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कौन है सौरभ चंद्राकर? महादेव ऐप से कैसे खड़ा किया सट्टेबाजी का साम्राज्य?

Mahadev App: सौरभ ने महादेव ऐप से कैसे खड़ा किया सट्टेबाजी का साम्राज्य

Mahadev App: महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर 2026 को ओमान से भारत लाया गया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम उसे प्रत्यर्पण प्रक्रिया के तहत भारत लेकर आई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ ने अपने सहयोगी रवि उप्पल के साथ मिलकर ऑनलाइन सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया था। इस मामले में करीब 6,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच चल रही है। कभी छत्तीसगढ़ के भिलाई में जूस की दुकान चलाने वाला सौरभ आखिर कैसे इस नेटवर्क का प्रमुख चेहरा बना?

भिलाई में जूस की दुकान चलाता था सौरभ

सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। मीडिया रिपोर्टों और जांच एजेंसियों से सामने आई जानकारी के मुताबिक, वह पहले कपड़ों की बिक्री से जुड़ा काम करता था और बाद में अपने भाई के साथ जूस की दुकान चलाने लगा। इसी दौरान उसकी मुलाकात रवि उप्पल से हुई। दोनों ने मिलकर वर्ष 2018 के आसपास महादेव ऑनलाइन बुक नाम से ऑनलाइन सट्टेबाजी का प्लेटफॉर्म शुरू किया। बाद में यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैल गया।

Mahadev App: महादेव ऐप के जरिए कैसे चलता था कारोबार?

महादेव ऐप के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस और दूसरे खेलों के अलावा कार्ड गेम तथा अन्य गतिविधियों पर ऑनलाइन दांव लगाए जाते थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसका संचालन केवल एक ऐप तक सीमित नहीं था, बल्कि इससे जुड़ी कई वेबसाइट और प्लेटफॉर्म भी काम करते थे। उपयोगकर्ताओं को आईडी उपलब्ध कराई जाती थी, जिसके माध्यम से वे सट्टा लगाते थे। इस नेटवर्क का संचालन भारत से बाहर बैठकर किया जाता था।

फ्रेंचाइजी मॉडल से फैलाया नेटवर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के मुताबिक, महादेव नेटवर्क में पैनल और शाखाओं का फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया गया था। अलग-अलग शहरों में सहयोगियों को पैनल दिए जाते थे, जो नए ग्राहकों को जोड़ते और सट्टेबाजी का संचालन करते थे। ED के अनुसार, इस व्यवस्था में संचालकों और मुख्य प्रमोटरों के बीच 70:30 के अनुपात में मुनाफे का बंटवारा होता था। इसी तरीके से नेटवर्क का विस्तार कई राज्यों में हुआ।

Mahadev App: हवाला और बैंक खातों के जरिए पैसों का लेन-देन

जांच एजेंसियों का आरोप है कि सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम को छिपाने के लिए बड़ी संख्या में बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। इन खातों में रकम जमा कर उसे कई लेन-देन के जरिए आगे भेजा जाता था। इसके बाद हवाला नेटवर्क के माध्यम से पैसा विदेशों तक पहुंचाया जाता था। CBI के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों ने सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर संरक्षण राशि भी दी, ताकि अवैध कारोबार बिना रुकावट चलता रहे।

दुबई की 200 करोड़ रुपये की शादी से चर्चा में आया नाम

सौरभ चंद्राकर वर्ष 2023 में दुबई में हुई अपनी भव्य शादी के बाद सुर्खियों में आया। ED की जांच में इस शादी पर लगभग 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए जाने का दावा किया गया। परिवार के सदस्यों को निजी विमानों से दुबई ले जाने और समारोह में मनोरंजन जगत की हस्तियों को बुलाने की खबरें सामने आई थीं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि शादी के आयोजन में भी हवाला के जरिए भुगतान किया गया था। मार्च 2026 में ED ने इस मामले में दुबई और दिल्ली स्थित करीब 1,700 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कीं।

Mahadev App: ओमान से भारत वापसी, अब आगे क्या होगा?

CBI के मुताबिक, इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने सौरभ को हिरासत में लिया था। इसके बाद भारत की जांच एजेंसियों ने उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा। 1 नवंबर को CBI की टीम उसे भारत लेकर आई। वह CBI के दो मामलों में दाखिल आरोपपत्रों और ED के एक मामले में आरोपी है। अब मेडिकल जांच और ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया के बाद उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाना है। जांच एजेंसियां उससे नेटवर्क के संचालन, पैसों के लेन-देन और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में पूछताछ करेंगी। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।

 

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