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Flop रही राहुल गांधी की दिल्ली चलो रैली, भीड़ दिखाने के लिए बच्चों के हाथों में झंडा थमा लाई सपा पार्टी

Flop राहुल गांधी की दिल्ली चलो रैली
Flop राहुल गांधी की दिल्ली चलो रैली

Ramlila Maidan: राजधानी दिल्ली में कल आयोजित राहुल गांधी की रैली एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) समेत विपक्ष के अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े समर्थकों और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी दिखाई दी। इस दौरान कुछ बच्चों के हाथों में समाजवादी पार्टी के झंडे नजर आने के बाद राजनीतिक कार्यक्रमों में बच्चों की भागीदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

रैली में कार्यकर्ता ज्यादा लोग कम

रैली में जहां विपक्षी दलों के नेता और समर्थक एकजुट होकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाते नजर आए, वहीं बच्चों की मौजूदगी ने एक अलग बहस को जन्म दे दिया। सवाल यह है कि आखिर बच्चों को राजनीतिक रैलियों में शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या राजनीतिक दलों को अपने कार्यक्रमों में बच्चों की भागीदारी को लेकर अतिरिक्त सावधानी नहीं बरतनी चाहिए?

दरअसल, राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से वोटर लिस्ट, वोट कटने और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों को लगातार उठाया जा रहा है। ऐसे में रैली में दिखाई दिए बच्चों को लेकर भी सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर जिन बच्चों के हाथों में राजनीतिक दलों के झंडे दिखाई दे रहे हैं, उनका वोटर लिस्ट से जुड़े विवादों से क्या संबंध है? हालांकि, बच्चों की उम्र और उनकी भागीदारी की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

Ramlila Maidan: विपक्षी ने दिया एकजुटता का संदेश

इस रैली में कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के समर्थकों की मौजूदगी ने विपक्षी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। अलग-अलग राजनीतिक दलों के झंडे और समर्थकों की भीड़ के बीच बच्चों के हाथों में सपा के झंडे दिखाई देना भी चर्चा का विषय बन गया।

लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने, रैली करने और जनता के बीच अपनी नीतियों को पहुंचाने का अधिकार है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक गतिविधियों में बच्चों की भूमिका क्या होनी चाहिए? बच्चों की प्राथमिकता शिक्षा, खेल और बेहतर भविष्य होना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनना।

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