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कांकसा-बीरभूम सीमा पर अस्थायी पुल को लेकर विवाद, सड़क जाम से जनजीवन प्रभावित

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Bengal News: कांकसा। मकर संक्रांति के अवसर पर बीरभूम के प्रसिद्ध जयदेव केंद्रुली मेले में जाने के लिए अजय नदी पर अस्थायी पुल निर्माण को लेकर दो जिलों के प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। पुल निर्माण का कार्य शुरू होते ही विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद मंगलवार रात बीरभूम जिला प्रशासन ने काम पर रोक लगा दी। इससे निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया और स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई।

निर्माण कार्य रोके जाने से भड़के ग्रामीण

बीरभूम जिला प्रशासन द्वारा अस्थायी पुल निर्माण रोके जाने के विरोध में बुधवार को कांकसा के शिवपुर गांव के ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। विदबिहार ग्राम पंचायत अंतर्गत शिवपुर गांव के लोगों ने मुचिपाड़ा–शिवपुर रोड पर टायर जलाकर और बांस बांधकर सड़क जाम कर दिया। जयदेव पुल के सामने नवग्राम ग्राम के समीप मुख्य सड़क को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिससे यातायात ठप हो गया। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही कांकसा थाना की भारी पुलिस बल मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी कि जब तक अजय नदी पर अस्थायी पुल का निर्माण दोबारा शुरू नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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Bengal News: पुराने पुल से जुड़ी आस्था और परेशानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दशकों से कांकसा और बीरभूम के जयदेव के बीच अजय नदी पर अस्थायी पुल ही आवागमन का मुख्य साधन रहा है। मकर संक्रांति के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसी रास्ते अजय नदी में स्नान कर जयदेव केंद्रुली मेले में जाते थे। बरसात में पुल बह जाने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

अनुमति के बाद काम शुरू होने की उम्मीद

लोगों की समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहल पर स्थायी पुल का निर्माण हुआ, जिसका उद्घाटन करीब छह महीने पहले किया गया था। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि नए पुल से मेले तक पहुंचने में 4–5 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इसी कारण अस्थायी पुल की मांग की गई थी। बीरभूम जिला प्रशासन ने बिना अनुमति निर्माण पर रोक लगाई थी, लेकिन अब दोनों जिलों के बीच बातचीत के बाद अनुमति देने पर सहमति बनी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य फिर शुरू किया जाएगा।

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