Israel Election: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी ने बिना कोई सबूत दिए अरब नेतृत्व वाली पार्टियों पर चुनाव में वोटों की हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने यह आशंका भी जताई है कि कथित गड़बड़ी में विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है। हालांकि, चुनाव के अंतिम नतीजों से साफ हो गया है कि नेतन्याहू के गठबंधन ने संसद में अपना बहुमत खो दिया है।दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के बेहतर प्रदर्शन से परेशान होकर वे अरब समुदाय को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि इसके जरिए चुनाव की निष्पक्षता और नतीजों की वैधता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अब सरकार बनाने में अरब पार्टियों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। अगर विपक्षी दल उनका समर्थन हासिल कर लेते हैं, तो संसद यानी नेसेट में बहुमत वाली सरकार बनाई जा सकती है। हालांकि, इजरायल की राजनीति में ऐसा गठबंधन बनाना एक दुर्लभ और जोखिम भरा कदम होगा।
Israel Election: चुनाव में किसे मिली कितनी सीटें?
इजरायल की 120 सदस्यों वाली संसद के चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के गठबंधन को केवल 53 सीटें मिली हैं, जबकि पिछली संसद में उसके पास 68 सीटें थीं। वहीं, नेतन्याहू के मुख्य विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं। दूसरी ओर, अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने कुल 19 सीटों पर जीत हासिल की है। मतगणना पूरी हो चुकी है, लेकिन चुनाव परिणामों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया जाना अभी बाकी है। अगले बुधवार को नतीजे देश के राष्ट्रपति को सौंपे जाएंगे।
नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने लगाए वोटों में गड़बड़ी के आरोप
मंगलवार को मतदान के बाद आए एग्जिट पोल में नेतन्याहू को नुकसान होने के संकेत मिले थे। इसके बाद से ही उनकी पार्टी लिकुड अरब नेतृत्व वाली पार्टियों पर चुनाव में गड़बड़ी करने का आरोप लगा रही है। ये आरोप उस समय और तेज हो गए, जब इजरायल की चुनाव समिति के प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के जज नोम सोहलबर्ग ने विदेशी हस्तक्षेप को लेकर गंभीर आशंकाएं सामने आने की बात कही।सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को लिखे एक पत्र में सोहलबर्ग ने बताया कि उनके सामने विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े कुछ गंभीर आरोप रखे गए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इन दावों की पुष्टि नहीं कर सकते। इसके बावजूद मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने सुरक्षा एजेंसी से इसकी जांच करने को कहा है।
Israel Election: कतर पर लगाया चुनाव में हस्तक्षेप का आरोप
नेतन्याहू की पार्टी ने इस मामले पर सख्त बयान जारी करते हुए कहा कि इजरायल में चुनाव चुरा लिए गए हैं। पार्टी ने बिना किसी सबूत के दावा किया कि चुनाव में कथित हस्तक्षेप का मकसद संसद पर विदेशी नियंत्रण स्थापित करना, इजरायल का इस्लामीकरण करना और दक्षिणपंथी सरकार को सत्ता से हटाना था। लिकुड पार्टी के कुछ सदस्य इस कथित हस्तक्षेप के लिए कतर को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इजरायल में कई लोग कतर को हमास का समर्थक मानते हैं। हमास गाजा में सक्रिय एक चरमपंथी संगठन है।
कतर ने आरोपों को बताया बेतुका और खतरनाक
कतर पर लगाए गए आरोपों को लेकर इजरायल के चुनाव आयोग ने कहा कि जांच खुफिया जानकारी के आधार पर की जा रही है। हालांकि, आयोग ने इस मामले में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की और जांच को लेकर सामने आ रही बेबुनियाद खबरों से लोगों को सावधान रहने की सलाह दी। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस जांच का राष्ट्रपति को सौंपे जाने वाले अंतिम चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसका संबंध किसी विशेष समुदाय से भी नहीं है। वहीं, कतर ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बेतुका और खतरनाक बताया है।
Israel Election: इजरायल में अब कैसे बनेगी नई सरकार?
चुनाव में सबसे अहम बात यह रही कि इजरायल के फिलिस्तीनी मूल के अरब नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस जीत के बाद सरकार बनाने में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। नेतन्याहू पहले ही अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के साथ मिलकर काम करने से इनकार कर चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विपक्षी गठबंधन इन पार्टियों के साथ कोई समझौता कर पाएगा? इसके अलावा, गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली सेना की लगातार जारी सैन्य कार्रवाई के बीच अरब पार्टियों के लिए विपक्ष के साथ मिलकर सरकार बनाना कितना आसान होगा, यह भी देखने वाली बात होगी।
विपक्ष ने नेतन्याहू पर साधा निशाना
नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट ने लिकुड पार्टी के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू की पार्टी चुनाव परिणामों की वैधता पर इसलिए सवाल उठा रही है, क्योंकि उसे हार का सामना करना पड़ा है। विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों पर तंज कसते हुए आइजेनकोट ने कहा कि उन्हें खुशी है कि नेतन्याहू आखिरकार इजरायल के मामलों में कतर के कथित दखल की निंदा कर रहे हैं। गौरतलब है कि नेतन्याहू पर लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि उनके कुछ पूर्व करीबी सहयोगियों ने कतर से पैसे लिए थे।

Israel Election: हार के बाद नेतन्याहू की रणनीति पर उठे सवाल
चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के पीछे नेतन्याहू की एक राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है। माना जा रहा है कि वे ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उनके विरोधियों और अरब पार्टियों के बीच संभावित गठबंधन बनने से रोका जा सके। नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि अगर आइजेनकोट अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करते हैं, तो यह देशद्रोह जैसा होगा।फिलहाल नेतन्याहू के धार्मिक और राष्ट्रवादी सहयोगियों वाले गठबंधन के पास बहुमत नहीं है। वहीं, उनके धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी विरोधी भी जरूरी सीटों का आंकड़ा हासिल नहीं कर पाए हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के लिए सरकार बनाने का रास्ता अरब पार्टियों के समर्थन से होकर गुजरता है।
अरब पार्टियां बनीं सरकार बनाने में किंगमेकर
मौजूदा चुनावी नतीजों के बाद अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं। ये पार्टियां आइजेनकोट को सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन दे सकती हैं और इस तरह नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इजरायली कानून के मुताबिक, चुनाव परिणामों को 4 नवंबर तक प्रमाणित करना जरूरी है।अगर अरब पार्टियों को सरकार में सीधे शामिल होने का मौका नहीं मिलता है, तब भी वे संसद में अपनी ताकत दिखा सकती हैं। वे नेतन्याहू के दूसरे विरोधियों का समर्थन कर सकती हैं। इसके अलावा, नए संसद अध्यक्ष के चुनाव, संसदीय एजेंडे को तय करने और नई सरकार बनने से पहले कानून बनाने व उन्हें पारित कराने में भी उनकी भूमिका हो सकती है।
Israel Election: नेतन्याहू की हार के पीछे क्या रही वजह?
चुनाव से पहले ही नेतन्याहू और उनकी पार्टी लिकुड ने अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह अरब नागरिकों को समाज में और अधिक अलग-थलग करने की कोशिश थी। इजरायल की कुल आबादी में फिलिस्तीनी मूल के अरब नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। दूसरे फिलिस्तीनियों के प्रति उनकी सहानुभूति के कारण अक्सर उन्हें शक की नजर से देखा जाता है।चुनाव प्रचार के दौरान अरब समुदाय को निशाना बनाए जाने और नेतन्याहू की कट्टर दक्षिणपंथी सरकार की विभाजनकारी नीतियों से समुदाय के लोग नाराज थे। माना जा रहा है कि इसी नाराजगी के चलते इस बार पहले की तुलना में काफी अधिक संख्या में अरब नागरिकों ने मतदान किया।
अरब पार्टियों ने भी नेतन्याहू पर लगाया चुनाव चुराने का आरोप
जहां नेतन्याहू की पार्टी अरब दलों पर वोटों में गड़बड़ी का आरोप लगा रही है, वहीं अरब पार्टियों ने भी पलटवार किया है। अरब नेतृत्व वाली जॉइंट लिस्ट पार्टी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि नेतन्याहू चुनाव चुराने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, अरब नेतृत्व वाली राअम पार्टी के प्रमुख मंसूर अब्बास ने चुनाव में कथित हस्तक्षेप की जांच का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। साथ ही, उन्होंने नेतन्याहू पर लोगों को भड़काने का अभियान चलाने का आरोप लगाया।इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने मौजूदा स्थिति को संवेदनशील बताया और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी पूरे समुदाय को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उसके लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है।
Israel Election: क्या यहूदी और अरब पार्टियां मिलकर बनाएंगी सरकार?
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यहूदी और अरब पार्टियां मिलकर इजरायल में एक नया गठबंधन बनाएंगी? या फिर वे राजनीतिक दल, जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का वादा किया था, अपना रुख बदलकर उनके साथ सरकार बनाने के लिए तैयार हो जाएंगे?अगर नेतन्याहू सत्ता से बाहर होते हैं, तो उनके लिए कई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। उन पर लंबे समय से लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसके अलावा, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए भीषण हमले के दौरान इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था में जो कमियां सामने आई थीं, उनकी भी जांच होने की संभावना है।
आइजेनकोट ने अरब पार्टियों के साथ गठबंधन के दिए संकेत
गादी आइजेनकोट ने संकेत दिया है कि वे कुछ शर्तों के साथ अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के साथ गठबंधन बनाने के लिए तैयार हो सकते हैं। अरब नेतृत्व वाली जॉइंट लिस्ट पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता अहमद तिबी ने आर्मी रेडियो को बताया कि विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने संसद के अध्यक्ष को बदलने के मुद्दे पर चर्चा की थी। तिबी के मुताबिक, उन्होंने विपक्षी नेताओं को बताया कि उनकी पार्टी अपने गठबंधन के उम्मीदवार का समर्थन करेगी।इस बीच, तेल अवीव और अधिक रूढ़िवादी सोच वाले शहर यरुशलम में रातभर छोटी-छोटी रैलियां हुईं। इन रैलियों में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को शामिल करके गठबंधन बनाने के समर्थन में लोग जुटे।
Israel Election: अगर नई सरकार नहीं बनी तो क्या होगा?
अगर तमाम कोशिशों के बावजूद इजरायल में कोई भी गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाता और नई सरकार नहीं बनती है, तो देश को अगले साल की शुरुआत में फिर से चुनाव का सामना करना पड़ सकता है। बुधवार को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने संकेत दिया कि वे दोबारा चुनाव कराने की स्थिति से बचना चाहते हैं। नेतन्याहू के विरोधी गादी आइजेनकोट ने भी इसी तरह की इच्छा जताई है।हालांकि, नए चुनाव होने की स्थिति में कई सवाल खड़े होंगे। सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या अरब समुदाय के लोग एक बार फिर बड़ी संख्या में मतदान करेंगे? इसके अलावा, जो हजारों इजरायली नागरिक इस बार वोट डालने के लिए अपने घर लौटे थे, क्या वे दोबारा ऐसा करेंगे? इनमें से कई लोगों ने कहा था कि वे नेतन्याहू को सत्ता से हटाकर देश को बचाने के उद्देश्य से मतदान करने आए थे। ऐसे में अगर फिर से चुनाव होते हैं, तो मतदाताओं का रुख इजरायल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।








