Up Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच बिहार की सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने भी उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार की कवायद शुरू कर दी है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 1 नवंबर को वाराणसी में पार्टी के राज्य स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से 2027 के चुनाव की तैयारी में जुटने और गांव से लेकर बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की अपील की। पार्टी बिहार में नीतीश कुमार के शासन और विकास कार्यों को यूपी में अपने राजनीतिक अभियान का आधार बनाना चाहती है।
वाराणसी से JDU ने शुरू किया चुनावी अभियान
JDU ने उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को गति देने के लिए वाराणसी के करौता स्थित रामलीला मैदान में राज्य स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया। इसमें निशांत कुमार के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और जमा खान सहित कई नेता मौजूद रहे। सम्मेलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। पार्टी का उद्देश्य पूर्वांचल से संगठन को मजबूत करते हुए प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना है।
Up Politics: नीतीश कुमार के विकास मॉडल को बनाएंगे मुद्दा
निशांत कुमार ने अपने संबोधन में बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, महिला सशक्तिकरण और रोजगार के क्षेत्र में हुए कामों को सामने रखा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि इन उपलब्धियों और सुशासन के संदेश को उत्तर प्रदेश के लोगों तक पहुंचाया जाए। पार्टी सामाजिक न्याय और विकास को अपने राजनीतिक अभियान के प्रमुख मुद्दों के रूप में पेश करने की तैयारी में है।
NDA के साथ चुनाव लड़ने की इच्छा
निशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि JDU वर्ष 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव NDA के घटक दल के रूप में लड़ने का प्रयास करेगी। हालांकि, गठबंधन में पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी और किन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे जाएंगे, इस पर अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। सीटों का बंटवारा भाजपा और NDA के दूसरे सहयोगी दलों के साथ बातचीत के बाद ही तय होने की संभावना है।
Up Politics: गांव, पंचायत और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की तैयारी
निशांत कुमार ने कार्यकर्ताओं को केवल चुनाव के समय सक्रिय रहने के बजाय लगातार जनता के बीच जाने की सलाह दी। उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनने, उनसे संवाद करने और समाधान की दिशा में काम करने पर जोर दिया। पार्टी की योजना गांव, पंचायत और बूथ स्तर तक संगठन का विस्तार करने की है। इसके लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और नियमित बैठकें आयोजित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
पूर्वांचल और सामाजिक समीकरणों पर नजर
वाराणसी से अभियान की शुरुआत को पूर्वांचल में JDU की राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस क्षेत्र में पिछड़े वर्गों और कुर्मी समुदाय का प्रभाव कई विधानसभा सीटों पर महत्वपूर्ण माना जाता है। पार्टी की रणनीति इन सामाजिक समूहों के साथ-साथ दूसरे वर्गों तक भी पहुंच बनाने की है। हालांकि, अभी तक पार्टी ने सीटवार उम्मीदवारों या किसी खास जातीय समीकरण को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
Up Politics: क्या यूपी में अपनी अलग पहचान बना पाएगी JDU?
JDU के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश में अपना मजबूत संगठन और जनाधार तैयार करने की है। बिहार में पार्टी की राजनीतिक पहचान नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके शासन मॉडल से जुड़ी रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य अलग है। यहां भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस जैसे दल पहले से सक्रिय हैं। निशांत कुमार ने संकेत दिया है कि वह उत्तर प्रदेश का दौरा जारी रखेंगे। अब पार्टी की आगे की रणनीति, NDA के साथ सीटों का तालमेल और संगठन विस्तार यह तय करेंगे कि 2027 के चुनाव में JDU कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाती है।
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