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दिल्ली में एसआईआर के विरोध में पहुंचे प्रदर्शनकारी, कई को नहीं थी मुद्दे की पूरी जानकारी

दिल्ली में एसआईआर विरोध, प्रदर्शनकारियों से सवाल
दिल्ली में एसआईआर विरोध, प्रदर्शनकारियों से सवाल

Delhi Protest: दिल्ली के राजीव चौक में कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित वोट चोरी के विरोध में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में अलग-अलग राज्यों से आए कई लोग शामिल हुए। किसी ने संविधान बचाने की बात कही तो किसी ने लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा को प्रदर्शन का कारण बताया। हालांकि, जब कुछ प्रदर्शनकारियों से एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बारे में सवाल किए गए, तो कई लोग इन दोनों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए। कुछ लोगों ने वोट चोरी का आरोप तो लगाया, लेकिन इसके पीछे के कारण और सबूतों को लेकर भी उनके जवाब स्पष्ट नहीं थे। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर खबर इंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों से सवाल किए और उनके विचार जानने की कोशिश की।

Delhi Protest: SIR के विरोध में दिल्ली पहुंचे अलग-अलग राज्यों के लोग

खबर इंडिया के पत्रकार ने प्रदर्शन में शामिल लोगों से उनके आने का कारण पूछा। इस दौरान उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और नोएडा के अलावा असम से आए लोग भी मिले। कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे देश और संविधान को बचाने के लिए यहां पहुंचे हैं। कुछ लोगों का दावा था कि देश में वोट चोरी हुई है और इसी वजह से वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि एसआईआर क्या है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कौन हैं, तो कई लोग इसका जवाब नहीं दे सके। कुछ ने कहा कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है, जबकि कुछ ने सवालों को टालते हुए कहा कि उन्हें बस प्रदर्शन में शामिल होना है।

वोट चोरी का आरोप, लेकिन सबूतों पर स्पष्ट जवाब नहीं

नोएडा से आए मुस्तकीम नाम के एक व्यक्ति ने कहा कि वह देश को बचाने के लिए प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। जब उनसे पूछा गया कि वोट चोरी किसने की है और इसका क्या सबूत है, तो वह स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने कहा कि पूरे देश में वोट चोरी हुई है, लेकिन ज्ञानेश कुमार के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वह कौन हैं।उन्होंने बताया कि वह अपनी मर्जी से प्रदर्शन में आए हैं और उन्हें किसी ने पैसे देकर नहीं बुलाया। जब उनसे एसआईआर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन वह अपना अधिकार लेने आए हैं।

Delhi Protest: असम से आए प्रदर्शनकारी को भी नहीं थी SIR की जानकारी

प्रदर्शन में असम से आए एक व्यक्ति से भी पत्रकार ने सवाल किए। उन्होंने बताया कि वह संविधान बचाने के लिए दिल्ली आए हैं। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि एसआईआर क्या है और ज्ञानेश कुमार कौन हैं, तो वह इसका जवाब नहीं दे पाए।वोट चोरी के बारे में पूछने पर उन्होंने इसे ईवीएम से जुड़ा मामला बताया। इस पर पत्रकार ने उनसे पूछा कि जब उन्हें एसआईआर और कथित वोट चोरी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है, तो वह किस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रदर्शन में हॉर्न, मास्क और अलग-अलग अंदाज

राजीव चौक पर प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग हाथों में हॉर्न लिए नजर आए। पत्रकार ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि विरोध प्रदर्शन में हॉर्न का क्या काम है और क्या यह दशहरे पर रावण दहन जैसा माहौल बनाने की कोशिश है।एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे सरकार और भारतीय जनता पार्टी को जगाने के लिए हॉर्न बजा रहे हैं। उनके मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल युवा बेरोजगारी समेत कई मुद्दों को लेकर नाराज हैं और सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचना चाहते हैं।वहीं, एक व्यक्ति बैटमैन का मास्क पहनकर प्रदर्शन में पहुंचा था। उससे मास्क पहनने का कारण पूछा गया तो उसने कहा कि देश को अभी बैटमैन की जरूरत है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने मास्क लगाने को लेकर कहा कि जिस तरह ज्ञानेश कुमार अपना चेहरा छिपा रहे हैं, उसी तरह वे भी अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

Delhi Protest: उत्तर प्रदेश से आए हसीब अहमद ने सरकार पर लगाए आरोप

प्रयागराज से आए हसीब अहमद ने उत्तर प्रदेश में एसआईआर को लेकर विरोध प्रदर्शन नहीं होने के सवाल पर अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में करीब 3 करोड़ मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया है। उनके अनुसार, यह मुद्दा अब बड़ा रूप ले चुका है और मतदाता आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से हटाकर इंडिया गठबंधन की सरकार वापस लाएंगे।उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मतदाता सूची में छूटे हुए नामों को दोबारा जोड़ने और पुनरीक्षण कराने की बात कही जा रही है, लेकिन पिछले 9 वर्षों में सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए हैं।

हसीब अहमद ने प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई के बाद गरीबों को घर दिए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। इस पर पत्रकार ने अपने प्रयागराज दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि वहां एक महिला से मुलाकात हुई थी, जो अपना घर मिलने की बात बताते हुए भावुक हो गई थी।इसके जवाब में हसीब अहमद ने युवाओं से किए गए रोजगार के वादों का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही गई थी, लेकिन अब युवाओं के सामने रोजगार की जगह दूसरी समस्याएं हैं।

राहुल गांधी के नेतृत्व में दूसरी आजादी की लड़ाई का दावा

हसीब अहमद ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई के समय लोगों का उद्देश्य अंग्रेजों से देश को मुक्त कराना था। उस समय धर्म और जाति से ऊपर उठकर लोग आजादी के लिए एकजुट हुए थे। उन्होंने दावा किया कि अब राहुल गांधी के नेतृत्व में देश में दूसरी आजादी की लड़ाई लड़ने की जरूरत है।उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और शोषित वर्गों के साथ भेदभाव हुआ है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, हरियाणा, पंजाब और गुजरात में भी पिछड़ी जातियों के लोगों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

उन्होंने मतदाता सूची के मुद्दे पर कहा कि पहले मतदाता अपनी पसंद से सरकार चुनते थे, लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि सरकार यह तय करने का काम कर रही है कि किसे मतदाता बने रहने का अधिकार मिलेगा।हालांकि, पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि जब वह एसआईआर को लेकर इतने गंभीर हैं, तो उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं कर रहे हैं। इस पर हसीब अहमद ने कहा कि वह जिस दिन प्रयागराज में एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे, उस दिन खबर इंडिया की टीम को वहां मौजूद पाएंगे।

Delhi Protest: आम मतदाता ही तय करेगा किसका पक्ष सही है

प्रदर्शन के दौरान पत्रकार और हसीब अहमद के बीच इस बात को लेकर भी सवाल-जवाब हुए कि क्या प्रदर्शन में आम जनता शामिल है या राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता ही अधिक नजर आ रहे हैं।पत्रकार ने कहा कि उन्हें अब तक प्रदर्शन में आम जनता से जुड़े ऐसे लोग नहीं मिले, जिन्हें एसआईआर की पूरी जानकारी हो। इस पर हसीब अहमद ने आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी को भी यह प्रमाणपत्र देने का अधिकार नहीं है कि कौन आम मतदाता है और कौन नहीं। इसका फैसला आम मतदाता ही करेगा।उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस से जुड़े होने से पहले वह इस देश के मतदाता हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।

आलम ने बताई प्रदर्शन में शामिल होने की वजह

प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के गढ़ गंगा के पास स्थित गांव से आए आलम नाम के एक व्यक्ति भी मिले। उन्होंने अपने गांव का नाम वट बताया और कहा कि उनका नाम आलम है। वह पेशे से कार मैकेनिक हैं।आलम अपने हाथ में तिरंगा लेकर प्रदर्शन में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि तिरंगा देश की शान और पहचान है। उनके मुताबिक, वह देश में एकता का संदेश देने के लिए यहां आए हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी को मिलकर रहना चाहिए।जब उनसे एसआईआर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्हें यह भी नहीं पता था कि ज्ञानेश कुमार कौन हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें इतना जरूर पता है कि देश में हिंदू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद के मुद्दों पर लोगों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं।

Delhi Protest: किसान, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर उठाए सवाल

आलम ने कहा कि सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, उसे किसानों, स्कूलों और आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, देश में लोगों को धर्म के नाम पर बांटने के बजाय विकास से जुड़े मुद्दों पर काम होना चाहिए।उन्होंने कहा कि जब देश के लोग आपस में लड़ते रहेंगे, तो देश आगे नहीं बढ़ पाएगा। सरकार को यह समझना चाहिए कि आखिर युवा सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं। उनकी मांगों को समझकर समस्याओं का समाधान करना चाहिए, ताकि लोगों को विरोध प्रदर्शन करने की जरूरत न पड़े।

आलम ने भगत सिंह की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनी हुई थी। इस पर उन्होंने कहा कि भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए फांसी का फंदा चूमा था, ताकि भारत आजाद हो सके। उनका उद्देश्य यह नहीं था कि आजादी मिलने के बाद देश के लोग आपस में धर्म और जाति के नाम पर लड़ते रहें।उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सभी लोगों को एकजुट रहना होगा। जब देश पुकारेगा, तो वे देश के लिए जरूर आएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

प्रदर्शन में एकता का संदेश और मुद्दों की जानकारी पर सवाल

खबर इंडिया की इस ग्राउंड रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग विचार सामने आए। कुछ लोगों ने एसआईआर, कथित वोट चोरी और मताधिकार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की, जबकि कुछ ने बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, शिक्षा और सामाजिक एकता जैसे मुद्दों को उठाया।वहीं, कई प्रदर्शनकारियों को एसआईआर की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बारे में जानकारी नहीं थी। कुछ लोगों ने अपनी जानकारी सीमित होने की बात स्वीकार की, लेकिन देश और संविधान के लिए प्रदर्शन में शामिल होने को जरूरी बताया।