Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में वित्त मंत्रालय को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की दावेदारी एक बार फिर तेज हो गई है। सोमवार को पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और वित्त मंत्रालय वापस देने की मांग उठाई। लेकिन इस बैठक में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार तथा सांसद पार्थ पवार की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर NCP को वित्त मंत्रालय वापस क्यों चाहिए? अजित पवार के निधन के बाद विभाग का समीकरण कैसे बदला और सुनेत्रा पवार इस बैठक में क्यों शामिल नहीं हुईं? समझिए महाराष्ट्र की सियासत का पूरा मामला।
NCP के नेता ने अमित शाह से की मुलाकात
महाराष्ट्र में बीजेपी, शिवसेना और NCP की महायुति सरकार के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर एक बार फिर हलचल दिखाई दे रही है। इस बार मामला वित्त मंत्रालय से जुड़ा है। अजित पवार के निधन के बाद यह विभाग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है। NCP अब इसे दोबारा अपने हिस्से में लेने की कोशिश कर रही है। अमित शाह से मुलाकात करने वाले छह नेताओं में पार्टी के कई बड़े चेहरे शामिल थे। हालांकि, सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की अनुपस्थिति ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया है।
Maharashtra Politics: सवाल-1: अमित शाह से NCP के छह नेताओं ने मुलाकात क्यों की?
सोमवार को NCP के छह वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ, छगन भुजबल और दिलीप वलसे पाटिल शामिल थे।
बैठक में महाराष्ट्र सरकार का वित्त मंत्रालय NCP को वापस देने की मांग उठाई गई। पार्टी का तर्क है कि महायुति सरकार में पहले यह विभाग उसके पास था और अजित पवार वित्त मंत्री के रूप में इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस मुलाकात को NCP की ओर से अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक हिस्सेदारी मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सवाल-2: अजित पवार के निधन के बाद वित्त मंत्रालय का समीकरण कैसे बदला?
महाराष्ट्र की महायुति सरकार में वित्त मंत्रालय पहले अजित पवार के पास था। वे उपमुख्यमंत्री के साथ वित्त मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। 28 जनवरी 2026 को विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्त मंत्रालय अपने पास रख लिया। बाद में सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन वित्त विभाग उन्हें नहीं सौंपा गया। यहीं से NCP की ओर से वित्त मंत्रालय वापस पाने की कोशिशें तेज हुईं। पार्टी के लिए यह विभाग केवल एक मंत्रालय नहीं, बल्कि सरकार में उसकी राजनीतिक और प्रशासनिक भूमिका से भी जुड़ा है।
Maharashtra Politics: सवाल-3: NCP वित्त मंत्रालय वापस क्यों चाहती है?
वित्त मंत्रालय किसी भी राज्य सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक होता है। राज्य का बजट तैयार करने, सरकारी खर्च की योजना बनाने, विभागों को धन आवंटित करने और आर्थिक फैसलों में इसकी अहम भूमिका होती है। NCP पहले इस विभाग को संभाल चुकी है। अजित पवार के पास वित्त मंत्रालय रहने के दौरान पार्टी को सरकार के अहम आर्थिक फैसलों में प्रभावशाली भूमिका मिली हुई थी। अब पार्टी चाहती है कि यह विभाग फिर उसके पास आए। इससे सरकार में उसकी प्रशासनिक भागीदारी और राजनीतिक प्रभाव दोनों मजबूत हो सकते हैं। हालांकि, वित्त मंत्रालय देने या नहीं देने का अंतिम फैसला मुख्यमंत्री और महायुति गठबंधन के नेतृत्व को करना है।
सवाल-4: सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार बैठक में क्यों नहीं पहुंचे?
अमित शाह से हुई इस मुलाकात की सबसे ज्यादा चर्चा सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी को लेकर है। सुनेत्रा पवार फिलहाल NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री हैं। इससे पहले वे खुद वित्त मंत्रालय वापस देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर चुकी हैं। ऐसे में पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं का उनके बिना दिल्ली जाकर अमित शाह से मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। पार्थ पवार भी इस बैठक में शामिल नहीं हुए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दोनों की अनुपस्थिति की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए इसे पार्टी के भीतर मतभेद या किसी गुटबाजी का पक्का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन इस घटनाक्रम ने NCP की रणनीति और नेतृत्व के बीच समन्वय को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं।

Maharashtra Politics: सवाल-5: क्या NCP पहले भी वित्त मंत्रालय की मांग उठा चुकी है?
हां, यह मांग अचानक सामने नहीं आई है। सितंबर में NCP की कोर कमेटी की बैठक में भी वित्त मंत्रालय का मुद्दा उठाया गया था। उस समय वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने पर सहमति बनी थी। इसके बाद अक्टूबर में सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में NCP नेताओं ने मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात कर वित्त मंत्रालय वापस देने की मांग रखी थी। अब छह वरिष्ठ नेताओं की अमित शाह से मुलाकात को इसी कोशिश का अगला कदम माना जा रहा है। पार्टी केंद्र में बीजेपी नेतृत्व के सामने अपनी मांग रख रही है, ताकि महाराष्ट्र सरकार में विभागों के बंटवारे पर दोबारा विचार हो सके।
सवाल-6: मुंबई में होने वाली कोर कमेटी की बैठक क्यों अहम है?
दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात के बाद सोमवार शाम चार बजे मुंबई में NCP की कोर कमेटी की बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक अजित पवार के आवास देवगिरी में होनी है। इसमें पार्टी के संगठन, हाल के चुनावी नतीजों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। वित्त मंत्रालय की मांग पर दिल्ली में हुई बातचीत के बाद यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें पार्टी के अगले कदम को लेकर विचार-विमर्श हो सकता है। हाल ही में महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में NCP उम्मीदवार सतीश चव्हाण को छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी में गुटबाजी की अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि चुनाव में हार के बाद आत्ममंथन जरूरी है।
सवाल-7: वित्त मंत्रालय को लेकर महायुति में क्या बदल सकता है?
महाराष्ट्र में बीजेपी, शिवसेना और NCP तीनों दलों की सरकार है। ऐसे गठबंधन में मंत्रालयों का बंटवारा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन का भी हिस्सा होता है। अगर वित्त मंत्रालय NCP को वापस मिलता है तो सरकार में पार्टी की भूमिका मजबूत हो सकती है। वहीं, अगर यह विभाग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास ही रहता है तो NCP को अपनी मांग पर आगे की रणनीति तय करनी होगी। इस फैसले का असर गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन पर भी पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बीजेपी नेतृत्व इस मांग पर क्या फैसला करेगा।
सुनेत्रा की गैरमौजूदगी से ज्यादा अहम वित्त मंत्रालय का सवाल
अमित शाह से NCP के छह वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में वित्त मंत्रालय को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। अजित पवार के निधन के बाद बदले सत्ता समीकरण में NCP अपनी पुरानी प्रशासनिक भूमिका वापस पाना चाहती है। सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी ने जरूर राजनीतिक अटकलों को हवा दी है, लेकिन इसे पार्टी में मतभेद का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बीजेपी नेतृत्व वित्त मंत्रालय की मांग पर क्या फैसला लेता है और मुंबई की कोर कमेटी बैठक में NCP अपनी आगे की रणनीति क्या तय करती है।








