Mp news: मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में चूहों की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। मरीजों के लिए यह गंभीर खतरा बन चुकी है। इंदौर के एमवायएच और जबलपुर मेडिकल कॉलेज के बाद अब जबलपुर जिला अस्पताल विक्टोरिया में भी चूहों के खुले आतंक की खबर सामने आई है। अस्थि वार्ड में भर्ती मरीजों के बेड और टिफिन के पास चूहे खुलेआम घूमते देखे गए। इसे लेकर अस्पताल प्रशासन का बयान विवादित और हास्यास्पद माना जा रहा है।
पूरा मामला क्या है?
शाहपुरा निवासी 10 वर्षीय मदन चौधरी हाथ के इलाज के लिए एक सप्ताह से अस्पताल में भर्ती हैं। ऑपरेशन के दो दिन बाद उन्हें आईसीयू से अस्थि वार्ड में स्थानांतरित किया गया। मदन के पिता मनोज चौधरी ने बताया कि वार्ड में चूहे खुलेआम घूम रहे थे और कई बार मरीज के ऊपर गिर भी गए। परेशान होकर उन्होंने रविवार रात करीब 3 बजे चूहों का वीडियो रिकॉर्ड किया।
Mp news: पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
जबलपुर के अस्पतालों में यह पहली घटना नहीं है। तीन महीने पहले नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में भर्ती दो मरीजों के पैर चूहों ने कुतर दिए थे। इसके पहले एमवाय अस्पताल, इंदौर के एनआईसीयू में तीन महीने पहले चूहों के काटने से दो नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी। इस घटना का संज्ञान मानव अधिकार आयोग ने लिया था।
Mp news: कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने उठाया मुद्दा
जबलपुर जिला अस्पताल में रातभर चूहों के आतंक से मरीज सो नहीं पाए। वायरल वीडियो ने अस्पताल की लापरवाही उजागर कर दी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर इस्तीफे की मांग की है।
सिविल सर्जन का विवादित बयान
Mp news: जबलपुर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन नवीन कोठारी ने इस गंभीर मामले पर ऐसा बयान दिया जिसे लोग हास्यास्पद बता रहे हैं। सिविल सर्जन का कहना है: अस्पताल में चल रहे किचन के निर्माण के दौरान पुरानी पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। विक्टोरिया अस्पताल डेढ़ सौ साल पुराना है, इसलिए चूहा, सांप और छिपकली “मूल निवासी” हैं। मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्टाफ बढ़ाया जा रहा है। मरीजों और उनके परिजनों से कहा गया है कि खाने की चीजें वार्ड में ना रखें। पेस्ट कंट्रोल किया जा रहा है, लेकिन ऐसी दवाइयां नहीं रखी जा सकती जो मरीजों के लिए हानिकारक हों। सिविल सर्जन का कहना है कि निर्माण और अस्पताल संचालन दोनों एक साथ चल रहे हैं, इसलिए समस्या आ रही है और इसे नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई जारी है।
यह भी पढ़ें: मध्य प्रदेश की ‘लाड़ली बहनों’ के लिए बड़ी राहत, ₹3000 मासिक लाभ का मौका खुलेगा







