NHRC: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में एक महिला के कथित सार्वजनिक अपमान की घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सामने आए इस मामले को आयोग ने मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में माना है और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस घटना ने न केवल सामाजिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि कानून व्यवस्था और मानवाधिकार संरक्षण की स्थिति पर भी चिंता बढ़ा दी है।
झाबुआ की घटना पर आयोग का संज्ञान
आयोग के अनुसार, झाबुआ जिले में एक महिला पर किसी अन्य व्यक्ति के साथ भाग जाने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद कथित तौर पर ग्रामीणों ने उसे सजा देने के नाम पर अपमानित किया। महिला का सिर मुंडवा दिया गया और उसके पति को उसके कंधों पर बैठाकर पूरे गांव में घुमाया गया। इस अमानवीय कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला प्रकाश में आया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि यह जानकारी सही पाई जाती है, तो यह मानवाधिकारों का गंभीर हनन है।
NHRC: प्रशासन को नोटिस, रिपोर्ट तलब
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने झाबुआ के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि रिपोर्ट में जांच की वर्तमान स्थिति, दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और पीड़िता को दिए गए मुआवजे का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए। मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने महिला को सुरक्षा प्रदान की है और इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।
ओडिशा में छात्राओं की मौत पर भी संज्ञान
इसी क्रम में आयोग ने ओडिशा के गजपति जिले में एक सरकारी विद्यालय में हुए दर्दनाक हादसे पर भी स्वतः संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 15 अप्रैल को विद्यालय के प्रवेश द्वार का लोहे का गेट गिरने से दो छात्राओं की मौत हो गई थी। घटना उस समय हुई जब छात्राएं स्कूल परिसर में खेल रही थीं और अचानक गेट गिरने से वे मलबे के नीचे दब गईं। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
NHRC: मानवाधिकार संरक्षण पर उठे सवाल
आयोग ने ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव और संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को भी नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग का मानना है कि यदि रिपोर्ट में दी गई जानकारी सही है, तो यह प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों में गंभीर कमी को दर्शाता है। दोनों मामलों में आयोग ने स्पष्ट किया है कि मानवाधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अमानवीय व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।








