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नेतन्याहू के करीबी ने बदला पाला! आइजनकोट को PM बनाने का ऑफर, जानिए इजराइल में क्या है पूरा सियासी खेल

Israel Elections 2026: इजराइल की राजनीति में चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर नया मोड़ आ गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सहयोगी दल यूनाइटेड तोरा जूडिज्म ने विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया है। खास बात यह है कि इस प्रस्ताव के साथ पार्टी ने एक बड़ी शर्त भी रखी है। वह चाहती है कि हरेदी यहूदी समुदाय के लोगों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट मिलती रहे।

सात सीटों वाले इस दल का प्रस्ताव इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के आंकड़े से पीछे बताया जा रहा है। ऐसे में सहयोगी दल का रुख बदलना सरकार गठन के पूरे समीकरण को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, आइजनकोट की सैन्य सेवा को लेकर अलग राय है। ऐसे में सवाल है कि क्या दोनों के बीच सहमति बन पाएगी और क्या नेतन्याहू की सत्ता वास्तव में खतरे में है?

1. नेतन्याहू के सहयोगी ने आइजनकोट को PM पद का ऑफर क्यों दिया?

इजराइल के चुनावी नतीजों के बाद सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच बातचीत जारी है। इसी बीच चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू के सहयोगी दल यूनाइटेड तोरा जूडिज्म ने विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को समर्थन देने की पेशकश की है। पार्टी के पास संसद में सात सीटें हैं। उसने संकेत दिया है कि वह आइजनकोट की सरकार में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन दे सकती है। इसके लिए उसकी शर्त है कि हरेदी समुदाय के लोगों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट मिलती रहे। पार्टी के एक नेता ने कथित तौर पर कहा कि नेतन्याहू के साथ गठबंधन से अब उन्हें कुछ हासिल नहीं होने वाला। हालांकि, इस बयान और समर्थन की पेशकश को अंतिम राजनीतिक समझौता नहीं माना जा सकता। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना अभी बाकी है।

Israel Elections 2026: 2. कौन हैं गादी आइजनकोट, जिन्हें PM बनाने की चर्चा है?

गादी आइजनकोट इजराइल के पूर्व सैन्य प्रमुख और विपक्षी नेता हैं। वह याशर पार्टी से जुड़े हैं और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरोधी खेमे में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। आइजनकोट का राजनीतिक रुख कई मुद्दों पर नेतन्याहू से अलग है। खासकर हरेदी समुदाय को सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट के मामले में उनका रुख स्पष्ट है। वह चाहते हैं कि देश के सभी नागरिकों के लिए सैन्य या नागरिक सेवा की व्यवस्था हो। यही वजह है कि यूनाइटेड तोरा जूडिज्म की शर्त उनके लिए राजनीतिक और नीतिगत चुनौती बन सकती है।

3. क्या है हरेदी समुदाय और सैन्य सेवा का विवाद?

इजराइल में हरेदी यहूदी समुदाय को अति-रूढ़िवादी धार्मिक समुदाय के रूप में जाना जाता है। इस समुदाय के लोग धार्मिक शिक्षा और परंपराओं को विशेष महत्व देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल में इनकी आबादी करीब 10 लाख है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 13 प्रतिशत है। इजराइल में आमतौर पर यहूदी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है। लेकिन हरेदी समुदाय के धार्मिक छात्रों को लंबे समय से इससे छूट मिलती रही है।

कैसे शुरू हुई सैन्य सेवा से छूट?

1948 में इजराइल की स्थापना के बाद धार्मिक संस्थानों में पढ़ने वाले हरेदी समुदाय के करीब 400 छात्रों को सेना में भर्ती से छूट दी गई थी। इसका उद्देश्य धार्मिक अध्ययन और परंपराओं को सुरक्षित रखना था। समय के साथ इस छूट का दायरा बढ़ता गया। अब यही मुद्दा इजराइल की राजनीति में बड़े विवाद की वजह बना हुआ है। एक पक्ष का तर्क है कि जब देश युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब सभी नागरिकों को सेना में योगदान देना चाहिए। वहीं हरेदी समुदाय और उसके समर्थक धार्मिक शिक्षा की परंपरा को बनाए रखने के पक्ष में हैं।

Israel Elections 2026
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Israel Elections 2026: 4. नेतन्याहू और आइजनकोट के बीच कहां है मतभेद?

हरेदी समुदाय को सैन्य सेवा से छूट देने के मुद्दे पर नेतन्याहू और आइजनकोट की राय अलग-अलग है। नेतन्याहू की सरकार इस छूट को जारी रखने के पक्ष में रही है। इसके पीछे हरेदी समुदाय के राजनीतिक समर्थन और सहयोगी दलों की भूमिका को भी अहम माना जाता है। दूसरी ओर, आइजनकोट चाहते हैं कि हरेदी समुदाय के लोगों को भी सैन्य या नागरिक सेवा में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की होनी चाहिए। यही कारण है कि यूनाइटेड तोरा जूडिज्म का प्रस्ताव आइजनकोट के लिए आसान नहीं है। अगर वह समर्थन स्वीकार करते हैं तो उन्हें अपनी सैन्य सेवा संबंधी नीति पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

5. इजराइल चुनाव का पूरा गणित क्या है?

इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए सामान्य तौर पर 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि उनके विरोधी खेमे से जुड़ी पार्टियों को कुल 67 सीटें मिली हैं। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। लेकिन विपक्ष के सामने भी चुनौती है। उसके सभी दल एकजुट नहीं हैं। यहूदी नेतृत्व वाली कुछ पार्टियों ने अरब बहुल जॉइंट लिस्ट और राअम के साथ गठबंधन करने से इनकार किया है। ऐसे में विपक्ष के पास संख्या होने के बावजूद सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाना आसान नहीं है।

Israel Elections 2026: 6. जॉइंट लिस्ट क्या है और इसकी भूमिका क्यों अहम है?

जॉइंट लिस्ट इजराइल की अरब आबादी के अधिकारों की बात करने वाला राजनीतिक गठबंधन है। इसमें हदाश, ताल और बलद जैसी पार्टियां शामिल हैं। चुनाव में इस गठबंधन को 11 सीटें मिलने की बात कही गई है। यह गठबंधन अरब और यहूदी नागरिकों के समान अधिकार, शिक्षा, रोजगार और फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक स्थिति रखता है। सरकार गठन के मौजूदा समीकरण में जॉइंट लिस्ट की भूमिका इसलिए अहम हो सकती है, क्योंकि विपक्षी दलों को बहुमत के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है। हालांकि, कुछ यहूदी नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टियां उसके साथ सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं।

7. क्या नेतन्याहू की सत्ता जाना तय है?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। चुनाव में नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से पीछे बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष के सामने भी कई चुनौतियां हैं। एक तरफ विपक्षी नेता यायर लैपिड का दावा है कि नेतन्याहू विरोधी खेमे ने चुनाव जीता है। उन्होंने सरकार बनाने के लिए समय देने की मांग की है। दूसरी तरफ आइजनकोट और अन्य विपक्षी नेता समर्थन जुटाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। यूनाइटेड तोरा जूडिज्म का प्रस्ताव इस पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ देता है। लेकिन हरेदी समुदाय को सैन्य सेवा से छूट देने की शर्त पर आइजनकोट की सहमति मिलेगी या नहीं, यह सबसे बड़ा सवाल है।

Israel Elections 2026: 8. इजराइल में सरकार बनाने की प्रक्रिया क्या है?

इजराइल में चुनाव के बाद राष्ट्रपति सरकार बनाने के लिए किसी नेता को आमंत्रित करते हैं। उस नेता को शुरुआत में 28 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत दे सकते हैं। इस दौरान संबंधित नेता दूसरी पार्टियों से बातचीत करके समर्थन जुटाता है। सरकार बनाने के लिए आमतौर पर संसद में 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। अगर तय समय में सरकार नहीं बन पाती है, तो आगे की राजनीतिक प्रक्रिया के तहत दूसरे नेता को मौका दिया जा सकता है या नए चुनाव की स्थिति बन सकती है।

क्या नेतन्याहू के बिना बनेगी इजराइल में नई सरकार?

इजराइल में चुनाव के बाद सत्ता का समीकरण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से पीछे है और विपक्षी दल सरकार बनाने की कोशिश में जुटे हैं। इसी बीच उनके सहयोगी दल यूनाइटेड तोरा जूडिज्म की ओर से आइजनकोट को समर्थन देने की पेशकश ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, सात सीटों वाले इस दल की शर्त और आइजनकोट की सैन्य सेवा संबंधी नीति में बड़ा अंतर है। इसलिए यह देखना अहम होगा कि दोनों के बीच कोई समझौता होता है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि हरेदी समुदाय की सैन्य सेवा का मुद्दा इजराइल में सरकार गठन की राजनीति के केंद्र में आ गया है।

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