Saharanpur News: पश्चिमी यूपी एक बार फिर खुफिया एजेंसियों के फोकस में आ गया है। सहारनपुर से गिरफ्तार किए गए डॉक्टर अदील के मोबाइल से मिले संपर्कों ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अदील बीते कई महीनों से एक नए स्लीपर सेल नेटवर्क को खामोशी से खड़ा कर रहा था। यही वजह है कि मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़ और रुड़की में पिछले कुछ दिनों से लगातार खुफिया अधिकारियों की मूवमेंट देखी जा रही है। STF, IB और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से इलाके की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
दिल्ली–NCR और वेस्ट यूपी: बार-बार बेनकाब हुए नेटवर्क
खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली–NCR और पश्चिमी यूपी कई बार ISI समर्थित नेटवर्क के निशाने पर रहे हैं। पिछले एक दशक में मेरठ, कैराना, मुजफ्फरनगर और रुड़की से कई एजेंट और संदिग्ध पकड़े जा चुके हैं। यह पूरा इलाका इसलिए संवेदनशील माना जाता है क्योंकि कट्टरपंथी तत्व मुस्लिम आबादी में आम नागरिकों की तरह रहते हैं। कई बार तो स्थानीय लोगों को यह पता भी नहीं चलता कि उनके बीच कौन स्लीपर सेल का हिस्सा है। बड़े खुलासे होने पर ही लोग हतप्रभ रह जाते हैं।
Saharanpur News: मेरठ का चर्चित केस: पाकिस्तानी कामिल की गिरफ्तारी आज भी मिसाल
करीब 12–13 वर्ष पहले मेरठ में एक बड़ी कार्रवाई हुई थी, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया था। कोतवाली क्षेत्र में फर्जी पहचान के साथ रह रहा पाकिस्तानी नागरिक कामिल पकड़ा गया था। कामिल ने स्थानीय महिला से शादी कर ली थी और अपनी असल पहचान छिपाने के लिए अपना एक अंगूठा तक कटवा दिया था। आर्मी इंटेलिजेंस की सूचना पर तत्कालीन डीआईजी प्रेम प्रकाश ने उसे गिरफ्तार कराया था। यह केस आज भी स्लीपर सेल के संचालन का क्लासिक उदाहरण माना जाता है।
रुड़की में भी बड़ी कार्रवाई, आईएसआई से जुड़े आरोपी गिरफ्तार
रुड़की से भी आईबी और आर्मी इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने असद, फुरकान सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में खुलासा हुआ था कि इनके तार सीधे पाकिस्तान की आईएसआई से जुड़े थे। यह गिरफ्तारी इस बात की पुष्टि करती है कि वेस्ट यूपी लंबे समय से आतंकी नेटवर्क की निगरानी और गतिविधियों के लिए उपयुक्त ग्राउंड माना जाता रहा है।
डॉक्टर अदील: साइलेंट मोड में सक्रिय था नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार डॉक्टर अदील कई मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर ‘चेन-कम्युनिकेशन’ सिस्टम चला रहा था। उसके संपर्क पश्चिमी यूपी के कई जिलों तक फैले हुए थे। वह गुप्त मुलाकातों के जरिए फील्ड एजेंटों के साथ संपर्क बनाए हुए था। खास बात यह कि उसके पूरे नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर किसी को भनक तक नहीं लगी—यही खुफिया एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता है।
Saharanpur News: खुफिया एजेंसियों का घेरा सख्त
अदील के मोबाइल डंप, संपर्कों और लोकेशन डेटा के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है, पश्चिमी यूपी के ‘हॉटस्पॉट ज़ोन’ तय कर लिए गए हैं, पुरानी गिरफ्तारी और नेटवर्क की फाइलें फिर से खंगाली जा रही हैं औरसंभावित नए मॉड्यूल्स की निगरानी बढ़ा दी गई है। एजेंसियों को आशंका है कि अदील अकेला नहीं, बल्कि एक बड़े री-एक्टिवेटेड मॉड्यूल का हिस्सा था। कई स्लीपर सेल फिर से सक्रिय हुए हैं, जिसके संकेत लगातार मिल रहे हैं।
Report By: मेरठ यश मित्तल






