Ramlila Maidan Rally: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्षी गठबंधन इस रैली को अपनी एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन बता रहा है, जबकि बीजेपी खाली कुर्सियों और मैदान के वीडियो साझा कर इसे फ्लॉप साबित करने में जुटी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विपक्ष अपनी रैली के जरिए जनता तक कोई बड़ा राजनीतिक संदेश पहुंचाने में कामयाब रहा? यह रैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग को लेकर आयोजित की गई थी। रैली से पहले कांग्रेस ने इसमें 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया था, लेकिन आयोजन के बाद भीड़ की संख्या को लेकर ही राजनीतिक बहस शुरू हो गई।
Ramlila Maidan Rally: 10 लाख लोगों के जुटने का दावा कितना सच साबित हुआ?
रैली से करीब एक सप्ताह पहले कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दावा किया था कि रामलीला मैदान में 10 लाख लोग जुटेंगे। हालांकि, रैली के दिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और वाम दलों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे, लेकिन उपलब्ध आकलन के मुताबिक भीड़ शुरुआती दावे के 10 प्रतिशत यानी एक लाख से भी कम रही। दूसरी तरफ, रैली के बाद केसी वेणुगोपाल ने फिर 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया। बीजेपी ने राहुल गांधी के भाषण के दौरान मैदान के पीछे के हिस्से में खाली जगह और कुर्सियों के वीडियो साझा किए। इसके बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच रैली की सफलता को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।
Ramlila Maidan Rally: राहुल गांधी के मार्च ने बदली रैली की तस्वीर?
रैली में खाली जगह दिखाई देने के पीछे एक बड़ी वजह राहुल गांधी का मार्च भी बताया जा रहा है। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक करीब दो किलोमीटर का मार्च निकालने का ऐलान किया था। उन्होंने लोगों से इसमें शामिल होने की अपील भी की थी। इसके बाद बड़ी संख्या में समर्थक मिंटो रोड पर मार्च में शामिल होने के लिए पहुंच गए। भीड़ इतनी अधिक थी कि राहुल गांधी खुद पैदल मार्च नहीं कर पाए। वह INDIA गठबंधन के अन्य बड़े नेताओं के साथ खुली बस में बैठकर रामलीला मैदान पहुंचे। हालांकि, गठबंधन के बड़े नेता VIP गेट से मंच तक पहुंच गए, लेकिन उनके साथ मार्च में शामिल हुई भीड़ का बड़ा हिस्सा मैदान के बाहर ही रह गया। इसी वजह से नेताओं के भाषण के दौरान रामलीला मैदान के पीछे का हिस्सा खाली दिखाई दिया।
बारिश और कीचड़ ने भी डाली रैली में बाधा
रैली में खाली कुर्सियां दिखाई देने की दूसरी वजह मौसम भी रहा। गुरुवार और शुक्रवार को हुई बारिश के कारण रामलीला मैदान में कई जगह पानी और कीचड़ जमा हो गया था। ऐसे में लोगों ने कीचड़ के बीच रखी कुर्सियों पर बैठने से परहेज किया। रैली के बाद कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी माना कि मार्च की वजह से मैदान में भीड़ कम दिखाई दी। हालांकि, पार्टी के एक वर्ग का मानना था कि मार्च ने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरी। सोशल मीडिया पर भी मार्च की तस्वीरें और वीडियो काफी वायरल हुए।
बड़े नेताओं को भाषण का मौका नहीं मिलना भी बना चर्चा का विषय
रैली के आयोजन और मंच संचालन को लेकर भी कांग्रेस के अंदर सवाल उठे। सुबह करीब 10 बजे से लोग मैदान में जुटने लगे थे, लेकिन मंच पर भाषण लगभग एक बजे शुरू हुए। शुरुआत में सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और प्रशांत भूषण ने अपनी बात रखी। इसके बाद उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों ने भाषण दिए। हालांकि, ये भाषण मैदान में मौजूद भीड़ को लंबे समय तक रोकने में सफल नहीं रहे। कांग्रेस के एक सांसद ने भी इस बात पर हैरानी जताई कि प्रियंका गांधी, सचिन पायलट और कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मंच से बोलने का मौका नहीं मिला। इसके अलावा दीपेंद्र हुड्डा और इमरान प्रतापगढ़ी जैसे नेताओं को भी भाषण देने का अवसर नहीं मिला। कई बड़े नेता मुख्य मंच के बगल में बने दूसरे मंच पर दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक इंतजार करते रहे।
राहुल गांधी के भाषण में क्या रहा खास?
करीब डेढ़ घंटे में दो किलोमीटर का मार्च पूरा करने के बाद INDIA गठबंधन के प्रमुख नेता दोपहर करीब 3 बजे मंच पर पहुंचे। इसके बाद दीपांकर भट्टाचार्य, एमए बेबी, तेजस्वी यादव, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं ने संबोधित किया। अंत में शाम करीब 4 बजे राहुल गांधी ने भाषण दिया। अपने लगभग 20 मिनट के संबोधन में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को न केवल पद से हटाया जाएगा, बल्कि उन्हें जेल भी जाना होगा। उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत देशभर में कथित तौर पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, उनके भाषण में पहले उठाए जा चुके मुद्दे ही प्रमुखता से दिखाई दिए और कोई नया राजनीतिक मुद्दा सामने नहीं आया।
प्रियंका गांधी का भाषण नहीं सुन पाने से कार्यकर्ता निराश
रैली में प्रियंका गांधी का भाषण नहीं होने से उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं में निराशा दिखाई दी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एक जिला अध्यक्ष ने प्रियंका गांधी को नहीं सुन पाने पर निराशा जताई। उन्होंने राहुल गांधी के भाषण को प्रभावशाली बताया, लेकिन उनका मानना था कि राहुल गांधी को थोड़ा और समय तक अपनी बात रखनी चाहिए थी। वहीं, रैली में वामपंथी छात्र संगठन आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को मिली अहमियत भी कांग्रेस के कुछ युवा और पुराने कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बनी। यूथ कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने इस पर नाराजगी जताई।
INDIA गठबंधन के सामने अब आगे की क्या चुनौती?
कुल मिलाकर रामलीला मैदान की रैली में INDIA गठबंधन ने अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ को लेकर किए गए बड़े दावे, मार्च का असर और मंच संचालन की रणनीति जैसी वजहों से विपक्ष को अपेक्षित राजनीतिक संदेश देने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे को आगे भी उठाने की तैयारी में है। ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर साल के अंत से पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में चार और बड़ी रैलियां आयोजित करने की योजना है। इसके अलावा 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर दिल्ली में एक और प्रदर्शन प्रस्तावित है। संसद के शीतकालीन सत्र में भी विपक्ष इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है। ऐसे में रामलीला मैदान की रैली भले ही भीड़ और आयोजन को लेकर विवादों में रही हो, लेकिन INDIA गठबंधन ने साफ कर दिया है कि वह चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को फिलहाल छोड़ने के मूड में नहीं है।
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