पानी और बिजली बचाने की अपील दोहराई। मोदी ने मछली पालन, शहद उत्पादन और पशुपालन के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत का सीफूड निर्यात और शहद उत्पादन पिछले वर्षों में बढ़ा है।
Modi’s Banaskantha visit: 10. अब एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में होंगे शामिल
गुजरात दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में शामिल होंगे। इस तरह बनासकांठा का कार्यक्रम राजनीतिक बयान, ग्रामीण परंपरा और किसान-पशुपालकों से जुड़ी योजनाओं के कारण चर्चा में रहा। आलू से सोना वाला बयान जहां राहुल गांधी के पुराने बयान की याद दिलाता है, वहीं चारपाई पर बैठकर जनसभा सुनने का इंतजाम ग्रामीण संस्कृति की झलक पेश करता है। दूसरी ओर, किसान सम्मान निधि और विकास परियोजनाओं के जरिए प्रधानमंत्री ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सरकार की योजनाओं को भी सामने रखा।








