ED money laundering case: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई को 22 जनवरी, 2026 तक स्थगित कर दिया। यह मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 2008 के एक जमीन सौदे से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि आरोपितों को अपनी बात रखने का अवसर देना आवश्यक है, इसके बाद ही संज्ञान लिया जा सकता है।
ईडी ने वाड्रा पर लगाए गंभीर आरोप
ईडी ने वाड्रा और उनकी कंपनियों पर हरियाणा में 3.53 एकड़ जमीन के लेन-देन के माध्यम से अपराध की कमाई करने का आरोप लगाया है। एजेंसी ने दावा किया कि जमीन की खरीद में कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ, दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई और स्टांप शुल्क की चोरी की गई। जांच के अनुसार 58 करोड़ रुपए अपराध की कमाई मानी जा रही है, जबकि 38.69 करोड़ रुपए की 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है।
ED money laundering case: कंपनियों और अचल संपत्तियों का विवरण
ईडी के अनुसार, वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने फरवरी 2008 में ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज से शिकोहपुर में 3.5 एकड़ जमीन 7.50 करोड़ रुपए में खरीदी। आरोप है कि भुगतान कभी वास्तविक रूप से नहीं हुआ। इसके अलावा, वाड्रा की अन्य कंपनियों जैसे आर्टेक्स और स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े अचल संपत्तियों को भी मामले में शामिल किया गया है।
पीएमएलए के तहत सजा और पिछली जांच
ईडी ने पीएमएलए की धारा 4 के तहत अधिकतम सात साल की कैद और अटैच की गई संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। अक्टूबर 2012 में सीनियर आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने प्रक्रियागत अनियमितताओं के कारण शिकोहपुर जमीन डील रद्द कर दी थी। हालांकि बाद में एक सरकारी पैनल ने वाड्रा और डीएलएफ को क्लीन चिट दे दी थी।
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