Unnao Rape Case: कांग्रेस नेता अलका लांबा ने उन्नाव रेप केस मामले में उम्मीद जताई है कि पीड़िता को सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा। नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान अलका लांबा ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि मैं यहां आई हूं और मुझे कार से निकलने नहीं दिया जा रहा है। मैं पीड़िता को हिम्मत देने आई थी। मैं देश से अपील करती हूं कि इस तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाएं। बेटियों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। अंकिता भंडारी के माता-पिता भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। मैंने हाथरस पीड़िता के भाई से भी बात की है और वह भी न्याय का इंतजार कर रहा है।
लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिलेगा
वही इस मामले में सोशल एक्टिविस्ट योगिता भयाना ने कहा कि हमें उम्मीद है कि इतने लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिलेगा। सबसे पहले, मैं सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देना चाहती हूं कि उन्होंने इस मामले को इतनी जल्दी खुद संज्ञान में लिया, वेकेशन बेंच और चीफ जस्टिस ने इस पर तुरंत ध्यान दिया। हमें उम्मीद है कि हाईकोर्ट का आज का फैसला पलट दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीड़िता को उम्मीद है कि उसे इंसाफ मिलेगा। उसकी सेहत स्थिर है, और अभी वह कोर्टरूम में है क्योंकि वह अपनी लड़ाई खुद लड़ना चाहती है। मुझे यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट इस लड़की को इंसाफ देगा। जबकि इस मामले में उन्नाव रेप पीड़िता की मां ने मीडिया से कहा कि मुझे सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है। हाईकोर्ट पर भी भरोसा है, लेकिन हाईकोर्ट में कुछ जजों ने मेरे साथ सही बर्ताव नहीं किया और मुझे सही जवाब नहीं दिए।
Unnao Rape Case: सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका
वहीं उन्नाव रेप मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा कुलदीप सिंह सेंगर को दी गई जमानत पर तत्काल रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर कुलदीप सेंगर को नोटिस भी जारी किया है। दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश के खिलाफ सीबीआई की ओर से दायर याचिका पर आज सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान चीफ जस्टिस ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि आमतौर पर यह नियम होता है कि अगर कोई व्यक्ति जेल से बाहर आ चुका है, तो कोर्ट उसकी आजादी नहीं छीनती, लेकिन इस मामले में स्थिति अलग है, क्योंकि कुलदीप सेंगर अभी एक अन्य मामले में जेल में बंद है। इसी आधार पर कोर्ट ने जमानत पर रोक लगाने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई जमानत पर रोक
सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह मामला एक नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म का है। सेंगर पर धारा 376 और पोक्सो एक्ट की धारा 5 और 6 के तहत आरोप तय किए गए थे। ट्रायल कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए एसजी तुषार मेहता ने बताया कि कोर्ट ने सेंगर को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट ने यह भी स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड किया था कि पीड़िता की उम्र 16 साल से कम, यानी 15 साल 10 महीने थी। इस सजा के खिलाफ सेंगर की अपील फिलहाल हाईकोर्ट में लंबित है। एसजी ने कहा कि धारा 375 के तहत सेंगर को दोषी ठहराया गया है और अगर अपराध किसी प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा किया गया हो, तो उसमें न्यूनतम सजा 20 साल या उम्रकैद तक हो सकती है। उन्होंने यह भी दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने इस तथ्य को नजरअंदाज किया कि धारा 376 के जिन प्रावधानों के तहत सेंगर दोषी पाए गए, उनमें भी उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के उस निष्कर्ष को भी गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि विधायक पोक्सो एक्ट की धारा 5 के तहत ‘पब्लिक सर्वेंट’ की श्रेणी में नहीं आता।
उन्होंने साफ कहा कि जब पीड़ित नाबालिग हो, तो यह मायने नहीं रखता कि अपराधी सार्वजनिक पद पर है या नहीं। वहीं, कुलदीप सेंगर की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे और हरिहरन ने बचाव पक्ष की दलीलें पेश कीं। बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रोक लगा दी है।






