UP Politics: उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भले ही अभी समय है, लेकिन सियासी हलचल पहले से ही तेज़ हो चुकी है। सूबे की सत्ता पर लगातार दो बार काबिज़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीसरी बार कमल खिलाने और जीत की हैट्रिक पूरी करने के लिए अपनी तैयारियों का बिगुल बजा दिया है। जिसके चलते अब नेताओं के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। इसी कड़ी में मुरादाबाद जनपद में समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा और एआईएमआईएम नेता वकी रशीद के बीच हुई सियासी बयानबाजी ने राजनीति के चर्चा के बाजार को गर्म कर दिया है। दरअसल, इस मामले की शुरुआत असदुद्दीन ओवैसी को लेकर हुई। जहां रुचि वीरा ने ओवैसी पर एनडीए की मदद करने और विपक्षी वोट काटने का आरोप लगाया। वहीं, वकी रशीद ने पलटवार करते हुए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर मुसलमानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और 2027 के चुनाव को लेकर बड़ा दावा कर दिया।
ओवैसी पर रुचि वीरा का वार
मुरादाबाद में पत्रकारों से बातचीत में सांसद रुचि वीरा ने कहा कि यह बात सबको मालूम है कि असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी बिहार में वोट काटने का काम कर रहे हैं। ओवैसी की पार्टी एनडीए की मदद कर रही है। वोट काटने की बात सबको मालूम है। ‘इंडिया’ गठबंधन तय करेगा कि कौन उपमुख्यमंत्री बनेगा, आखिर ओवैसी जी इसको लेकर क्यों परेशान हैं?
UP Politics: ओवैसी के बचाव में एआईएमआईएम नेता का पलटवार
वहीं ओवैसी के बचाव में सामने आए एआईएमआईएम नेता वकी रशीद ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि जब लोकसभा चुनाव हुए थे, तब ओवैसी साहब और उनकी पार्टी ने कई जगह चुनाव नहीं लड़ा था। आखिर उस वक्त किसको फायदा हुआ था? अगर मुरादाबाद में ओवैसी टिकट दे देते, तो क्या होता? फिर सब रो रहे होते—‘मम्मी मम्मी, हमारी चॉकलेट छीन ली। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग कहते हैं कि ओवैसी वोट काटते हैं, उनसे पूछिए अखिलेश यादव कर्नाटक और मध्य प्रदेश में क्या करने गए थे? क्या वोट काटने के लिए ही गए थे? 2027 में उत्तर प्रदेश के मुसलमान बता देंगे कि असली वोट-कटवा कौन है।
विपक्षी खेमे में मची हलचल
आगे अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए वकी रशीद ने कहा कि अगर अखिलेश यादव ने मुसलमान उपमुख्यमंत्री का नाम घोषित नहीं किया, तो वे मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। बीजेपी की सरकारों में यादव मुख्यमंत्री हैं, लेकिन अखिलेश यादव कभी उनके खिलाफ नहीं बोलते। समाजवादी पार्टी मुसलमानों को बरगलाने का काम करती है वह नहीं चाहती कि मुसलमान लीडरशिप खड़ी हो। याद रख लीजिए, 2027 में अगर मुसलमान उपमुख्यमंत्री नहीं बना, तो अखिलेश यादव मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। मुरादाबाद की यह सियासी जंग अब विपक्षी खेमे में हलचल मचा रही है और आने वाले दिनों में इसका असर प्रदेश की राजनीति में देखने को मिल सकता है।






