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STOCK MARKET FROUD: कैसे दिल्ली पुलिस ने 1.6 करोड़ के हाई-टेक स्टॉक फ्रॉड नेटवर्क को धर दबोचा, तीन किए गिरफ्तार

STOCK MARKET FROUD : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जिस हाई-टेक निवेश ठगी का भंडाफोड़ किया है, उसकी शुरुआत एक साधारण सोशल मीडिया चैट से हुई थी। एक महिला को यूके-आधारित बताए गए ‘स्प्रेडेक्स ग्लोबल लिमिटेड’ नाम के फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश के लिए उकसाया गया। अचानक बढ़ते मुनाफे के ग्राफ और आकर्षक रिटर्न के झांसे में आकर पीड़िता ने 1.6 करोड़ रुपये लगा दिए। जैसे ही उसने पैसा निकालने की कोशिश की, उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया और यहीं से पुलिस की कार्रवाई शुरू हुई।

दिल्ली से महाराष्ट्र तक फैला जाल

जांच में पता चला कि पीड़िता का पैसा सीधे दो कंपनियों में ट्रांसफर हो रहा था। जीटीआर इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड और उद्यम विमेन एम्पावरमेंट फाउंडेशन। दोनों की जांच करने पर साइबर सेल के हाथ बड़ी जानकारी लगी इन कंपनियों के खिलाफ पहले से 58 शिकायतें दर्ज थीं, और 1.10 करोड़ रुपये की ठगी सामने आ चुकी थी। जीटीआर इलेक्ट्रॉनिक्स के नाम पर सिर्फ शकरपुर में एक किराये का ऑफिस था, जबकि दूसरी कंपनी महाराष्ट्र से फर्जी एनजीओ के नाम पर चलाई जा रही थी।

STOCK MARKET FROUD : तीन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी

क्राइम ब्रांच ने दिल्ली और ठाणे में एक साथ छापेमारी कर इस नेटवर्क का संचालन करने वाले तीन आरोपियों को पकड़ा। गिरफ्तार किए गए नाम— सुनील कुमार, डायरेक्टर, जीटीआर इलेक्ट्रॉनिक्स (आगरा),विशाल चौरे, संचालक, उद्यम विमेन एम्पावरमेंट फाउंडेशन (ठाणे) और  उसकी की पत्नी, सह-संचालक के पकड़े जाने पर सुनील कुमार ने माना कि कंपनी रजिस्ट्रेशन और ऑफिस सेटअप सिर्फ ठगी के पैसे को घुमाने और धोने के लिए किया गया था।

STOCK MARKET FROUD : फर्जी वेबसाइटें, डिजिटल मार्केटिंग से शिकार

डीसीपी (क्राइम) आदित्य गौतम के अनुसार यह फ्रॉड एक मल्टी-लेयर डिजिटल स्कैम था।आरोपी सोशल मीडिया पर निवेश सलाहकार बनकर बातचीत शुरू करते थे, फिर पीड़ित को असली दिखने वाली वेबसाइटों पर ले जाकर हाई-रिटर्न के लालच में फंसा लेते थे। फर्जी KYC डॉक्यूमेंट, कंपनी रजिस्ट्रेशन और कई बैंक अकाउंट्स इस नेटवर्क को वैध दिखाने का काम करते थे।

लैपटॉप, मोबाइल और बैंक खाते सीज, जांच जारी

क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और बैंक खातों को सीज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन फर्जी कंपनियों के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था और ठगे गए करोड़ों की रकम आखिर कहां भेजी गई।

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