ARMY NEWS: भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य के युद्ध केवल जमीन या समुद्र पर नहीं तय होंगे, बल्कि साइबर स्पेस, सूचना युद्ध, लॉजिस्टिक्स और समुद्री डोमिनेंस जैसे कई डोमेन्स के संयुक्त संचालन पर आधारित होंगे। पश्चिमी नौसैनिक कमान के दौरे पर उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं का तालमेल ही भारत की भविष्य की सामरिक बढ़त का असली आधार बनेगा।
सेना प्रमुख ने दिया बड़ा संदेश
कोचीन शिपयार्ड द्वारा निर्मित एंटी-सबमरीन वॉरफेयर जहाज आईएनएस माहे को नौसेना में शामिल किए जाने के दौरान सेना प्रमुख मुख्य अतिथि थे। युद्धपोत के औपचारिक इंडक्शन को उन्होंने केवल नौसेना की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती औद्योगिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया। उन्होंने ‘ब्रावो जुलू’ कहकर माहे की टीम को बधाई दी और कहा कि यह जहाज राष्ट्र के सामरिक भरोसे का नया संकेतक है एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो तटीय सुरक्षा से लेकर पनडुब्बी-रोधी अभियानों तक नेवी को नई ताकत देगा।
ARMY NEWS: स्वदेशी पर सेना प्रमुख का भरोसा
जनरल द्विवेदी ने यह भी बताया कि आज भारतीय नौसेना अपने 75% से ज्यादा कैपिटल प्लेटफॉर्म स्वदेशी स्रोतों से प्राप्त कर रही है। जहाज, पनडुब्बियां, सोनार और हथियार प्रणालियां सब भारतीय तकनीक और भारतीय शिपयार्ड्स की देन हैं। कोचीन शिपयार्ड की गुणवत्ता और समयबद्ध निर्माण को उन्होंने भारत की बढ़ती तकनीकी दक्षता का उदाहरण बताया।
ARMY NEWS: ऑपरेशन सिंदूर का किया उल्लेख
सेना प्रमुख ने विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख किया, जिसने तीनों सेनाओं के बीच सटीक तालमेल का वास्तविक प्रदर्शन किया था। लद्दाख से हिंद महासागर तक और सूचना युद्ध से लेकर संयुक्त लॉजिस्टिक्स तक भारत बहुस्तरीय मोर्चों पर एक साथ संचालन कर रहा है। उनके अनुसार, यही भविष्य की लड़ाइयों का ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ है।

अनुशासन ही असली शक्ति
ARMY NEWS: जहाज के क्रू को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जहाज की प्रतिष्ठा उसके उपकरणों या डिजाइन से नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले सैनिकों के चरित्र से तय होती है। उन्होंने जहाज के प्रतीक ‘उरुमी’ का जिक्र करते हुए क्रू को परंपरा, साहस और अनुशासन के साथ देशसेवा करने की प्रेरणा दी।






