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ज़मीन से आसमान तक का सफ़र: ऑटो चलाने से एयरलाइन खड़ी करने तक श्रवण विश्वकर्मा की संघर्षगाथा

ज़मीन से आसमान तक का सफ़र: ऑटो चलाने से एयरलाइन खड़ी करने तक श्रवण विश्वकर्मा की संघर्षगाथा

UP News: कभी दो वक्त की रोज़ी के लिए मेहनत करने वाला एक सामान्य युवक, आज एविएशन सेक्टर में अपनी अलग पहचान बना रहा है। यह कहानी है उत्तर प्रदेश के रहने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा की  जिनका सफ़र बताता है कि हालात कितने भी कठिन हों, अगर इरादे मज़बूत हों तो रास्ते अपने-आप बनते हैं।श्रवण कुमार की औपचारिक शिक्षा दसवीं कक्षा तक ही रही, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उनका मानना है कि शिक्षा ज़रूरी है, लेकिन ज़िंदगी की असली समझ अनुभव, मेहनत और संघर्ष से आती है। हालातों से लड़ते हुए उन्होंने सीखना कभी बंद नहीं किया

UP News: एक फैसला नहीं, हालातों से निकला रास्ता

प्रॉपर्टी और खनन कारोबार से मिली दिशा अपने करियर की शुरुआत उन्होंने सीमेंट, प्रॉपर्टी और खनन जैसे क्षेत्रों से की। इसके बाद टीएमटी सेक्टर में काम करने का मौका मिला। इन्हीं व्यवसायों ने उन्हें सिस्टम, रिस्क और फैसले लेने की समझ दी। आज इसी अनुभव की बदौलत उनके पास 400 से अधिक गाड़ियों का एक सशक्त नेटवर्क है, जिसने आगे बढ़ने की राह को और मजबूत किया।उनके जीवन में ऐसा कोई एक पल नहीं था जिसने सब कुछ बदल दिया हो। बल्कि हर मुश्किल परिस्थिति ने उन्हें कुछ सिखाया। श्रवण मानते हैं कि जीवन ने जो सबक दिए, वही उनकी असली शिक्षा बने और उसी के सहारे वे लगातार आगे बढ़ते रहे।

UP News: ऑटो से एविएशन तक: हिम्मत की लंबी उड़ान

कभी ऑटो चलाकर जीवन चलाने वाले श्रवण ने खुद से एक सवाल किया अगर यहीं रुक गया तो ज़िंदगी भी यहीं रुक जाएगी।” यही सोच उन्हें आगे ले गई। कुछ करने की जिद, जोखिम उठाने का साहस और लगातार मेहनत  यही उनकी असली पूंजी बनी। एविएशन सेक्टर में कदम रखने का निर्णय 2020–21 के दौरान उन्होंने महसूस किया कि आने वाले समय में एविएशन सेक्टर तेज़ी से बढ़ने वाला है। देश की बदलती ज़रूरतों और कनेक्टिविटी की मांग ने उन्हें इस दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया। गहन रिसर्च, सेक्टर की समझ और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने तय किया कि वे इसी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाएंगे।

शंख एयरलाइन: एक सपना, एक मिशन

आज श्रवण कुमार विश्वकर्मा शंख एयरलाइन के एमडी हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ एक कंपनी खड़ी करना नहीं, बल्कि देश को बेहतर, भरोसेमंद और सुलभ हवाई सेवा देना है। उनका फोकस बड़े शहरों और प्रमुख राज्यों को जोड़ने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है। नकारात्मक सोच से दूरी, आत्मविश्वास से नज़दीकी श्रवण कहते हैं कि उनके मन में कभी हार मानने का विचार नहीं आया। वे नकारात्मक सोच को खुद से दूर रखते हैं। उनका विश्वास है “मैं जिस मुकाम तक संघर्ष करके पहुंचा हूं, अगर कभी गिरने की नौबत भी आई, तो उससे ऊपर उठना भी जानता हूं।”

UP News: पिता का साया उठा, जिम्मेदारियां बढ़ीं

पिता के निधन के बाद जीवन और भी कठिन हो गया। परिवार की जिम्मेदारियों ने उन्हें भीतर से तोड़ा जरूर, लेकिन कमजोर नहीं किया। उन्हीं हालातों ने उन्हें और मजबूत बनाया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आने वाले पांच सालों की बड़ी तैयारी श्रवण कुमार का दावा है कि अगले पांच वर्षों में शंख एयरलाइन एविएशन सेक्टर में एक मजबूत और भरोसेमंद नाम बनेगी। उनका आत्मविश्वास, स्पष्ट विज़न और काम करने की रफ्तार इस बात की गवाही देती है कि उनकी उड़ान अभी और ऊंची जाने वाली है।

संघर्ष से सफलता तक एक मिसाल

यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। श्रवण कुमार विश्वकर्मा की यात्रा साबित करती है कि हालात चाहे जैसे हों, अगर सोच बड़ी हो और हौसला अडिग तो मंज़िल दूर नहीं रहती।

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