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संसद लोकतंत्र से चले: हंगामे से नहीं

संसद लोकतंत्र से चले: हंगामे से नहीं

Parliament Winter Session: भारत ने सुरक्षा मजबूत करने और घुसपैठियों को रोकने के लिए पाकिस्तान और बांग्ला देश की सीमाओं पर बाड़ लगाई है, जिसमें पाकिस्तान से मिलने वाली सीमा 93 फीसदी और बांग्लादेश के साथ जुड़ी सीमा पर 79 फीसदी पर बाड़ लग चुकी है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2,289. 66 किलोमीटर लंबी पाकिस्तान-भारत की सीमा में से 2,135.136 पर बाड़ लगाई गयी है, जो कुल सीमा का 93.25 फीसद है। शेष भारत से जुड़ी 6.75 फीसद सीमा पर बाड़ लगानी बाकी है। बांग्ला देश से जुड़ी भारत की 4,096. 70 किलोमीटर लंबी सीमा में से 3,239.92 किलोमीटर पर बाड़ लगाई गई है। शेष 20.92 फीसद क्षेत्र में बाड़ लगानी बाकी है। भारत-म्यामार सीमा की कुल लंबाई 1,643 किलोमीटर है। अब तक इस सीमा पर 9. 214 फीसद किलोमीटर तक ही बाड़ लगी है।

सरकार का मानना है कि भारत-चीन सीमा पर कोई घुसपैठ नहीं हुई है। भारत सरकार ने संसद को सूचित किया कि 2014 से अब तक चीन की ओर से कोई घुसपैठ नहीं हुई है। जबकि इसी दौरान सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यामार, नेपाल और भूटान के साथ भारत की सीमाओं पर 23,926 घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। इसी वर्ष जनवरी से नवंबर 2025 तक इन सीमाओं से 3,120 घुसपैठिए गिरफ्तार किये गये हैं।
सरकार दावा करती है कि इस दौरान बांग्लादेश सीमा पर सबसे अधिक घुसपैठिए आये हैं। इसके बाद म्यामार, पाकिस्तान, नेपाल-भूटान की सीमाएं रहीं।

सरकार के दावे हैं कि सीमाएं सुरक्षित हैं, पर देखने में जो आ रहा है, वह सही नहीं हैं। पुलवामा पर हमला, लालकिले पर हमला देश की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह खड़े करते हैं। इसी लिए आपरेशन सिंदूर भारत ने किया। बड़े ऑपरेशन करने से पूर्व इंटेलिजेंस की दी हुई सूचनाओ पर पहले ही ध्यान देने की जरूरत है। घुसपैठिए कहां से आते हैं, कैसे देश के भीतर अड्डा जमाते हैं?

संक्षेप में कहने का अभिप्राय यही है कि इन सब मामलों में देश में विरोधी दलों को विश्वास में लेना होगा। यदि संसद के सदस्यों को देखें तो विरोधी दलों के सदस्य भी देश की काफी आबादी का प्रतिनिधित्व संसद में करते हैं। उनके पास भी देश की समस्याओं को सुलझाने की तरकीबें होंगी। इसलिए सरकार को अहम बल से दूर नहीं रहना चाहिए, वह देश के लिए खतरनाक होगा। विरोधियों के बिचारों को भी समझना चाहिए, वह भी देश को रचनात्मक रास्ता बता सकते हैं। लोकतंत्र के मंत्र को नहीं भूलना चाहिए- सबके विचार देश के साथ।

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